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रविवार, 19 अप्रैल 2026

ध्रुवतारा

मैं अलबेली एक अकेली 

ध्रुवतारा सा चमचम करती 

शाम झुण्ड में सुबह अकेली 

हरदम सबको राह दिखाती 

ध्रुवतारा है नाम हमारा 

समय - समय पर मैं दुनिया का 

समय बोध का ज्ञान कराती 

रात सुलाना सुबह जगाना 

रहा निरंतर काम हमारा 

कभी कोई भी देर न होता 

ना मैं ची-ची चूं-चूं करती 

पर अब देखो घर-घर में 

घड़ियों का है बोल-बाला 

फिर भी है सब देर-सवेर 

भागम-भागी गुत्थम-गुत्था 

दिनचर्या सबकी है लेट। 

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