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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

सोमवार, 17 अगस्त 2026

बारिश की बूंदे

एक दिन बारिश की बूंदो को टपकते हुए देखा 

टपकते ही आपस में मिलते हुए देखा 

न उन्हें टूट जाने का गम था 

न उन्हें बादल से बिछड़ जाने का गम था 

बच्चों की किलकारी और हंसी में 

उन्हें भी मज़ा आ रहा था 

सब ओर ख़ुशी-ख़ुशी थी 

बच्चे उछल-उछल कर खुश थे 

पानी उनपर बिखर-बिखर के खुश था। 

3 टिप्‍पणियां:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  गुरुवार 20 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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