मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
यूँ ही प्यार जताना बच्चो मेरे संग आ जाना बच्चो हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों घूम फिरकर हंसी - ठिठोली मुझसे तुम कर जाना बच्चो नन्हे-नन्हे ...
आसमान में उड़ी पतंग
दूर-दूर तक चली पतंग
कभी लड़ी फिर कटी पतंग
गिर कर भी फिर उड़ी पतंग
एक दूसरे से भिड़ी पतंग
रंग-बिरंगी छोटी-बड़ी
आसमान में सजी पतंग
काटम-काट गुथ्थम-गुथ्था
दूर-दूर तक उडी पतंग।