एक दिन बारिश की बूंदो को टपकते हुए देखा
टपकते ही आपस में मिलते हुए देखा
न उन्हें टूट जाने का गम था
न उन्हें बादल से बिछड़ जाने का गम था
बच्चों की किलकारी और हंसी में
उन्हें भी मज़ा आ रहा था
सब ओर ख़ुशी-ख़ुशी थी
बच्चे उछल-उछल कर खुश थे
पानी उनपर बिखर-बिखर के खुश था।