Thursday, June 7, 2018

श्रृंगार प्रकृति का

जतन जतन से
रमन चमन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

नयन नयन से
नयन सपन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

फूल पवन से
वर्षा के जल से
बादल के गर्जन-तर्जन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

सूरज चंदा के आना से
दिन और रात के विरह मिलन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का.

Sunday, April 8, 2018

वरदान

अपनी संतान को एक वरदान दे
माँ हमें ज्ञान दो, दिल में तूफ़ान दो
भक्ति-सेवा का मुझमें संचार हो
करुणा-दया दिल की आवाज़ हो
अपने मन में हो सम्मान सबके लिए

अपनी संतान को एक वरदान दे
माँ हमें ज्ञान दो, प्रेम का मान दो
सेवा भाव का हम्मे अरमान हो
जो मेरी जान हो सबकी पहचान हो
सच्ची सेवा का ही अपना अरमान हो

अपनी संतान को एक वरदान दो
मा हमें ज्ञान दो सत्य का मान दो
अहंकार सब मिटा दो माँ
वरदान दो प्रेम का ज्ञान दो
माँ हमें ज्ञान दो, माँ हमें ज्ञान दो

अपनी संतान को एक वरदान दो
माँ हमें ज्ञान दो, माँ हमें ज्ञान दो
कण-कण में सुख का संचार दो
हर घर में शांति का वरदान दो
जीवों के मम में दया भाव दो
माँ हमें ज्ञान दो एक वरदान दो.

Saturday, March 24, 2018

मौसम

हर ओर ख़ुशी है छाई
मौसम ने ली अंगड़ाई
पतझड़ के बाद वसंत है आई
सूखे पत्ते झड-झड कर
चारों ओर है फैले
शीतल हवा के झोकों से
उड़ते ये सूखे पत्ते
हर कानों में मधुर ध्वनि
माहौल में ख़ुशियाँ फैलाते
मन उमंग से भर तब जाता
हम गीत फाग के गाते
फसल हमारे घर तक आते
नए-नए पकवान बनाते
मौसम तेरा क्या जादू है
कभी ख़ुशी तो कभी ग़मों का
सागर लेकर आते
घर-घर में खुशियाँ फैला कर
फिर तुम घर को जाते
नई उमंगें नया सवेरा
हमको देकर जाते
मेरे सूने जीवन में तुम
नए रंग भर जाते
फूलों की मुस्कान सदा ही
अपने दिल को भाति
रंग-बिरंगे फुल खिले है
प्रकृति का श्रृंगार सुहाना
अपने मन को भाया
जीवन में भी रंग हो ऐसे
हर मन में खुशियाँ हो इतनी
जितनी वसंत में रौनक.

Tuesday, March 20, 2018

वक्त नहीं

आँखों में नींद है मेरी
पर सोने का वक्त नहीं
दिल है गमो से भरा
पर रोने का वक्त नहीं

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े
कि थकने का भी वक्त नहीं
पराए एहसानों की क्या क़द्र करे
जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नहीं

तू ही बता ए ज़िन्दगी
इस ज़िन्दगी का क्या होगा
कि हर पल मरने वालों को
जीने के लिए भी वक्त नहीं.

Saturday, March 10, 2018

सांझ ढले

तुम पावन दिल तेरा निर्मल
गंगा की धारा सी कल-कल
चंचल निर्मल हवा बसंती
जीवन क्षण-क्षण परिवर्तित
रात गई फिर बात गई
पर अपने जज़्बात गए

शाम ढले जब आम तले
अपनों के जज़्बात मिले
कुछ ख़ास कहे कुछ आम कहे
कुछ खट्टी-मीठी याद बनी
वर्षों के यूँ विरह-मिलन के
रंग में हम सब डूब के यूँ सरोबार हुए
चाहत अपनी लबो पे लेकर
हम सबने कुछ ख़ास किए

खट्टी-मीठी यादों में जब
हमने सबको याद किए
सहज-शांत से जीवन में
पलती चिंगारी का एहसास किया
उस आम तले हम आज मिले
इन आमों के मंजर ने
वर्षों तक मेरे राह तके
हमने भी उनको याद किया
साँसे अनजान सी आहट पर
हर बार उचक कर मुड़ता था

पर राहें सुनी मिलती थी
आँखों में आंसूं भरकर के
चुपचाप रहे
हम शांत रहे
पर आम तले जब आज मिले
सारे गिले शिकवे भूले
हम आज मिले जब आम तले.

