यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्रियतम

हे प्रियतम तुम रूठी क्यों  है कठिन बहुत पीड़ा सहना  इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा  निःशब्द अश्रु धारा बनकर  मन की पीड़ा बह निकली तब  है शब्द कहाँ कु...

मंगलवार, 1 दिसंबर 2020

गरीबी

गरीबी एक ऐसी बिडंबना है
जो इंसान को न जीने देती है 
और न मरने देती है 
गरीबी की अंधकार में बचपन को खो दिया 
जवानी में भी जंग लगने लगी 
बुढ़ापा भी कोई का कम कस्टदायी न होगी

गरीबी एक ऐसी बिडंबना है 
जो इंसान को न जीने देती है 
गरीबी की बोझ को हमें उतार फेंकना है 
एक नया मुकाम गढ़ना है 
अपने सुने जीवन में 
नए - नए रंग भरने हैं 

गरीबी एक ऐसी बिडंबना है 
जो इंसान को न जीने देती है 
हरसुबह नए अरमानों के संग 
शाम जब ढले तो 
खुशियां हो अपने संग 
हर सपने को हकीकत में बदलेंगे हम 

गरीबी एक ऐसी बिडंबना है 
जो इंसान को न जीने देती है 
गरीबी पन्नों में ही रह जाए 
तभी रुकेंगे हम 
हौसला पाया है बुलंदियां छूने की 
अँधेरी रात को भी रौशनी से भर देंगे हम।  



2 टिप्‍पणियां: