Friday, April 28, 2017

बच्चों

“बच्चों के चरित्र निर्माण में पिता से माता की ज़िम्मेदारी अधिक होती हैं!!”


-    माता जीजाबाई

Thursday, April 27, 2017

शिक्षा

शिक्षा का अभाव ज्ञान का अभाव लाता हैं, जिससे नैतिक पतन होता हैं. इसलिए शिक्षित बनो!!”


-    ज्योतिराव फुले

Wednesday, April 26, 2017

ज्ञान

न जानू कोई विधि विधान प्रभु
ना मंत्रो का हैं ज्ञान हमें प्रभु
मंगल कार्य करूँ मैं हरदम
इतना दे दो ज्ञान प्रभु
ना फूलों की माला लाई
ना नैवैध चढ़ाने को
खाली हाथ चली आई मैं
प्यार तुम्हारा पाने को
सब आते महंगी कारों में
मैं तो पैदल आई हूँ
लाइन बड़ी लंबी लगती हैं
महंगे भेट चढ़ाने को
मैं कोने में खड़ी देखती
दुनिया के इस जगमग को
पंडित भी खुश हो जाते हैं
ऐसे भक्त के आने पर....

Tuesday, April 25, 2017

थे अश्रु भरे दो नयना

थे अश्रु भरे दो नयना
दिन राते रही बेचैनी
कुछ ख़ास करूँ भूतल पर
थी उथल-पुथल जीवन में
लिखना कुछ खास था मुझको!

थे अश्रु भरे दो नयना
मन के उलझन में फंसकर
करबद्ध खड़े थे रण में
चारों ओर उदासी छाई
मन में बेचैनी इतनी
कर जाऊं कुछ तो मैं भी!

थे अश्रु भरे दो नयना
हैं कैसी ये उलझन जो
प्रभु आप मिटा नहीं सकते
क्यों अंधकार छाया हैं
मैं लाख करूँ कोशिश पर!

थे अश्रु भरे दो नयना
मैं हार हमेशा खाती
हैं कमी कहाँ कोशिश में
मुझे इतनी राह दिखाओ!

मैं कोशिश करने में फिर
पीछे नहीं हटूंगी
मैं सेवा और करूँ क्या
जब खुद उलझी रहती हूं!

इन अश्रु भरे नयनों को
खुशियों की राह दिखा दो
इस उलझे जीवन को
सेवा का पथ दिखला दो
जो कमी हमारे अंदर
हे प्रभु हमें बतला दो
हमें सच्ची राह दिखा दो
ख़ुशियों का पता बता दो!!

Saturday, April 22, 2017

सम्यक् कर्म

“सभी के कार्य पवित्र होने चाहिए. पवित्र कार्यों के माध्यम से मनुष्य अपने मानवत्व को प्रकाशित करता हैं. मानवत्व के मार्ग को समझ सकता हैं.”

“भगवान बुद्ध ने कार्य के तीन नियम बनाए. हाथ अच्छे काम करे. सत्य कंठ का भूषण हैं. पवित्र कथाओं को सुनना कान का आभूषण हैं.”


-    सत्य साईबाबा 

Wednesday, April 19, 2017

साईं हमारे

शत शत नमन तुम्हें साईं बाबा
सत्य साईं हैं नाम तुम्हारा
पुट्टपर्थी अवतारा
तुम हो प्रभु साईं प्रेम अवतारा
दुखी दरिद्र के तारणहारा!

शत शत नमन तुम्हें साई बाबा
साईं हमारे नाम तिहारे
कर दे बेड़ा पार हमारा
प्रभु आप कृपा कुछ ऐसा करो
हर दिल में भक्ति की ज्योति जले!

शत शत नमन तुम्हें साईं बाबा
साईं हमारे हम साईं के
ऐसा प्रेम हमारा
साईं कृपा अद्भुत मिल जाए
प्रेम से साईं को जो भी पुकारे!