Monday, March 5, 2018

तुम बिन

तुम बिन हर चीज़ आधी है
हर ख़ुशी अधूरी सी
हर लम्हा उदास है
हर बात आधी सी

तुम बिन फूल भी काँटे नज़र आते है
अपने भी बेगाने सा सुलूक करते है
हर किसी की नज़रे घूरती है
जैसे हमने कोई बड़ा अपराध कर दिया है
सच्चाई भी बेबसी का चादर ओढ़ लेती है
अपनी साँसे भी खुद को डराने लगती है

तुम हो तो ज़िन्दगी रूहानी है
तुम हो तो मौसम सुहाना
तुम हो तो हर घड़ी हर दिन
वसंत का मौसम है

तुम हो तो लम्हा-लम्हा
जीवन खुशनुमा बन जाता है
तुम हो तो जीवन में रंग सारे है
तुमसे हँसी तुमसे ख़ुशी
तुम से ही ज़िन्दगी के धुप-छाँव सारे है.

Sunday, March 4, 2018

एहसास

प्यार के एहसास से
मेरा दिल झूम उठा
जब मैंने अपने लिए
किसी को मुस्कुराते हुए देखा
अपने चेहरे के भावों को
मेरे से पहले पढ़ते हुए देखा

मैं सुनती थी
लोग एक दुसरे से
प्यार करते है
प्यार में जीते है
प्यार के लिए मरते है
प्यार अनमोल होता है
जिसने अपने प्यार को पा लिया
उसने जग पा लिया

पर मेरे लिए तो ये सब
एक कोरी कल्पना थी
किस्से और कहानियों में
सुनना बड़ा प्यारा लगता है
पर जीवन की कडवी सच्चाई के आगे 
प्यार की परिकल्पना भी 
जीवन की सबसे बड़ी जंग 
जीतने के बराबर है 

पर ये कल्पना वाकई में सच है 
प्यार तो हर रिश्ते में अनमोल है 
बस इसको दिल से महसूस करने की देर है.

Saturday, March 3, 2018

प्रेमराही

मेरी चाहत परवान चढ़े
मैं ऐसा कृत्य करूँ कैसे
फूलों सी माला बनकर के
मैं तेरे गले का हार बनूँ
तेरे सौंदर्य की आभा को
मैं कांति और प्रदान करूँ
जीवन अनमोल खज़ाना है
इसको तुम पर ही लुटाना है
तेरी पलकें थी नयन मेरे
जो देख सुकूं से भारती थी
जीवन तेरा
मैं उसकी हर साँस बनूँ
तू चाहत हैं
मैं प्यास बनूँ
तू है दरिया
मैं उसका एक किनारा हूँ
पानी की बहती धारा है तू
मैं प्यासा भृंग जनम भर का
तुम प्रेम की मृगमरीचिका
मैं रेतो का बना श्रृंखला
जून माह की दोपहरी में
मैं सूरज का ढाल बना
तुम बरसाती बादल बनकर
मेरा तेज मिटा डाला
तेरी साँसों में खुशबू बनकर
खुद को अमरत्व प्रदान किया
बनकर दोनों प्रेम के राही
कई को प्रेम सिखा डाला
जीवन को एक नई दिशा
अपनों को खुशियाँ बांटा है
प्रेम है पूजा, प्रेम है दर्पण
प्रेम ही जीवन सार
प्रेम बिना सब खाली-खाली
हम है राही तुम हो राही
प्रेम बाँटकर, प्रेम है पाना
प्रेम की भाषा सबको सिखाना
अपना जीवन मंत्र बनाना.

