मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
यूँ ही प्यार जताना बच्चो मेरे संग आ जाना बच्चो हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों घूम फिरकर हंसी - ठिठोली मुझसे तुम कर जाना बच्चो नन्हे-नन्हे ...
आदमी है आदमी से आज परेशान
हर आदमी अंदर से है डरा-डरा
कब कौन ऐसा मिल जाये
जो ठग के ले जाये सब कुछ
हर बात पर है धरना का ख़ौफ़
राह रोककर खड़े हो गए
सबकुछ अस्त-व्यस्त कर डाला
ज़िन्दगी को संवार सकते नहीं
बिगाड़ने पर आतुर हर दम रहते है।
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