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स्वयं

कठिन वक्त है  कठिन घड़ी है  कठिन राह पर चलकर हमको  मंज़िल अपनी पानी है  अपनी अदा जो उत्तम हो  वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो  कुछ उ...

रविवार, 26 जुलाई 2026

स्वयं

कठिन वक्त है 

कठिन घड़ी है 

कठिन राह पर चलकर हमको 

मंज़िल अपनी पानी है 

अपनी अदा जो उत्तम हो 

वह करके दिखलाना है

कुछ लोगो से सिख सके तो 

कुछ उनको सिखलायेंगे 

अपने हृदय की कोमलता से 

सबको परिचित करवाना है 

कुछ कमियां हो अपने अंदर 

फ़ौरन दूर उसे करना है 

जीवन हर पल कुछ सिखलाता 

हर पल कुछ है देकर जाता 

कदम - कदम पर धुप - छाँव है 

ग़म और खुशियों का संगम है 

बच्चो के संग बच्चा बनकर 

जब उनके संग तुतलाते है 

कुछ उनकी सुनकर हँसते 

कुछ अपनी उनको समझाते 

ऐसा लगता मानो उस क्षण 

मैं भी बच्ची बन जाती हूँ 

अपना बचपन भूल चुकी जो 

आज उसे फिर जी लेती हूँ।