शत शत नमन तुम्हें साईं बाबा
साईं सदा हैं पास हमारे
ऐसा हैं विश्वास हमारा
साईं का नाम पुकार सदा
अब करले बेड़ा पार!


साईं राम साईं राम!!

Sunday, April 16, 2017

व्यवस्था

बात उन दिनों कि हैं जब मैं कॉलेज में पढ़ता था. हमारे कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर के रिटायर होने के मौके पर इनके सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था और उसके बाद सभी के लिए भोजन की व्यवस्था थी. इन सारी व्यवस्था की जिम्मेवारी मुझे सौंपी गई थी. हम सबने कार्यक्रम के लिए खूब तैयारी की, कई प्रोग्राम पेश किए गए. पूरा हॉल विद्यार्थियों और अध्यापकों से खचा-खच भरा हुआ था. हॉल लगातार तालियों की गूंज से गुंजायमन हो रही थी. तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने हमारी व्यवस्था की पोल मिनटों में खोल दी और चारो ओर शोर-ही-शोर. जहां मुझे मेरी व्यवस्था के लिए वाह-वाही मिल रही थी, वहां अब कुछ चल रहा था तो आरोप-प्रत्यारोप. मंच का हिस्सा टूट गया था और उसमें प्रोफेसर साहब को भी थोरी बहुत चोट आ गई थी. इसी बीच किसी ने पुलिस और मीडिया वालो को फ़ोन कर दिया, फिर क्या था बाकी बची कसर पूरी हो गई. मैं जब तक कुछ समझ पाता पुलिस ने मेरे हाथ में हथकड़ियां पहना दी थी और मीडिया वाले ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगे, “ब्रेकिंग न्यूज़ आज कॉलेज के अंदर जो हुआ वो कोई छोटी बात नहीं हैं, कही इसमें किसी की साजिश तो नहीं हैं. यह लड़का जो सारी व्यवस्था देख रहा था, किसी अराजक तत्व से तो नहीं मिला हुआ हैं. पुलिस विभिन्न पहलु से इस केस की जांच कर रही हैं. हम जल्द ही इस खबर पर आपको अपडेट देंगे”. आज हमारे देश में मीडिया वाले इतने हाईटेक हो गए हैं कि सारी व्यवस्था उन्ही के इर्द-गिर्द घुमती नज़र आती हैं. वो अपनी मनगढ़ंत कहानी को इतनी पुरजोर तरीके से रखते हैं कि हर सुनने वाले को लगता हैं कि सच यही हैं और फिर पुलिस वालों को उस पर मुहर लगाने के लिए चंद ऐसी कड़ियाँ जोड़नी होती हैं जो पुलिस के गिरफ्त में आए व्यक्ति को गुनहगार साबित कर दे और यह काम पुलिस वालों के लिए कोई बड़ी बात नहीं हैं.
ख़ैर मेरे गिरफ्तार होने की सूचना मेरे परिवार वालों को दे दी गई. घर में कोहराम मच गया आनन-फानन में माँ और पापा पुलिस स्टेशन की ओर भागे. जब पुलिस वालों ने पापा को बताया कि, “आपके बेटे ने जो किया हैं वो घोर अपराध हैं. अपने गुरु को जान से मारने की कोशिश की हैं, इसे आसानी से बेल नहीं मिलेगी”. पापा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई. वो पुलिस वाले से जिद्द करने लगे कि, “मुझे मेरे बेटे से एक बार मिलने दीजिए. मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता हैं” लेकिन पुलिस वाले टस से मस नहीं हुए. पुलिस वालों ने कहा, “सर, बड़ा हाई प्रोफाइल केस हैं इसमें हम कुछ नहीं कर पाएंगे. जब तक कॉलेज प्रबंधन से हमारी बात नहीं हो जाती हैं. हम आपके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे”. साथ ही पुलिस वालों ने पापा को एक सलाह भी दे दी कि कोई अच्छा वकील कर लीजिए नहीं तो बेटे को बचाना बड़ा मुश्किल होगा. मेरे माता-पिता को कुछ सूझ नहीं रहा था. उनके जिस बेटे ने कल तक एक चीटी नहीं मारी वह आज अचानक अपने गुरु को मारने की कोशिश कैसे कर सकता हैं.
      वह भागते-भागते कॉलेज प्रबंधन से मिलने के लिए पहुंचे, तब तक काफी रात हो चुकी थी. उन्हें कॉलेज के गेट से ही बैरंग वापस आना पड़ा. माँ का रो-रोकर बुरा हाल था. मैं बेबस, पुलिस बेख़बर, कॉलेज प्रबंधन भी बेबस लेकिन इन सबके बीच जो कोई पीस रहा हैं वो तो माता-पिता जिन्होंने हमें जन्म दिया हैं. गलती चाहे किसी की भी हो लेकिन व्यवस्था और हमारी गलतियों का खामियाज़ा किसी को भुगतना पड़ता है तो वह हमारी धरती माँ, हमारी मात्रभूमि को. अतः मैं अपने सभी युवा बंधुओं का ध्यान उनकी अपनी ज़िम्मेदारी जो चाहे छोटी से छोटी क्यों न हो सावधानी पूर्वक और ईमानदारी से निभानी चाहिए ताकि माहोल में भ्रम फैलने से पहले ही रुक जाए क्योंकि हम सब कही न कही एक दुसरे से जुड़े हुए हैं और एक की गलती की सज़ा दूर तक कई लोगो को होता हैं. हमारी व्यवस्था की दुर्दशा किसी एक की वजह से नहीं बल्कि हम सबकी वजह से हुई हैं. अतः हमें यह संकल्प करना होगा कि अगर हमें या हमारे समाज को आगे बढ़ाना हैं तो हम सबको मिलकर एक इमानदार कोशिश करनी होगी.

