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पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

मेरे बच्चों

मेरे बच्चों पढ़ते जाओ 

आगे -आगे बढ़ते जाओ 

विद्या का वरदान मिलेगा 

गुरु से विद्या दान मिलेगा 

कदम - कदम पर साथ मिलेगा 

गुरु का सर पर हाथ मिलेगा 

आसमान पर चढ़ते जाओ 

आगे -आगे बढ़ते जाओ 

खुशियों का संसार बसाओ 

मेरे बच्चों पढ़ते जाओ

आगे -आगे बढ़ते जाओ। 

गुरुवार, 18 सितंबर 2025

पहाड़

हमको बुलाये ए हरियाली 

ए पहाड़ के आँचल 

हमको छूकर जाये, बार-बार ये बादल 

कभी दूर तो कभी पास ए 

करते रहे ठिठोली 

भोर - सांझ ये आते जाते 

होठों पर खुशियाँ दे जाते 

दिन ढलते ही झम - झम करके 

खूब बरसते है ये बादल 

गड़ - गड़ करके झड़ - झड़ करके 

धाराएँ बहती जाती है 

देख - देख हम खुश होते है 

यहां का मौसम कितना प्यारा 

पर पहाड़ के वासिंदों को 

होती बहुत कठिनाई इससे।