मैं हमेशा एक पहेली थी
अब भी हूँ आगे भी रहूंगी
मुश्किल है समझ पाना मुझे
जो भी मिला उसके साथ हो लिए
जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी
जिसने अपना बनाया
उसके पल में हो लिये
पर जिसने भी नज़रअंदाज़ किया
झट मुँह फेर के मुस्कुरा के चल दिए
ऐसा न था कि हमें दर्द न था
उनके खोने का
पर उससे ज़्यादा कही
फ़क्र था अपने आप पर
जो समझ में आया नहीं
उस पर वक्त क्यों बर्बाद करे
जिसको कदर है नहीं प्यार की
उनके लिए हम अपने आँसूं
क्यों ही जाया करे।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 27 एप्रिल, 2026
जवाब देंहटाएंको लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 26 एप्रिल, 2026
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सुंदर अभिव्यक्ति
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