Thursday, April 13, 2017

बेटी की पुकार

मैया मोहे प्यार करो
मैं चंद बरस ही साथ रहूंगी
बिटिया तू आँखों का तारा
मेरे दिल का टुकड़ा हैं तू
पर मजबूरी हैं समाज की
प्यार तो दिल में बहुत हैं मेरे
पर दिखला नहीं सकती!

मैया मोहे प्यार करो
मैं चंद बरस ही साथ रहूंगी
मैं तेरे दिल का हूं टुकड़ा
दर्द तेरा झट से समझूंगी
बिना कहे मैं जान लेती हूं
तेरे मन की उथल-पुथल!

पर माँ तू कमज़ोर न बनना
मैं तेरा हर काम करुँगी
मेरे जन्म के खातिर मैया
अब तेरा अपमान न होगा!

जीवन को पैगाम बनाने की ताकत
मैं रखती हूं माँ
अपनी माँ को दुनिया में
सम्मान दिलाने की ख़ातिर
हर बेटी अब जाग उठी हैं!

जीवन का यह सार समझ माँ
हम जननी हैं सृजन हमारा काम
मेरे पुत्र मुझे ही माने
दुनिया भर का बोझ
उन्हें नहीं हैं भान ज़रा भी
मेरे बिन अस्तित्व का उनका

कोई नहीं हैं नाम!!

