आज के इस ज़माने में
हर आदमी का
अपना एक मकान होना चाहिए
मुक़ाम मिले ना मिले
मकान मिलना चाहिए
ज़िन्दगी दर बदर की ठोकरों से
गुलज़ार है
दिन में ख़ामोशी तो
रात में आँसुओ की दूकान है
हर इंसान के दिल में
चल रहा आज तूफ़ान है
अकेली ज़िन्दगी कटती नहीं
दिल के कोने में बस्ता एक शमशान है
मकान से ही इंसान की पहचान है
वर्ना तो हर आदमी यहाँ
एक किरायदार है।