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रविवार, 11 अगस्त 2024

मातृ भूमी

भारत माँ पे कुर्बान हुए 

माँ की मान बढाने को 

माँ की शान बचाने को 

लाखों सपूत कुर्बान हुए 

आज़ाद देश कहलाने को 

हर घर ने कुर्बानी दी 

हर घर संग्राम का हिस्सा था 


ए देश नहीं माँ मेरी है 

माँ की ख़ातिर हम आज यहाँ 

माँ की रक्षा है फ़र्ज़ मेरा 

माँ का है मुझपे क़र्ज़ बड़ा 


माँ की ख़ातिर मिट जायेंगे 

माँ का आँचल है स्वर्ग मेरा 

माँ का सर झुकने से पहले 

अपने सर का बलिदान करे 


हे वीर तुम्हारी विरह कथा 

अपने शब्दों में कह पाए 

यह सौभाग्य हमारा है 

कि यह तुक्ष कलम 

कुछ लिख पाए 

है नमन सदा उन वीरों को 

जिसने क़ुरबानी देश पे दी 

जिसने भारत की रक्षा की। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. ''...
    यह सौभाग्य हमारा है
    कि यह तुक्ष कलम
    कुछ लिख पाए
    ...''

    वाह! निश्चित ही एक कवि/लेखक यही सौभाग्य चाहेगा। जय हिन्द।

    जवाब देंहटाएं