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कठिनाई

सच कहूं ज़िन्दगी आसान नहीं होती  हर पल लड़कर तूफ़ान से  जब चेहरे पर मुस्कान आती है  वो सौ तूफानों से लड़ने की  और ताकत दे जाती है  हमने तो ज़िन्द...

गुरुवार, 26 मार्च 2026

कठिनाई

सच कहूं ज़िन्दगी आसान नहीं होती 

हर पल लड़कर तूफ़ान से 

जब चेहरे पर मुस्कान आती है 

वो सौ तूफानों से लड़ने की 

और ताकत दे जाती है 


हमने तो ज़िन्दगी को बड़े करीब से देखा है 

हर मुश्किल को लड़कर जीता है 

हर मुश्किल से एक नया सबक सीखा 

आज ऐसा लगता है कि 

अगर ये मुश्किलें न होती तो 

शायद इतनी खूबसूरत मुस्कान भी न होती 


शायद इतना दिल में प्यार भी न होता 

हर किसी से जुड़ जाऊँ एहसास भी न होता 

सबकी उलझन को पल में सुलझाऊँ 

झट से सबकी दोस्त बनजाउं 

ये सब उन मुश्किलों ने ही सिखाया है 

मुश्किल न हो तो जीने का मज़ा ही नहीं है। 

बुधवार, 25 मार्च 2026

आओ पेड़ लगाए

आओ बच्चों पेड़ लगाए 

एक जादू तुमको दिखलाये 

डालो बीज पेड़ बनेगा 

हरा - भरा यह बाग़ बनेगा 

जब तुम इसको देखोगे 

हंसी - ख़ुशी तुम गाओगे 

पेड़ को दोस्त बनाओगे 

पानी डाल ख़ुशी से इनको 

इनपर खुशियां बरसाओगे 

धरती को कटने से बचाओगे 

आओ बच्चों पेड़ लगाए। 

शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

सपने

आँखों में सपने थे 

ढेरो अरमान थे दिल में 

कुछ अलग करने की 

हमने भी ठानी थी 

सपने बड़े बड़े थे 

पर साधन बहुत सीमित थे 

मंज़िल आँखों के सामने थी 

पर रास्ता बड़ा कठिन था 

हमारे अरमानो का 

कोई सहयोगी न था 

हर ओर विरोध के ही स्वर थे 

किसी को भरोसा न था हम पर 

परिस्थितियाँ भी हमसे 

तूफ़ान की तरह टकराते थे 

ग़म का तो ऐसा था 

जैसे हमसे प्यार ही हो गया हो 

चुनातियाँ भरपूर थी 

वक्त हाथों से फिसलता जा रहा था 

पर हिम्मत अभी भी बाकी थी 

धैर्य टूट सा रहा था 

लेकिन मुझे फिर भी 

किसी करिश्मे की उम्मीद थी 

और ऐसा ही हुआ 

जब सबकुछ चारो तरफ 

टूट सा रहा था 

मेरे सपने आकार ले रहे थे 

मैं ज़िन्दगी में वापसी कर रही थी 

सबकुछ पटरी पर आ गया 

हाँ कठिनाइयाँ तो ज़रूर आयी पर 

सफलता ने हमारे कदम चूमे 

और मेरा वो सपना जो 

मैंने बचपन में देखा था 

धीरे - धीरे पूरा हो रहा है। 

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

मेरे बच्चों

मेरे बच्चों पढ़ते जाओ 

आगे -आगे बढ़ते जाओ 

विद्या का वरदान मिलेगा 

गुरु से विद्या दान मिलेगा 

कदम - कदम पर साथ मिलेगा 

गुरु का सर पर हाथ मिलेगा 

आसमान पर चढ़ते जाओ 

आगे -आगे बढ़ते जाओ 

खुशियों का संसार बसाओ 

मेरे बच्चों पढ़ते जाओ

आगे -आगे बढ़ते जाओ। 

गुरुवार, 18 सितंबर 2025

पहाड़

हमको बुलाये ए हरियाली 

ए पहाड़ के आँचल 

हमको छूकर जाये, बार-बार ये बादल 

कभी दूर तो कभी पास ए 

करते रहे ठिठोली 

भोर - सांझ ये आते जाते 

होठों पर खुशियाँ दे जाते 

दिन ढलते ही झम - झम करके 

खूब बरसते है ये बादल 

गड़ - गड़ करके झड़ - झड़ करके 

धाराएँ बहती जाती है 

देख - देख हम खुश होते है 

यहां का मौसम कितना प्यारा 

पर पहाड़ के वासिंदों को 

होती बहुत कठिनाई इससे। 

शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

बैठे - बैठे

एक दिन बैठे - बैठे यूँ ही सोचती रही 

क्या पाया क्या खोया हमने 

कुछ मिले नए कुछ बिछड़े हमसे 

कुछ शोहरत कुछ गुमनामी में 

जीवन दिया ए काट 

ना नींद पूरी हुई 

और ना ही ख्वाब 

वक्त ने हरदम कहा 

सब्र थोड़ा रख 

वक्त से हमको शिकायत 

कुछ शिकायत वक्त को भी 

धीरे - धीरे चलता रहा 

मंज़िल ज़रूर मिलेगी 

रस्ते कठिन भी है तो

खुशियां मिलेगी एक दिन 

वो दिन भी आएगा जब 

खुद के ख्यालो में ही 

खुद को याद कर के 

आ जाएगी हँसी, जीवन को याद करके। 

रविवार, 13 जुलाई 2025

पापा

पापा मेरे सपनों का वो प्रतिबिम्ब है 

जो हमारे हर सपने को पूरा करते है 

हमारी हर जिज्ञासा को पूरा करते है 

हमारे लड़खड़ाते कदम को हाथों से संभालते है 

गोद में लेकर हमें बाहर का नज़ारा दिखाते है 

हमारे हर सवाल का जवाब बड़ी मासूमियत से देते है 

अब तो पापा माँ का भी आधा फ़र्ज़ निभाते है 

लोड़ी सुना कर हमें सुलाते भी है 

मम्मी की जगह बच्चों को 

नींद में भी पापा ही याद आते है

पापा आपके ढ़ेर सारे प्यार के लिए 

आपको ढ़ेर सारा धन्यवाद।