Wednesday, April 12, 2017

बिटिया रानी

रिया एक ऐसी लड़की का नाम हैं जिसका जन्म एक साधारण परिवार में कई भाई-बहनों के बीच होता हैं लेकिन एक सामंतवादी परिवार होने के बावजूद रिया को अपने पिता का भरपूर प्यार और उनका विश्वास मिलता हैं. आस-पास के रुद्धिवादी माहौल के बावजूद रिया के पिता को अपनी बेटी के ऊपर पूरा भरोसा होता हैं और हमेशा अपनी बेटी का हौसला बढ़ाते हैं. रिया लड़की होने के बावजूद लड़कियों की तरह का सपना देखना बिल्कुल पसंद नहीं करती हैं. उसे अपनी सहेलियों की तरह शादी, पति या पैसा का सपना देखना कभी नहीं भाता हैं. उसे बस धुन-सी होती हैं कि उसे कुछ अलग करना हैं, लेकिन क्या करना हैं ये उसे भी नहीं पता.
वह हमेशा एक मिसाल कायम करने की कोशिश करती हैं, परिवार से लेकर स्कूल-कॉलेज, और अपने मित्रो के बीच सभी उसे बहुत पसंद करते है, सब लोग उसे प्यार करते हैं. लेकिन इसी बीच कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें रिया की अच्छाई या उसकी तारीफ़ कभी अच्छी नहीं लगती इन सबसे बेख़बर रिया अपनी ज़िन्दगी में मशगूल, अपनी ज़िन्दगी के 20 साल पूरे कर लेती हैं.
यहाँ से उसकी ज़िन्दगी में परिवर्तन आता हैं और उसकी शादी हो जाती हैं. अब अचानक उसके सामने कई रिश्ते, कई जिम्मेवारी आ जाती हैं जिसके विषय में रिया ने तो कभी सोचा ही नहीं था लेकिन रिया भी ठहरी जिद्द की पक्की और अपने पिता की लाडली बेटी जो अपने पिता का सम्मान बढ़ा तो सकती हैं लेकिन उसकी वजह से उसके पिता का सम्मान कम हो ऐसा नहीं हो सकता हैं.
रिया अपनी हर जिम्मेवारी पूरी ईमानदारी से निभाती हैं. रिया अपने व्यवहार से अपने ससुराल वालो का दिल जितने में कामयाब होती हैं, लेकिन रिया को क्या पता था कि नियति ने तो उसके लिए कुछ और ही सोच रखा हैं. रिया की ज़िन्दगी में खुशियाँ इतनी आसानी से मिल जाये तो कुछ अलग वाली बात कहाँ से होगी, उसकी ज़िन्दगी तो अपने आप में निराली थी, अनोखी थी और लीक से हट कर थी.
एक दिन सड़क दुर्घटना में उसके पति की मृत्यु हो जाती हैं और उसी दिन से रिया की ज़िन्दगी में संघर्षो का दौर शुरू हो जाता हैं. रिया ने अपनी खुशियों को जी भरकर जिया भी नहीं था कि इतनी बड़ी विपत्ति उसके सामने आकर खड़ी हो जाती हैं और इस विपत्ति के लिए उसके परिवार वाले उसे ही ज़िम्मेवार मानते हैं, इस घटना के बाद सबने उससे ऐसा मुह फेरा जैसे उनका रिया से कोई रिश्ता ही नहीं था. ख़ैर रिया भी कब हार मानने वाली थी. रिया ने अपने पति के बिज़नेस को अपना संबल और अपना उद्देश्य दोनों ही बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी. रिया अपना कार्य लगन और मेहनत से करती रही. कई साल की कठोर मेहनत के बाद रिया ने वह सब करने में कामयाबी हासिल की जैसा वो चाहती थी. उसे अगर किसी बात का मलाल था तो सिर्फ इतना कि काश उसकी कामयाबी में उसके पति और परिवार दोनों साथ होते लेकिन नियति के लिखे को कौन टाल सकता हैं?.

रिया ने समाज के सामने एक अच्छी मिसाल पेश की थी, साथ ही अपने बच्चो को सही दिशा देने में पूरी तरह कामयाब रही. रिया का मानना था कि वो यह सब कर पायी क्योंकि उसे अपने और अपने प्रभु पर पूरा विश्वास था. जब हमारी नियत नेक होती हैं और मेहनत भरपूर तो कामयाबी ज़रूर मिलती हैं. अगर रिया की तरह हर बेटी ठान ले कि हमें हर हाल में कामयाब होना हैं तो हमारे समाज की तस्वीर अवश्य बदलेगी. बेटियाँ समाज का गौरव होती है न की बोझ.....

Sunday, April 9, 2017

मेरी माँ

अगर माँ न होती तो मैं कैसे होती
कौन लोरी सुनकर हमें फिर सुलाती
बड़े प्यार से हमको खाना खिलाती
हमें अपने पैरों पर चलना सिखाती!

