मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
कठिन वक्त है कठिन घड़ी है कठिन राह पर चलकर हमको मंज़िल अपनी पानी है अपनी अदा जो उत्तम हो वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो कुछ उ...
आदमी है आदमी से आज परेशान
हर आदमी अंदर से है डरा-डरा
कब कौन ऐसा मिल जाये
जो ठग के ले जाये सब कुछ
हर बात पर है धरना का ख़ौफ़
राह रोककर खड़े हो गए
सबकुछ अस्त-व्यस्त कर डाला
ज़िन्दगी को संवार सकते नहीं
बिगाड़ने पर आतुर हर दम रहते है।
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