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पहेली

मैं हमेशा एक पहेली थी  अब भी हूँ आगे भी रहूंगी  मुश्किल है समझ पाना मुझे  जो भी मिला उसके साथ हो लिए  जो छूट गया पीछे उस पर रोये नहीं कभी  ज...

मंगलवार, 9 जनवरी 2024

मेरे गम

ऐ जो गम है मेरे हमसफ़र है मेरे 

खुशियाँ छूट जाये पर ऐ छूटे भूल से ना 

जिनसे थी उम्मीद मुझे 

उनसे ही सबसे ना उम्मीद हो गए 

मेरे गम ने जो मुझे आईना दिखाया 

हम खुद से ही बेनकाब हो गए 

सच साबित न कर सके हम कभी 

झूठ के आगे ही बेज़ुबान जितना मुझे 

आज अपनी आँसुओं से दूर उतने हो गए। 

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