अगर माँ न होती तो मैं कैसे होती
हमें उलझनों से बचाती हैं हर दम
फर्क हमको सिखाती गलत और सही में
हमें मुश्किलों से हैं लड़ना सिखाती!

अगर माँ न होती तो मैं कैसे होती
हमें ज्ञान का पहला पाठ पढ़ाती
हमें ज़िन्दगी का सबक दे के जाती
हमें प्यार करना सभी से सिखाती!

हमें तो ख़ुदा ने रहम से नवाज़ा
ममतामयी माँ का तोहफ़ा दिया हैं
दुनिया की सारी ख़ुशी मुझसे ले लो
जो मुझमें किया हैं इनायत न छीनो
मेरी माँ का साया सदा मुझको दे दो!

प्रभु माँ का साया सभी को मिले
माँ की ममता से वंचित न हो कोई घर
माँ की ममता हैं अनमोल सबके लिए
माँ तो गौरव है अपने संतान की!

माँ की छाया प्रभु का तो वरदान हैं
जो हमें हैं मिला वो तो अनमोल हैं
माँ की आदर सदा उसका सम्मान हैं
क़र्ज़ माँ का चुका कोई सकता नहीं
माँ के सम्मान में कोई कमी न रहे

ऐसी कोशिश हो हरदम संतान की!

Saturday, April 8, 2017

आत्म मंथन

जब एक औरत की कल्पना हम करते हैं तो हमारे दिमाग में हमेशा होता हैं एक बेचारी, चुपचाप किसी कोने में खड़ी अपने तमाम रिश्तों के बोझ तले दबी एक छाया, जिसका अपना कोई वजूद नहीं. कभी बेटी, कभी बहन तो कभी पत्नी और फिर माँ, चाची, मौसी, दादी और नानी के रूप में अपने कर्त्तव्य का भलीभांति निर्वहन करती रही शिकायत कभी न करे. आवाज़ होकर भी बेजुबान रहे. ग़लतियों को देखकर भी चुपचाप रहे. समझ कर भी नासमझ बनी रहे. देख कर भी अनदेखा कर दे. लेकिन हम ये कल्पना क्यों नहीं कर सकते कि जो सृजन करती हैं वो विकास भी कर सकती हैं और अगर उसकी सोच भटक जाए तो उसके लिए विनाश भी कोई बड़ी चीज़ नहीं हैं. पर हमारे समाज की विडंबना ही कही कही जायेगी कि वह विनाश तो चाहता हैं पर विकास नहीं. हम अपनी जिस ऊर्जा को विनाश लीला की रूपरेखा तैयार करने में लगा देते हैं अगर उसी ऊर्जा को विकास के लिये लगाया जाए तो हमारी सोच, हमारा समाज और सबके साथ हम विकास और विचार की गई उचाईयों को छु सकते हैं. मैं इन सबके लिए सिर्फ पुरुष समाज को ज़िम्मेदार नहीं मानती, इसके लिए अगर सच में कोई ज़िम्मेदार है तो वह हैं औरत क्योंकि वो माँ हैं. अगर जन्मदात्री ही अपने संतान के हक़ की रक्षा न कर पाए और उसके विरोध में खड़ी हो जाए तो फिर पहली लड़ाई तो वह बच्चा पहले दिन ही हार गया. ख़ैर ये बात बहुत लंबी हो सकती लेकिन मैं इस कहानी के माध्यम से समाज में पसरी हुई उस बीमारी की ओर ध्यान दिलाना चाहती हूँ जहां हम चाँद पर तो पहुंच गए हैं. पुरुष और महिला को बराबर में खड़े करने के लिए तमाम कानून भी बना दिये लेकिन हम अपने मन में पुरुष और महिला को बराबरी का दर्जा आखिर कब दे पाएंगे. आज हमें इसके लिए आत्ममंथन की सख़्त ज़रुरत हैं.....

