यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

शनिवार, 14 सितंबर 2024

मेरे ख्वाब

रात कली कोई ख्वाब में आई 

और गले का हार हुई 

हँसता हुआ था उसका चेहरा 

आँखों में कोई रंग था गहरा 

होठ गुलाबी, आँख शराबी 

चाल में मादकता झलकी थी 

जब मैं सुबह को नींद से जागा 

खोया - खोया खुद को पाया 

थका - थका सा मन बोझिल था 

कहाँ गई वो हुस्न की मालिका 

जिससे आँखें चार हुई थी 

काश वो मेरे सामने होती 

कुछ अपने जज़्बात सुनाता 

नए - नए मैं गीत बनाता 

शायर बन उसको बहलाता। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें