यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

बुधवार, 5 मार्च 2025

प्रियतम

हे प्रियतम तुम रूठी क्यों 

है कठिन बहुत पीड़ा सहना 

इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा 

निःशब्द अश्रु धारा बनकर 

मन की पीड़ा बह निकली तब 

है शब्द कहाँ कुछ कहने को 

धीरज धरने का धैर्य कहाँ 

अपने बस में कुछ आज नहीं 

मन को कैसे बहलाऊँ मै

कैसे समझाऊं तेरे बिन 

जीवन पथ पर बढ़ जाऊँ मै

तेरा कुढ़ना तेरा चिढ़ना 

सब आज मुझे तड़पाता है 

कहता है दिल कोई बात नहीं 

तुम लौट के फिर आ जाओ ही 

हम ऐसे ही जी लेते जैसे जीते थे अब तक 

कोई गिला कोई है शिकवा 

है आज नहीं मेरा तुमसे 

वो सुबह शाम वो रात कहाँ 

सब सुना - सुना आज यहाँ

मैं भूल गया जीना तेरे बिन 

हँसना और रोना तेरे बिन।