यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

सच कहुँ

सच कहुँ आज मैं कुछ ख़ास लिख रही हूँ  अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ  तुम सबकी नन्ही मुस्कान से मिली ताकत  आज मैं जीने के अरमान लिख रही...

मंगलवार, 18 अगस्त 2026

सच कहुँ

सच कहुँ आज मैं कुछ ख़ास लिख रही हूँ 

अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ 

तुम सबकी नन्ही मुस्कान से मिली ताकत 

आज मैं जीने के अरमान लिख रही हूँ 

तुम सब यूँही मेरे आस-पास रहो 

अपने साथ बीते हुए लम्हों के एहसास लिख रही हूँ 

तुम संग-संग रोऊँ-हंसू उछल-कूद मैं करूँ 

गम भूल सारे जाऊँ संग-संग तुम्हे हंसाऊँ 

हर अदा पे तुम्हारे मैं वारी-वारी जाऊं 

सच कहुँ आज मैं कुछ खास लिख रही हूँ 

अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ 

हर रोज़ बनती तुमसे पहचान लिख रही हूँ। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें