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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

सोमवार, 5 मार्च 2018

तुम बिन

तुम बिन हर चीज़ आधी है
हर ख़ुशी अधूरी सी
हर लम्हा उदास है
हर बात आधी सी

तुम बिन फूल भी काँटे नज़र आते है
अपने भी बेगाने सा सुलूक करते है
हर किसी की नज़रे घूरती है
जैसे हमने कोई बड़ा अपराध कर दिया है
सच्चाई भी बेबसी का चादर ओढ़ लेती है
अपनी साँसे भी खुद को डराने लगती है

तुम हो तो ज़िन्दगी रूहानी है
तुम हो तो मौसम सुहाना
तुम हो तो हर घड़ी हर दिन
वसंत का मौसम है

तुम हो तो लम्हा-लम्हा
जीवन खुशनुमा बन जाता है
तुम हो तो जीवन में रंग सारे है
तुमसे हँसी तुमसे ख़ुशी
तुम से ही ज़िन्दगी के धुप-छाँव सारे है.

रविवार, 4 मार्च 2018

एहसास

प्यार के एहसास से
मेरा दिल झूम उठा
जब मैंने अपने लिए
किसी को मुस्कुराते हुए देखा
अपने चेहरे के भावों को
मेरे से पहले पढ़ते हुए देखा

मैं सुनती थी
लोग एक दुसरे से
प्यार करते है
प्यार में जीते है
प्यार के लिए मरते है
प्यार अनमोल होता है
जिसने अपने प्यार को पा लिया
उसने जग पा लिया

पर मेरे लिए तो ये सब
एक कोरी कल्पना थी
किस्से और कहानियों में
सुनना बड़ा प्यारा लगता है
पर जीवन की कडवी सच्चाई के आगे 
प्यार की परिकल्पना भी 
जीवन की सबसे बड़ी जंग 
जीतने के बराबर है 

पर ये कल्पना वाकई में सच है 
प्यार तो हर रिश्ते में अनमोल है 
बस इसको दिल से महसूस करने की देर है.

शनिवार, 3 मार्च 2018

प्रेमराही

मेरी चाहत परवान चढ़े
मैं ऐसा कृत्य करूँ कैसे
फूलों सी माला बनकर के
मैं तेरे गले का हार बनूँ
तेरे सौंदर्य की आभा को
मैं कांति और प्रदान करूँ
जीवन अनमोल खज़ाना है
इसको तुम पर ही लुटाना है
तेरी पलकें थी नयन मेरे
जो देख सुकूं से भारती थी
जीवन तेरा
मैं उसकी हर साँस बनूँ
तू चाहत हैं
मैं प्यास बनूँ
तू है दरिया
मैं उसका एक किनारा हूँ
पानी की बहती धारा है तू
मैं प्यासा भृंग जनम भर का
तुम प्रेम की मृगमरीचिका
मैं रेतो का बना श्रृंखला
जून माह की दोपहरी में
मैं सूरज का ढाल बना
तुम बरसाती बादल बनकर
मेरा तेज मिटा डाला
तेरी साँसों में खुशबू बनकर
खुद को अमरत्व प्रदान किया
बनकर दोनों प्रेम के राही
कई को प्रेम सिखा डाला
जीवन को एक नई दिशा
अपनों को खुशियाँ बांटा है
प्रेम है पूजा, प्रेम है दर्पण
प्रेम ही जीवन सार
प्रेम बिना सब खाली-खाली
हम है राही तुम हो राही
प्रेम बाँटकर, प्रेम है पाना
प्रेम की भाषा सबको सिखाना
अपना जीवन मंत्र बनाना.

गुरुवार, 1 मार्च 2018

मेरे साथियों

काँप उठे दश दिशाएँ एक ही हुंकार से
चल पडों तो कोई अड़चन राह में आए नहीं
मंजिलों को दोस्त अपना तुम बनालो साथियों
डट पडों मैदान में, रण छोड़ बैरी भाग ले
मिट्टी में डालो दाने तो, सोना उगा दो साथियों
तोड़कर इस जाति भाषा धर्म की जंजीर को
मानवता को धर्म अपना तुम बना लो साथियों
ये जमीं है कर्म भूमि
जीवन तपोवन साथियों
हर दिशा हर राह में
खुशियाँ बिछा दो साथियों
सब रहे मिलजुल कर ऐसा
रुख बना दो साथियों
ये धरती हैं वीरों की
उनको जगा दो साथियों
ये नहीं किस्सा हमारा
है हक़ीकत साथियों
फिर से अपनी इस जमीं पर
अपने निर्मल प्रेम की
गंगा बहा दो साथियों
हर फिज़ा में खुशबू अपने देश की
फैला दो मेरे साथियों...

शनिवार, 20 जनवरी 2018

जीवन रण

जीवन के रण में काँटे थे
हर ओर निराशा पसरी थी
गमगीन निगाहे घूर रही
सबके अधिकार का रोना है
हो गई मित्रता उलझन से
कुछ मिला न हमको किस्मत से
हर रोज़ नई उलझन
हर कदम चुनौती भरा मिला
सौ बार गिरे, सौ बार उठे
हर बार कदम कुछ और चले
कुछ खास मिले, कुछ बिछड़ गए
कुछ ने तो पत्थर भी मारे
पीकर अपमान के घूँट सभी
जीवन पथ पर कुछ और चले
क्या कोई अंत मिलेगा इसका
जीवन के रण में शांत खड़े
यह सोच-सोच हम ठिठक गए
कोई तो छोड़ मिलेगा
कोई तो मोड़ मिलेगा
है कैसा कसूर ये मेरा
कि तुमने भी मेरी ही खातिर
सारे उलझन समेट है रखे
मैं कैसे वहन करूँ इन सबको
कैसे सहन करूँ मैं
जीवन के दुर्गम पथ पर
कैसे निर्वहन करूँ मैं
मेरी जीवन की खातिर भी तो
तुमने कुछ सोचा होगा
काटों के चुभने से जो जख्म लगे है
उन ज़ख्मो की खातिर
कोई तो मरहम होगा
हर बार हारना ही क्या
जीवन का लक्ष्य है मेरा
मेरी मेहनत का मुझको
कुछ तो परिणाम मिलेगा
है कितने किस्से तेरे
जीवन को स्वर्ग बनाने की
पर मेरी विनती से तुमको
कोई फर्क न पड़ता
कहते है
भगवान् हमारे साथ सदा ही होते
पर मेरी विनती भी उनको
कभी न पिघला पाई
मैं जीवन के रण में उनको
हर दम ढूंढा करती
पर मेरी कोशिश में  मुझको
खानी मूंह की होती
फिर भी जीवन के रण में
है आगे बढ़ते रहना
हर मुश्किल के बाद
कदम दर कदम हमें हैं बढ़ना.

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

समय

समय की कीमत को
जिसने पहचान लिया
ज़िन्दगी के मर्म को उसने बस जान लिया
हर सुबह एक नया सवेरा लेकर आता है
हर चांदनी रात हमारे लिए कुछ सवाल छोड़ जाती है
जीवन पथ पर सिर्फ चलना ही काफी नहीं
समय के मर्म को गहराई से समझना होगा
समय हँसाता भी है
समय रुलाता भी है
हर किसी की ज़िन्दगी
समय के रथ पर ही सवार है
किसी की नैया बेड़ा पार है तो
किसी की मझदार में ही फंसी है
हर किसी को समय की मार खानी ही पड़ती हैं
कोई उस चक्र को मौन में गुजार देता है
तो किसी की चीख़ पूरी दुनिया सुनती है
फर्क है तो सिर्फ हमारी सोच का
समय का काम है चलना
ये हम पर निर्भर करता है कि
हम उसके साथ चले या
फिर वापस लौट चले.

रविवार, 14 जनवरी 2018

वो

वो न जाने कब बन गई थी
मेरी ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा
साँसों में फूलों की महक बनकर बस गई थी
रातों को सपनो में
दिल को सूरज की गर्मी में
उसका हर रूप अपने आप में अनोखा है
अपने सपने को चंद लम्हों में हमने समेटा है

फूलों सी कोमलता, शहद सी मिठास
भौड़ों सी व्याकुलता
मिट्टी सी खुसबू
हवा जैसी चंचलता
इत्र के जैसी सुगंध
हौसला पहाड़ों सा लेकर
रात्रि की तरह गहन अंधकार में भी
जीवन की राह ढूंढने ने की हिम्मत
चेहरे पे पूर्णमासी के चाँद सी फैली मुस्कुराहट

उसके एहसास ने मुझमें
हर पल असीमित उर्जा का संचार कर दिया है
मुझ जैसे साधारण प्राणी को
एक मुकम्मल इंसान बना दिया.