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स्वयं

कठिन वक्त है  कठिन घड़ी है  कठिन राह पर चलकर हमको  मंज़िल अपनी पानी है  अपनी अदा जो उत्तम हो  वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो  कुछ उ...

गुरुवार, 26 मार्च 2020

कसौटी

अर्पण समर्पण ये मेरा है दर्पण
ना क्षण में भंगुर, ना क्षण में भिहंगम
कदम धीरे-धीरे चले लक्ष्य के पथ
सहम कर ठिठक कर थोडा-सा रुक कर 
सभी के नज़रिए पर खुद को खड़ा कर
भींगे नयन और होठों पे मुस्कान
दिल में लिए दर्द के दासता को

अर्पण समर्पण ये मेरा है दर्पण
सभी को सभी से मिलाने की जिद में
चेहरे पे सब के हँसी तैर जाये
गमे दिल में हम तो छुपाते रहेंगे
मगर क्या पता था
सभी मिलकर खंजर चुभाने लगेंगे
अपराध खुदका मिटाने की खातिर
हम आग के यूँ हवाले करेंगे

अर्पण समर्पण ये मेरा है दर्पण
होते रिश्ते खड़े प्रेम की नीव पर
सीचते है सदा उसको विश्वास से
तोडना है तो क्या तोड़ डालो इसे
जोड़ने में तो वर्षों लगे थे हमें
बाग़ सुनी हुई पेड़ मुरझाए सब
इल्म जिसका तुझे हो न पाया कभी

अर्पण समर्पण ये मेरा है दर्पण
आँधियों में अकेले खड़े अब रहो
कांटे बोये थे तुमने फल कहाँ पाओगे
अपनों को अपनों से यूं करके जुदा
चैन किसको मिले जो अब तुम पाओगे

अर्पण समर्पण ये मेरा है दर्पण
काटें बोने से मिलते है कांटे सदा
प्रेम जो बोएगा प्रेम वो पायेगा
प्रेम में कोई अपना पराया नहीं
प्रेम का दायरा सारा संसार है
नफरतों का नहीं कोई स्थान है
प्रेम जीता है हरदम आगे जीतेगा भी। 

शनिवार, 21 मार्च 2020

छोटी सी ज़िन्दगी

छोटी सी है ज़िन्दगी
पल दो पल है ख़ास
मीठी-मीठी यादों में बस जाता संसार
गिले-शिकवे कडवी यादें
ज़हर घोलती है जीवन में

छोटी सी है ज़िन्दगी
प्रेम भाव सब टूट रहा है
पल-पल सब कुछ छुट रहा है
जीवन जग में घुट रहा है
मानव मन कुछ टूट रहा है

छोटी सी है ज़िन्दगी
राग-द्वेष में गुत्थम-गुत्था
आम भावना लुटता पिटता 
प्रेम भावना पीछे छुटा 

छोटी सी है ज़िन्दगी
अहम् प्रेम पर भारी पड़ता 
दुर्गति सच की आम हुई है 
प्रेम आज बदनाम हुई है 
चालाकी सिर ताज सजा है 
धूर्त प्रकांड विद्वान बने है 

छोटी सी है ज़िन्दगी
आज रूपया सिर चढ़ बोले 
लक्ष्मी भी आवाक खड़ी है 
कैसा ये संसार बना है 

छोटी सी है ज़िन्दगी
क्रूर भावना, झूठ बोलना 
घर-घर में ये काम हुआ है 
अपना-अपना बस सब अपना 
बाकी बचा न कोई सपना। 

शनिवार, 14 मार्च 2020

आवो हवा

गफलत हवा में मत उड़ाइए
महौल को और भी बोझिल मत बनाइये
बड़ी मुश्किल से मिलती है खुशियाँ
कम से कम इसका मज़ाक मत उड़ाइए

गफलत हवा में मत उड़ाइए
भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करना
रिश्तों के बीच नफरत के बीज बोना
अपनों को अपनो से दूर करना
ऐसा गुनाह करने में
क्या मज़ा आता है आपको?