Thursday, March 1, 2018

मेरे साथियों

काँप उठे दश दिशाएँ एक ही हुंकार से
चल पडों तो कोई अड़चन राह में आए नहीं
मंजिलों को दोस्त अपना तुम बनालो साथियों
डट पडों मैदान में, रण छोड़ बैरी भाग ले
मिट्टी में डालो दाने तो, सोना उगा दो साथियों
तोड़कर इस जाति भाषा धर्म की जंजीर को
मानवता को धर्म अपना तुम बना लो साथियों
ये जमीं है कर्म भूमि
जीवन तपोवन साथियों
हर दिशा हर राह में
खुशियाँ बिछा दो साथियों
सब रहे मिलजुल कर ऐसा
रुख बना दो साथियों
ये धरती हैं वीरों की
उनको जगा दो साथियों
ये नहीं किस्सा हमारा
है हक़ीकत साथियों
फिर से अपनी इस जमीं पर
अपने निर्मल प्रेम की
गंगा बहा दो साथियों
हर फिज़ा में खुशबू अपने देश की
फैला दो मेरे साथियों...

Saturday, January 20, 2018

जीवन रण

जीवन के रण में काँटे थे
हर ओर निराशा पसरी थी
गमगीन निगाहे घूर रही
सबके अधिकार का रोना है
हो गई मित्रता उलझन से
कुछ मिला न हमको किस्मत से
हर रोज़ नई उलझन
हर कदम चुनौती भरा मिला
सौ बार गिरे, सौ बार उठे
हर बार कदम कुछ और चले
कुछ खास मिले, कुछ बिछड़ गए
कुछ ने तो पत्थर भी मारे
पीकर अपमान के घूँट सभी
जीवन पथ पर कुछ और चले
क्या कोई अंत मिलेगा इसका
जीवन के रण में शांत खड़े
यह सोच-सोच हम ठिठक गए
कोई तो छोड़ मिलेगा
कोई तो मोड़ मिलेगा
है कैसा कसूर ये मेरा
कि तुमने भी मेरी ही खातिर
सारे उलझन समेट है रखे
मैं कैसे वहन करूँ इन सबको
कैसे सहन करूँ मैं
जीवन के दुर्गम पथ पर
कैसे निर्वहन करूँ मैं
मेरी जीवन की खातिर भी तो
तुमने कुछ सोचा होगा
काटों के चुभने से जो जख्म लगे है
उन ज़ख्मो की खातिर
कोई तो मरहम होगा
हर बार हारना ही क्या
जीवन का लक्ष्य है मेरा
मेरी मेहनत का मुझको
कुछ तो परिणाम मिलेगा
है कितने किस्से तेरे
जीवन को स्वर्ग बनाने की
पर मेरी विनती से तुमको
कोई फर्क न पड़ता
कहते है
भगवान् हमारे साथ सदा ही होते
पर मेरी विनती भी उनको
कभी न पिघला पाई
मैं जीवन के रण में उनको
हर दम ढूंढा करती
पर मेरी कोशिश में  मुझको
खानी मूंह की होती
फिर भी जीवन के रण में
है आगे बढ़ते रहना
हर मुश्किल के बाद
कदम दर कदम हमें हैं बढ़ना.

Thursday, January 18, 2018

समय

समय की कीमत को
जिसने पहचान लिया
ज़िन्दगी के मर्म को उसने बस जान लिया
हर सुबह एक नया सवेरा लेकर आता है
हर चांदनी रात हमारे लिए कुछ सवाल छोड़ जाती है
जीवन पथ पर सिर्फ चलना ही काफी नहीं
समय के मर्म को गहराई से समझना होगा
समय हँसाता भी है
समय रुलाता भी है
हर किसी की ज़िन्दगी
समय के रथ पर ही सवार है
किसी की नैया बेड़ा पार है तो
किसी की मझदार में ही फंसी है
हर किसी को समय की मार खानी ही पड़ती हैं
कोई उस चक्र को मौन में गुजार देता है
तो किसी की चीख़ पूरी दुनिया सुनती है
फर्क है तो सिर्फ हमारी सोच का
समय का काम है चलना
ये हम पर निर्भर करता है कि
हम उसके साथ चले या
फिर वापस लौट चले.

