मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
तील-तील जलकर जीना सीखा अपनों से कुछ कहना सीखा हँसना सीखा, रोना सीखा हर गम को अब पीना सीखा धूप - छाँव को सहना सीखा नरम - गरम और ऊंच - नी...
गणतंत्र दिवस है आया
हम सबकी खुशियां लाया
वीरों पे फक्र हो आया
वीरों ने देश बचाया
अपनी क़ुरबानी देकर
और हर ओर विजय लहराया
संविधान हमारा बनकर के
इस दिन को हमें मिला था
इस पावन दिन को तब से
हर वर्ष मनाते है हम
इस पावन पर्व पर खुशियाँ।
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