मैं अलबेली एक अकेली
ध्रुवतारा सा चमचम करती
शाम झुण्ड में सुबह अकेली
हरदम सबको राह दिखाती
ध्रुवतारा है नाम हमारा
समय - समय पर मैं दुनिया का
समय बोध का ज्ञान कराती
रात सुलाना सुबह जगाना
रहा निरंतर काम हमारा
कभी कोई भी देर न होता
ना मैं ची-ची चूं-चूं करती
पर अब देखो घर-घर में
घड़ियों का है बोल-बाला
फिर भी है सब देर-सवेर
भागम-भागी गुत्थम-गुत्था
दिनचर्या सबकी है लेट।
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