भोर में जब मिली चाँद तारों से मैं
उनकी मुस्कान में एक अजब बात थी
एक नया जोश था एक नयी बात थी
सुबह की आहट से फैली थी जो रौशनी
हर तरफ का नज़ारा गज़ब था दिखा
हवाओं में थोड़ी सी ठिठुरन भी थी
रात सपने में जो हमने देखा था कल
आज उसको मुकम्मल करना जो था
कोई सपना हमारा अधूरा न हो
कोई मंज़िल हमारी न छूटे कभी।