गफलत हवा में मत उड़ाइए
ज़िन्दगी खुशियाँ बांटने के लिए मिली है
ज़िन्दगी अनमोल है
इसे जाया न कीजिये

गफलत हवा में मत उड़ाइए
किसी के दुःख बांटने का
रोते हुए चेहरे पर खुशियाँ भिखेरना का
फिर कोई सुनहरा मौका मिले न मिले
जो मिला है उसे
अब और जाया न कीजिये

गफलत हवा में मत उड़ाइए
आप अपनी कामयाबी पर
इतना न मुस्कुराइए
क्या पता है आपको
आप जिसे अपनी कामयाबी समझते है
वो आपकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सबक न बन जाए।

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

दिल्ली

दिल्ली दिल है हमारा
जहाँ बसती हैं संस्कृति कि धारा
हर मोहल्ले में है मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा
हर घर में एक  नई  धुन बजती है
पर सदियों से हम
एकता की मशाल जलाता आया हूँ

पर आज चंद् लोगों के स्वार्थ
हमारी एकता पर  भारी पर रही है
हर ओर नफरत का बिज़ बोया जा रहा है
ओर बोया ही क्यों न जाए
क्योंकि हमने अपनी सोंच को संकुचित कर लिया है

ऐसी ताकते जब-जब प्रबल होती है
वक़्त एक नई करवट लेता है
हर भारतवासी से मैं अपील करती हूँ
अपनी ताकत को पहचानो
ओर इसे सही दिशा में लगा दो

सिर्फ खुद के लिए मत सोंचो
ये देश हमारा है
देश ओर हमारा विकास
अलग-अलग नहीं हो सकता
देश को तोरकर
खुद का विकाश कर भी लिया तो क्या
विकसित कभी नहीं कहलाओगे
देश का समग्र विकास ही हमारा समग्र विकास है!!  

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

न मेरी राह रोकना

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना
ये सिलसिला जो चल पड़ा
न अंत इसका हो कभी

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना
हैं कदम जो चल पड़े
सदा बढ़ेंगे आगे हम

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना
न अब है मुड़के देखना
जोश में कमी नहीं
होश में हैं आ गए

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना
ज़िन्दगी के काश मकश में
राह हमने चुन लिए

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना
छोड़ परायो-अपनों का गम
निर्विवाद अब चल दिए
जो भी आया सामने
अपना सभी को कह लिए

अभी न मुझको टोकना
न मेरी राह रोकना। 

शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

जीवन

सूर्य सा तेज
चाँद सी शीतलता
फूलों सी खुशबू
ज़िन्दगी के हर क्षण में
गुलाबों की कोमलता
गुलाब के काटों सी सख्ती
कमल के पुष्पों सी पवित्रता
नदियों के जल सी निर्मलता
बर्फ की सफेदी सी स्वच्छता
बादलों सी गहराई
पवन सी स्वछंदता
आसूं सी व्याकुलता
चांदनी रात सी रौशनी
यही तो है
अपने जीवन का सार
इसी से उदय
इसी में अस्त
जीवन तो जीवन है
हर पल वो मस्त है
कभी उदय
तो कभी अस्त है। 

सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

बढ़े चलो

बढ़े चलो, बढ़े चलो
बढ़े चलो तुम अभी
कदम दर कदम
हर कदम मुश्किलों से
तेरा सामना होगा
हर कदम राह रोकने को
आयेंगे कुछ लोग
पर हौसला रखना
इसी में ढूँढना होगा
छुपे उन रहनुमाओं को
जो तेरे क़दमों को
इज्ज़त बक्श ना जाने
जिनके हौसला से
हर कदम ताकत मिलेगी तुमको

शुक्रिया उनका करो
जिसने तुम्हारे राह में रोड़े बनाए
शुक्रिया उनका करो
जिसने तुम्हारे काम में कमियाँ निकाली
शायद उनकी मेहरबानी ने सिखाया
हर कदम मज़बूत हो कर आगे बढ़ना

जिद्द मेरी जज़्बात से जब जुड़ गया
रास्ते आसान होते ही गए
अब तो जैसे आदतों में ढल गया
हर कदम पर सीख कर कुछ उनसे जाना
कुछ नए आयाम अपनी जिंदगी में लाना
हौसला भी अपना भी एक दिन रंग लाएगा
एक नई पहचान मुझको भी दिलाएगा

मंजिले मुश्किल थी मेरी
राह कंकर से भरा
अपने भी बेगाने बनकर
सामने थे हर समय
पर ख़ुशी उन संस्कारों का
हमें हर दम रहा
जिन की विरासत पूर्वजों है मिली।