Friday, April 7, 2017

मन की बात

रात का सपना
कब होता हैं अपना
रोज़ का रोना हैं यह
फिर तुम क्यों डरते हो
करना जो तुम वही करो
पर कुछ भी दर कर न करो!

करना हैं जो करो
मन को अपने वश में करो
सोचों न जो बीत गया
पर आने वाले दिन को जियो!

करना हैं जो करो
चाँद की दूरी घटती जा रही हैं
पर अपनों के बीच चाँद से भी बड़ी दूरी हैं
हर आदमी की अपनी एक मजबूरी हैं!

करना हैं जो करो
सबकुछ अपने वश में हो
ऐसा वहम कभी न करो
जी लो हर दिन को
चाहे खट्टा हो या मीठा
अनुभव तो अनुभव हैं
कभी तो काम आएगी
आँखों में आँसू दे कर हो
या चेहरे पर मुस्कराहट
हर कीमत पर ज़िन्दगी
एक अनमोल हीरा हैं
इसको सहेज के रखना ही हैं
प्रभु की बंदगी!!

Tuesday, April 4, 2017

सज़ा

एक दिन की बात हैं, रात के भोजन के बाद मैं अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ी थी. बाहर चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ था. ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी. सड़कें सुनसान होने लगी थी. बिजली के खम्भे पर लगी बड़ी-बड़ी लाइटें इस तरह रौशनी बिखेर रहे थे मानो चांदनी रात ने सड़को पर सफ़ेद चादर बिछा दी हो. सब कुछ कितना अच्छा लग रहा था कि तभी सन्नाटे को चीरती हुई एक महिला तेजी से सड़क पर भागती हुई आई और अपने गोद से ऐसे लगा मानो कोई कपड़े की गठरी ज़मीन पर रख रही हो, सड़क के किनारे रख कर तेज़ी से भागती हुई अँधेरे में विलीन हो गई. जबतक मैं यह समझ पाती कि आखिर माजरा क्या हैं वह तो अँधेरे में ग़ायब हो चुकी थी. कुछ ही पल में वहां कुछ कुत्ते आकर तेज़-तेज़ भौंकने लगे, मैं समझ नहीं पा रही थी कि आखिर वहां हो क्या रहा हैं. मैं नीचे जाऊं या नहीं, मेरा मन आशंकित होने लगा. कई तरह के बुरे-बुरे विचार मन में आने लगे. मैं अनमने ढंग से सड़क से अपनी नज़र हटा कर पीछे की ओर चल पड़ी तभी पी०सी०आर वैन की आवाज़ सुनाई दी. पी०सी०आर वैन वहां आकर रुकी, कुछ पुलिसवाले वैन से उतरे और उस गठरी को चारों ओर से घेर लिया. तभी मेरी नज़र एक पुलिसवाले के हाथ पर गई और मेरी नज़र वही की वही ठिठक गई, मेरे हाथ-पैर ऐसे कांपने लगे जैसे उस पुलिसवाले ने मेरी ही कोई चोरी पकड़ी है लेकिन मेरी यह दशा तो उस पुलिसवाले के हाथ में उस नवजात बच्चे को देखकर हुई थी. उसकी टुकड़-टुकड़ ताकती गोल-मटोल सी आँखें पुलिसवाले को ऐसे देख रही थी मानो कुछ कहने को बेचैन हो. यह सोच-सोचकर मेरे हाथ-पैर ठन्डे हो रहे थे कि अब उस बच्चे का क्या होगा? कौन उसे अपनाएगा? आखिर उस बच्चे का कुसूर क्या था कि उसकी माँ ने उसे इतनी कठोर सज़ा दी? क्या उसकी माँ को तनिक भी ख़ुशी नहीं हुई होगी उसके जन्म पर? क्या वह माँ नहीं बनना चाहती थी? या फिर किसी के द्वारा छली गई थी? जो भी हो लेकिन वह तो अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो गई पर अब उस बच्चे का क्या जिसे वह मरने के लिए छोड़ गई हैं? यह सज़ा तो उसे उस जानवर को देनी चाहिए थी जिसने उसे यह सब करने को मजबूर किया, फिर उसने यह सज़ा उस बच्चे को क्यों दी. यह सज़ा तो उसे अपने आपको देनी चाहिए थी. बगैर सोचे समझे उसने यह कदम उठाया. तब उसने क्यों नहीं सोचा कि इसका परिणाम क्या होगा और जो वो कर रही हैं वो सही नहीं हैं. यह सोचते-सोचते मेरी आँख कब लग गई मुझे पता ही नहीं चला.