Sunday, January 14, 2018

वो

वो न जाने कब बन गई थी
मेरी ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा
साँसों में फूलों की महक बनकर बस गई थी
रातों को सपनो में
दिल को सूरज की गर्मी में
उसका हर रूप अपने आप में अनोखा है
अपने सपने को चंद लम्हों में हमने समेटा है

फूलों सी कोमलता, शहद सी मिठास
भौड़ों सी व्याकुलता
मिट्टी सी खुसबू
हवा जैसी चंचलता
इत्र के जैसी सुगंध
हौसला पहाड़ों सा लेकर
रात्रि की तरह गहन अंधकार में भी
जीवन की राह ढूंढने ने की हिम्मत
चेहरे पे पूर्णमासी के चाँद सी फैली मुस्कुराहट

उसके एहसास ने मुझमें
हर पल असीमित उर्जा का संचार कर दिया है
मुझ जैसे साधारण प्राणी को
एक मुकम्मल इंसान बना दिया.

Friday, January 12, 2018

जीवन साथी

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
हर जीत तुम्हारे हाथों में
हर हार तुम्हारे हाथों में

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
तुम ही अब मेरी किस्मत हो
तुमसे जीवन की रौनक है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
परिवार तुम्हारा या मेरा
अब सब कुछ तेरा है अपना
इन अनजानों की बस्ती को
अपनत्व का पाठ पढ़ा देना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
रिश्तों की लाज सदा रखना
हर रिश्ता जीवन ज्योति है
जीवन सुख-दुःख का मोती है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन के मुश्किल से डरना
या उससे लड़कर
जीवन के पथ पर आगे बढ़ना
है दायित्व तुम्हारा सब अपना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
करबद्ध निवेदन करता हूँ
कितनी भी मुश्किल आ जाए
सब लोग विरोधी हो जाए
पर अपना कर्तव्य निभाना
भूल न तुम साथी जाना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन तो दर्पण है मेरा
उस दर्पण को पढना सीखो
मुश्किल तो आता-जाता है
पर रिश्ता सदा निभाना है.

Monday, January 8, 2018

नन्ही परी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मन द्वंद्व में फंसता गया
उलझन बड़ी मुश्किल हुई
मैं सोचती जितना रही
उतना उलझता मन गया

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मैं भूलकर उस दृश्य को
हंसने की कोशिश खूब की
पर मन में उलझन अब भी थी
वो दृश्य जैसे मन के दर्पण में
हमें झकझोरती सी कह रही

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मेरी कथा, मेरी व्यथा
तुम सुन सको तो
सुन ज़रा
शुरुआत मेरी भव्यता से पूर्ण है
पर दिल में मेरे दर्द की चुभन है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
डोली मेरी फूलों से सज के आई थी
पर ज़िन्दगी काटों का फैला रण हैं
सबका अपना-अपना आकलन है
पर मेरी चाहत का किसको गम है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
बराबरी का हक़ मुझ भी चाहिए
मैं ममता की मूरत हूँ
पर पत्थर कब तक खाऊँगी
इन पत्थर के चोटों को मैं
लौटाकर ही जाउंगी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मानवता के रखवालों से
अर्ज हमारी इतनी है
ममता के इस मूरत से
ममता का अधिकार न छीने
जीवन की अनमोल क्षणों को
कीमत से छोटा मत करना

रिश्ते जुड़कर बने अनोखे
तोल-मोल से दूर रहे वो
दो परिवारों को जोरुंगी
हर रिश्ता अपना कर के मैं
एक नया आयाम लिखूंगी.

Sunday, December 31, 2017

प्रीत

प्रीत में सब कुछ भुला कर
आप को दिल में बसा लूँ
स्वप्न के मंदिर में अपने 
देवता उनको बना लूँ 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
गीत गा कर के सुना दूँ 
धुन नए अपने बना लूँ 
ज़िन्दगी के फूल को 
राह में उनके सजा दूँ 
प्रीत में उनको समर्पित 
हर ख़ुशी हर गम समर्पित 
हर घड़ी हर क्षण समर्पित 
स्नेह के कण-कण समर्पित 

प्रीत है एक शब्द छोटा 
पर हैं इसका अर्थ विशाल 
न ही इसकी कोई सीमा 
बन्धनों से मुक्त हैं ये 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
नीत नए रिश्ते बना कर 
ज़िन्दगी के राह में
नीत नया सन्देश लेकर
सब को हम बताएँगे.