आओ चले
मिलकर हम सब
चलो हँसने की
हम वजह ढूंढते है
अपनी - अपनी सी लगे
वो जगह ढूंढते है
जहाँ सबकुछ हो हमारा
वो सतह ढूंढते है
जो खुल जाये हमसे
वो गिरह ढूंढते है
ज़िन्दगी में नई
एक सुबह ढूंढते है
प्यार से हो बनी
गर्मजोशी हो जिसमे
अपनों का ऐसा
शहर ढूंढते हो
जहाँ न हो कोई भेदभाव
छल - कपट से दूर चलो
हम मिलकर अमन ढूंढते है।