यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

साँझ ढले

जब साँझ के प्रहार में कुछ याद आ रहा था
वो याद धुंधला सा मुझको बता रहा था
था घर कोई हमारा मुझको दिखा रहा था 
अपनों कि याद जिसमे धुंधली सी हो गई थी 
तन्हा खड़ी अकेली मैं मौन हो चली थी 
किससे लडूं मैं किसको अनदेखा कर चलूँ 
कहने को सब है अपने  बेगानों की झलक में 
उलझन के बीच मेरी ख़ामोशी कह रही है 
थे तब भी तुम अकेले हो आज भी अकेले 
है फर्क सिर्फ इतना तब भीड़ में खड़े थे 
अब तन्हा हो चले हो .