               जब मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी. फिर सब कुछ वैसा ही था, जैसा पहले हुआ करता था. मेरा मन थोड़ा भारी-भारी सा लग रहा था. मैं समझ नही पा रही थी कि रात जो घटा था वो मेरा सपना था या सच, मैं बार-बार अपने मन को तसल्ली दे रही थी कि काश वो मेरा सपना ही हो पर तभी मेरे नौकर कि आवाज़ आई , “मालकिन आपसे मिलने इंस्पेक्टर साहब आए है.” इतना सुनते ही एक बार फिर मेरे आँखों के सामने वो पूरी घटना चलचित्र की तरह घूम गई और मैं फिर अजीब-सी उलझन में पर गई पर फिर नौकर की आवाज़ सुन मेरी तन्द्रा भंग हुई. मैं अनमने ढंग से उठी और नीचे की ओर चल दी. जब मैं नीचे पहुँची तो देखा ड्राइंगरूम में दो पुलिसवाले बैठे हुए थे. मुझे देखते ही वह उठ खड़े हुए और बोल पड़े, “मैडम हमे आपसे कुछ जानकारी लेनी थी इसलिए आपको परेशान करने चले आए.”
“अरे नही कोई बात नही आप बैठिये और बताइए कि कैसे आना हुआ.” पुलिसवाले ने कहा, “मैडम आपके घर के पास रात एक बचा पड़ा मिला था उसी के संबंध में कुछ जानना चाहते है.”
“हाँ, मुझे पता है.”
“आपको पता है?”
“हाँ, क्योंकि जिस वक्त आपकी गाड़ी मेरे घर के नीचे रुकी थी तो सायरन की आवाज़ सुन कर मेरी भी नींद खुल गई थी. मैंने रात को सबकुछ देखा था. अब वो बच्चा कैसा है? कुछ पता चला उसके बारे में?”
“नही, हमलोग  कोशीश कर रहे हैं, अख़बार में भी इश्तहार दे दिया हैं. ताकि कहीं से कोई खबर मिल जाए. हमने अभी अनाथ आश्रम वालों को बुलाकर बच्चा उनको सौप दिया हैं. बच्चा अभी बिल्कुल स्वस्थ हैं. मैडम आपने उस महिला का चेहरा थोड़ा बहुत तो देखा होगा. नहीं उपर से अँधेरे में मुझे कुछ ठीक से नहीं दिखा. ठीक हैं अगर आपको कुछ भी याद आता हैं तो आप जरूर बतायेंगी. हमें उस महिला को खोजने में आसानी हो जाएगी. बिल्कुल सर. 
उसके बाद पूलिस वाले तो चले गए लेकिन मेरी उलझन और बढ़ गई. इसी सोंच में मेरा पूरा दिन निकल गया. अगले दिन फिर पुलिश वाले हमारे घर आ गए. सर अब क्या हुआ मम उसी केस के सिलसिले में आयें हैं. कुछ पता चला. जी कुछ खास नहीं लेकिन बच्चे के लिए एक अच्छी  हैं खबर ज़रूर है”
“क्या??”
“अखबार में बच्चे के विषय में पढ़कर किसी व्यापारी दंपति का फ़ोन हमारे पास आया था कि हम उस बच्चे को गोद लेना चाहते है.”
“यह तो बड़ी ख़ुशी की बात है.”
“हाँ, अगर उस बच्चे के विषय में एक-दो दिन में कुछ नही पता चला तो हम लोग उसे उस दंपति को दे देंगे ताकि उसकी परवरिश सही ढंग से हो सके.”
यह सब सुन मेरे मन से तो जैसे एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया और मैं  पहले की तरह ही तरोताज़ा महसूस करने लगी. काश इस वेदना को उसकी माँ भी समझ पाती.

