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पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

रविवार, 12 अप्रैल 2026

मेरे आँगन में

रोज़ सवेरे मेरे आँगन 

चिंटू - मिंटू, चिंकी - मिन्की 

ढेरो बच्चे आते है 


उछल - कूद कर हमें हँसाते 

प्यार से मेरी गोदी में आते 

अपनी मीठी तुलतुलाती सी 

नए - नए शब्दों से मुझको  

अपनी बात बताते है 


थोड़ा रोना, थोड़ा हंसना 

पूरी मस्ती करते है 

हँसी ख़ुशी जब घर वो जाते 

बाय - बाए जब करते है 

उनके चेहरे की खुशियों से 

अपना दिन बन जाता है 


सोच - सोच मैं इनकी बाते 

इतनी खुश हो जाती हूँ 

अपनी मुश्किल भूल हमेशा 

इनके संग हो लेती हूँ 


इनके बचपन के संग - संग में 

अपना बचपन जी लेती हूँ 

मेरे आँगन हर दिन आये 

ऐसे ही बचपन का झोंका 

जिनमे झूम के मैं गाऊँ 

हर दिन खुशियों से भर जाऊँ । 

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