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पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

रविवार, 19 अप्रैल 2026

ध्रुवतारा

मैं अलबेली एक अकेली 

ध्रुवतारा सा चमचम करती 

शाम झुण्ड में सुबह अकेली 

हरदम सबको राह दिखाती 

ध्रुवतारा है नाम हमारा 

समय - समय पर मैं दुनिया का 

समय बोध का ज्ञान कराती 

रात सुलाना सुबह जगाना 

रहा निरंतर काम हमारा 

कभी कोई भी देर न होता 

ना मैं ची-ची चूं-चूं करती 

पर अब देखो घर-घर में 

घड़ियों का है बोल-बाला 

फिर भी है सब देर-सवेर 

भागम-भागी गुत्थम-गुत्था 

दिनचर्या सबकी है लेट। 

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