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स्वयं
कठिन वक्त है कठिन घड़ी है कठिन राह पर चलकर हमको मंज़िल अपनी पानी है अपनी अदा जो उत्तम हो वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो कुछ उ...
शुक्रवार, 26 जून 2026
खो गयी बिटिया
बुधवार, 24 जून 2026
हिंदी
ये हिंदी ये हिंदी
है भारत माँ की बिंदी
ये हिंदी ये हिंदी
अपनी खुशियों की कुंजी
ये हिंदी ये हिंदी
हर दिल में बस्ती हिंदी
है प्यार की भाषा हिंदी
जज़्बात सिखाती हिंदी
है राह दिखाती हिंदी
हमको है भाती हिंदी
अपनी मर्यादा हिंदी
है जान से प्यारी हिंदी
ये भारत माँ की बिंदी।
सोमवार, 22 जून 2026
सच्चाई
सच्ची बात बताता हूँ
आज तुम्हे समझाता हूँ
हर पल खुशियों को चाहो
गम को पास न आने दो
जीत हमेशा पाओगे
भय को जीत जो जाओगे
गर्व सदा खुद पर रखना
हर मुश्किल से डटकर लड़ना
अपनी राह बनाना खुद ही
कभी किसी की राह न रोको
अपनी राह में ताकत झोंको
जीत मिलेगी ख़ुशी मिलेगी
शान्ति और सुकून भी होगा
काटम - काटी ताका - झांकी
सब सस्ते हथकंडे है
मंज़िल कभी न बनती इनसे
मन में हरदम धुक - धुक रहती
परछाई से भी डर लगता।
रविवार, 21 जून 2026
ज़िन्दगी
जबतक रहेगी ए ज़िंदगी
शिकायतों का दौर भी रहेगा
किसी से प्यार तो किसी की नाराज़गी भी मिलेगी
कोई आएगा करीब
तो कोई मुँह फुला कर दूर चला जाएगा
किसी से संबंध बनेंगे अंतर्मन से
तो कुछ संबंध बिगड़ेंगे भी
किसी से प्यार का सैलाब मिलेगा
तो कुछ पीठ पीछे शिकायत भी करेंगे
कही अपनों से दूराव मिलेगा
तो कभी गैरों से भी अपनों सा प्यार मिलेगा
यूँही कर्मपथ पर चलते रहेंगे
अपने भावों को शुद्धता से भरते रहेंगे
कुछ खट्टे तो कुछ मीठे अनुभवों से
अपनी ऊर्जा यूँ ही संजोते रहेंगे।
गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
पहेली
मैं हमेशा एक पहेली थी
अब भी हूँ आगे भी रहूंगी
मुश्किल है समझ पाना मुझे
जो भी मिला उसके साथ हो लिए
जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी
जिसने अपना बनाया
उसके पल में हो लिये
पर जिसने भी नज़रअंदाज़ किया
झट मुँह फेर के मुस्कुरा के चल दिए
ऐसा न था कि हमें दर्द न था
उनके खोने का
पर उससे ज़्यादा कही
फ़क्र था अपने आप पर
जो समझ में आया नहीं
उस पर वक्त क्यों बर्बाद करे
जिसको कदर है नहीं प्यार की
उनके लिए हम अपने आँसूं
क्यों ही जाया करे।
रविवार, 19 अप्रैल 2026
ध्रुवतारा
मैं अलबेली एक अकेली
ध्रुवतारा सा चमचम करती
शाम झुण्ड में सुबह अकेली
हरदम सबको राह दिखाती
ध्रुवतारा है नाम हमारा
समय - समय पर मैं दुनिया का
समय बोध का ज्ञान कराती
रात सुलाना सुबह जगाना
रहा निरंतर काम हमारा
कभी कोई भी देर न होता
ना मैं ची-ची चूं-चूं करती
पर अब देखो घर-घर में
घड़ियों का है बोल-बाला
फिर भी है सब देर-सवेर
भागम-भागी गुत्थम-गुत्था
दिनचर्या सबकी है लेट।
रविवार, 12 अप्रैल 2026
मेरे आँगन में
रोज़ सवेरे मेरे आँगन
चिंटू - मिंटू, चिंकी - मिन्की
ढेरो बच्चे आते है
उछल - कूद कर हमें हँसाते
प्यार से मेरी गोदी में आते
अपनी मीठी तुलतुलाती सी
नए - नए शब्दों से मुझको
अपनी बात बताते है
थोड़ा रोना, थोड़ा हंसना
पूरी मस्ती करते है
हँसी ख़ुशी जब घर वो जाते
बाय - बाए जब करते है
उनके चेहरे की खुशियों से
अपना दिन बन जाता है
सोच - सोच मैं इनकी बाते
इतनी खुश हो जाती हूँ
अपनी मुश्किल भूल हमेशा
इनके संग हो लेती हूँ
इनके बचपन के संग - संग में
अपना बचपन जी लेती हूँ
मेरे आँगन हर दिन आये
ऐसे ही बचपन का झोंका
जिनमे झूम के मैं गाऊँ
हर दिन खुशियों से भर जाऊँ ।