मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
मैं हमेशा एक पहेली थी अब भी हूँ आगे भी रहूंगी मुश्किल है समझ पाना मुझे जो भी मिला उसके साथ हो लिए जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी ज...
गणतंत्र दिवस है आया
हम सबकी खुशियां लाया
वीरों पे फक्र हो आया
वीरों ने देश बचाया
अपनी क़ुरबानी देकर
और हर ओर विजय लहराया
संविधान हमारा बनकर के
इस दिन को हमें मिला था
इस पावन दिन को तब से
हर वर्ष मनाते है हम
इस पावन पर्व पर खुशियाँ।
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