मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
कठिन वक्त है कठिन घड़ी है कठिन राह पर चलकर हमको मंज़िल अपनी पानी है अपनी अदा जो उत्तम हो वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो कुछ उ...
देखो बसंत आया है
सबके मन को भाया है
चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले है
मौसम भी सुहाना है
मन मुस्कुरा रहा है
तन झूमने को करता
रंग-बिरंगे गुलाल लेकर
बच्चे इधर-उधर है डोले
कभी किसी के सर पर डाले
तो कभी किसी को बाँहों में भर ले
आया बसंत आया
सबके मन को भाया।
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