मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
तील-तील जलकर जीना सीखा अपनों से कुछ कहना सीखा हँसना सीखा, रोना सीखा हर गम को अब पीना सीखा धूप - छाँव को सहना सीखा नरम - गरम और ऊंच - नी...
देखो बसंत आया है
सबके मन को भाया है
चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले है
मौसम भी सुहाना है
मन मुस्कुरा रहा है
तन झूमने को करता
रंग-बिरंगे गुलाल लेकर
बच्चे इधर-उधर है डोले
कभी किसी के सर पर डाले
तो कभी किसी को बाँहों में भर ले
आया बसंत आया
सबके मन को भाया।
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