एक दिन बारिश की बूंदो को टपकते हुए देखा
टपकते ही आपस में मिलते हुए देखा
न उन्हें टूट जाने का गम था
न उन्हें बादल से बिछड़ जाने का गम था
बच्चों की किलकारी और हंसी में
उन्हें भी मज़ा आ रहा था
सब ओर ख़ुशी-ख़ुशी थी
बच्चे उछल-उछल कर खुश थे
पानी उनपर बिखर-बिखर के खुश था।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 20 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
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