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प्रियतम

हे प्रियतम तुम रूठी क्यों  है कठिन बहुत पीड़ा सहना  इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा  निःशब्द अश्रु धारा बनकर  मन की पीड़ा बह निकली तब  है शब्द कहाँ कु...

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

पतंग

आसमान में उड़ी पतंग 

दूर-दूर तक चली पतंग 

कभी लड़ी फिर कटी पतंग 

गिर कर भी फिर उड़ी पतंग 

एक दूसरे से भिड़ी पतंग 

रंग-बिरंगी छोटी-बड़ी 

आसमान में सजी पतंग 

काटम-काट गुथ्थम-गुथ्था 

एक दूसरे से भिड़ी पतंग

दूर-दूर तक उडी पतंग। 

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