Monday, April 3, 2017

नयी सुबह

आज सुबह जब नींद खुली तो, ऐसा लगा
जैसे फूलों का ख्वाब
जैसे सपनो की रात
जैसे जीवन की बात
जैसे उलझन हो साथ
जैसे मन हो उदास
जैसे सूरज की बात
जैसे पहली किरण
जैसे मन का हिरण
जैसे लागी लगन
जैसे तुमसे मिलन
जैसे चिड़ियों के कलरव से जागा ये मन
जैसे वर्षो से स्वप्न से जागी हूँ आज!

आज सुबह जब नींद खुली तो
परिवर्तन कुछ खास दिखा
सुबह-सवेरे चहल पहल थी
हर मुख पे मुस्कान दिखी
सुबह सुहानी, शाम निराली
मौसम में अजब खुमार दिखा
साफ सफाई की बातें अब
लोगों की दिनचर्या हैं
ऑफिस में भी बाबू अब
काम के लिए तैयार दिखे
हेलो हाय से दूरी थी

बस राम-राम का नाम दिखा!!

Sunday, April 2, 2017

अपनों का गाँव

चलो गाँव की ओर चले
कुछ कदम प्रगति की ओर चले
शहरों में जीवन भूल गए
अपनों के साथ भी छूट गए
जीवन जीने की राह चले
अब तो अपनों के गाँव चले!

चलो गाँव की ओर चले
गाँव की पंचायत कहाँ हैं
यहाँ पार्क में इक्के-दुक्के
लोग दिखाई देते हैं
और उन पर भी पैसे का
खुमार दिखाई पड़ता हैं!

चलो गाँव की ओर चलो
वहां दिल वालों की बस्ती हैं
जहां बजते ढोल-नगाड़े हैं
हर कोई खुश जहां रहता हैं
छोटे-छोटे हैं घर
पर उसमें ढेरों खुशियाँ रहती हैं!

चलो गाँव की ओर चलें
जहां उम्र का कोई न बंधन
जहां बुढापा नहीं सताती
कोई अकेलापन नहीं होता
अपनों का वहां गम नहीं होता
सपनो की कीमत नहीं लगती!

चलो गाँव की ओर चले
सब मिल बैठे पंचायत करे
एक दूजे के अनुभव से
अपने गाँव को फिर आबाद करे
सूनी गलियाँ, सूनी सड़के
अब फिर से हैं झूम उठी
आया मेरा अपना कोई!


चलो गाँव कि ओर चले!!

Saturday, April 1, 2017

माटी

हैं कसम मुझे इस माटी की
मैं इसका कर्ज चुकाउंगी
जीवन इस माटी से है बना
एक दिन माटी में मिल जाउंगी
पर इस माटी के गौरव को
एक मंजिल दे karजाउंगी
कुछ इस माटी को देकर के
कुछ इस माटी से लेकर के
सब माटी में मिल जाता हैं
पर इस माटी की खुशबू से
आनंद सभी को आता हैं
कुछ को इसका अनुमान लगा
कुछ अनजाने ही चले गए
कुछ ने माटी का मोल समझ
उसके कीमत को पहचाना
कुछ ने अपनी खातिर इसको
हर दम बदनाम किया करते
कभी जाति तो कभी मजहब के
छोले में दर्द दिया करते
जिसने इसकी कीमत जानी
इतिहास में नाम वो दर्ज हुआ
हैं गर्व उसे इस माटी पर
जिसने हैं उसको जन्म दिया
इसमें पलकर वह बड़ा हुआ
इसका गौरव बन पाया वह
हैं कसम मुझे इस माटी की

मैं इसका क़र्ज़ चुकाउंगी!!