मेरी कविता, मेरी अभिव्यक्ति
हे प्रियतम तुम रूठी क्यों है कठिन बहुत पीड़ा सहना इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा निःशब्द अश्रु धारा बनकर मन की पीड़ा बह निकली तब है शब्द कहाँ कु...
आसमान में उड़ी पतंग
दूर-दूर तक चली पतंग
कभी लड़ी फिर कटी पतंग
गिर कर भी फिर उड़ी पतंग
एक दूसरे से भिड़ी पतंग
रंग-बिरंगी छोटी-बड़ी
आसमान में सजी पतंग
काटम-काट गुथ्थम-गुथ्था
दूर-दूर तक उडी पतंग।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 01 जनवरी 2024 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !
आपका बहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी
नववर्ष की शुभकामनाएं
धन्यवाद शुशील जी !! आपको भी नववर्ष की शुभकामनाएं
बहुत सुन्दर
धन्यवाद !!
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 01 जनवरी 2024 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !
जवाब देंहटाएंआपका बहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी
हटाएंनववर्ष की शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंधन्यवाद शुशील जी !! आपको भी नववर्ष की शुभकामनाएं
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद !!
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