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कुछ कहना

कुछ ख़ास नहीं मुझको कहना  तुम कर लो जो तुमको करना  हरदम तुमने मनमानी की  अपने मन में जो ठानी की  गुस्से से तील - तील खुद को फूका  मेरी खुशिया...

सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

कुछ कहना

कुछ ख़ास नहीं मुझको कहना 

तुम कर लो जो तुमको करना 

हरदम तुमने मनमानी की 

अपने मन में जो ठानी की 

गुस्से से तील - तील खुद को फूका 

मेरी खुशियां भी लूट - लूट 

मायूसी भर दी जीवन में 


हर बार यत्न मैंने ये कि 

कुछ और सब्र करना सीखूं 

लेकिन कबतक ये करूँ भला 

मेरा मन भी तो करता है 


थोड़ा चलकर कुछ रुकता है 

मैं खुश रहने की यत्न सदा 

करने की कोशिश करती हूँ 

तेरे जीवन में खुशियों की 

लहरे भी भरना चाहूँ मैं 

पर हरबार कदम कुछ दूर चले 

फिर चलकर हरदम रुक जाते 


खुशियों की कीमत पहचानो 

अपनों की कीमत पहचानो 

अब मैं भी थक जाती हूँ 

साहस रखना मुश्किल है अब 

बदलो अपनों की खातिर तुम 

हंसना सीखो, हंसना सीखो

तुम धैर्य धीर रखना सीखो।