मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
यूँ ही प्यार जताना बच्चो मेरे संग आ जाना बच्चो हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों घूम फिरकर हंसी - ठिठोली मुझसे तुम कर जाना बच्चो नन्हे-नन्हे ...
कड़ाके की ठंड थी
आसमान धुआँ-धुआँ सा था
दिन में भी अँधेरा था
आग के इर्द-गिर्द सबका लगा डेरा था
मूंगफली के दाने थे
नानी की चटपटी कहानी थी
वो दिन भी कितने सुहाने थे
न घर चलाने का कोई बोझ था
सब कुछ सुहाना-सुहाना सा था।