आवश्यक सुचना (UPDATED)

मैं आपको हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि मेरी प्रथम कविता संग्रह "मेरी भावना" के नाम से Google Play Books पर और अन्य दो संग्रह &qu...

बुधवार, 9 मार्च 2022

पंख लगा दो

मुझको कोई पंख लगा दो
मैं उड़  जाऊ दूर गगन में 
घूम फिर खुशियों की झोली 
मैं भरकर सब साथ ले आऊ 

देखो चंचल हवा सलोना 
चिड़िया कलरव करती प्यारी 
दूर गगन में सूरज दादा 
मंद-मंद मुस्काते रहते 

देखो पार्क में झूलते बच्चे 
दादा-दादी घूम रहे हैं 
माताएं बैठी मुस्काती 
सपनों को  है पंख लगाती 

अलग अलग टोली में देखो 
अलग अलग चेहरों के रंग 
कोई झूम रहा खुशियों में 
कोई बैठा मौन साध कर 


 

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

साँझ ढले

जब साँझ के प्रहार में कुछ याद आ रहा था
वो याद धुंधला सा मुझको बता रहा था
था घर कोई हमारा मुझको दिखा रहा था 
अपनों कि याद जिसमे धुंधली सी हो गई थी 
तन्हा खड़ी अकेली मैं मौन हो चली थी 
किससे लडूं मैं किसको अनदेखा कर चलूँ 
कहने को सब है अपने  बेगानों की झलक में 
उलझन के बीच मेरी ख़ामोशी कह रही है 
थे तब भी तुम अकेले हो आज भी अकेले 
है फर्क सिर्फ इतना तब भीड़ में खड़े थे 
अब तन्हा हो चले हो . 

शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2021

वतन

 है तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

कर गया कोई हमें नामजद साथियों 

सांस् अटकी यहां प्रेम से साथियों 

कर हवाले तुम्हारे  वतन साथियों 

वक़्त मुश्किल कटा हाथ सबका छुटा 

हो गए अजनबी हम तो अब साथियों 

कर चले हम फिदा जानतन साथियों 

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

वतन की शान बनाए रखना 

मिटना पड़े तो मिटों साथियों 

देश झुकने न देना कभी साथियों 

देश मिटने न देना कभी साथियों 

खून से सींच कर जो आजादी मिली 

मान  उसका हमेशा करों साथियों 

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

कर चले हम फिदा जानतन साथियों.


गुरुवार, 26 अगस्त 2021

राखी

आया राखी का त्योहार
गली-गली में खुली दुकाने
सज गई सब पर रेशमी राखी 
रन-बिरंगी प्यारी-प्यारी 
मन को मोह रही है राखी

आया राखी का त्योहार
बहना बोली भैया आओ 
राखी का त्योहार मनाये
मिल-जुल कर हम ख़ुशी-ख़ुशी 
सबका मुहं मिठा करवाए 

आया राखी का त्योहार
बहने सजी-धजी बैठी हैं 
राह देखती भाई का 
थाल सजा कर रखा है
रंग-बिरंगी राखी से.     


शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

जख्म

जख्म इतने दिए जिन्दगी ने
हम गिन ना सके बंदगी में
हम झुके थे किसी की ख़ुशी में 
पर गम साथ लेके उसके हिस्से से 
ना जाने कब आगे को चल दिए 
मुड़कर कभी देखा नहीं 
जख्म गिनना सिखा नहीं 

रह लंबी है अपनी 
सफ़र मुश्किलों से भरा 
गर जख्म गिनने लगे 
वक़्त काटना मुश्किल हो जाएगा 

जख्म शोला बना जख्म शबनम बना 
जख्म के ताने-बाने से जीवन बना 
जख्म खाए है कितने 
खुद के पैरों पर चलने की खातिर

गिरते -गिरते चलना सीखा 
गिर-गिर कर फिर उठना सीखा 
फिर कुछ आगे बढ़ना सीखा 
लक्ष्य की राह पर बढ़ना सीखा 

सूख-दुःख का मोल समझना सीखा 
गम और खुशियों को जीना सीखा 
जख्म ने जीवन को समझाया 
जीवन का हर मंत्र सिखाया.