सच कहुँ आज मैं कुछ ख़ास लिख रही हूँ
अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ
तुम सबकी नन्ही मुस्कान से मिली ताकत
आज मैं जीने के अरमान लिख रही हूँ
तुम सब यूँही मेरे आस-पास रहो
अपने साथ बीते हुए लम्हों के एहसास लिख रही हूँ
तुम संग-संग रोऊँ-हंसू उछल-कूद मैं करूँ
गम भूल सारे जाऊँ संग-संग तुम्हे हंसाऊँ
हर अदा पे तुम्हारे मैं वारी-वारी जाऊं
सच कहुँ आज मैं कुछ खास लिख रही हूँ
अपने सीने में उपजे जज़्बात लिख रही हूँ
हर रोज़ बनती तुमसे पहचान लिख रही हूँ।
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