यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

जीवन साथी

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
हर जीत तुम्हारे हाथों में
हर हार तुम्हारे हाथों में

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
तुम ही अब मेरी किस्मत हो
तुमसे जीवन की रौनक है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
परिवार तुम्हारा या मेरा
अब सब कुछ तेरा है अपना
इन अनजानों की बस्ती को
अपनत्व का पाठ पढ़ा देना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
रिश्तों की लाज सदा रखना
हर रिश्ता जीवन ज्योति है
जीवन सुख-दुःख का मोती है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन के मुश्किल से डरना
या उससे लड़कर
जीवन के पथ पर आगे बढ़ना
है दायित्व तुम्हारा सब अपना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
करबद्ध निवेदन करता हूँ
कितनी भी मुश्किल आ जाए
सब लोग विरोधी हो जाए
पर अपना कर्तव्य निभाना
भूल न तुम साथी जाना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन तो दर्पण है मेरा
उस दर्पण को पढना सीखो
मुश्किल तो आता-जाता है
पर रिश्ता सदा निभाना है.

सोमवार, 8 जनवरी 2018

नन्ही परी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मन द्वंद्व में फंसता गया
उलझन बड़ी मुश्किल हुई
मैं सोचती जितना रही
उतना उलझता मन गया

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मैं भूलकर उस दृश्य को
हंसने की कोशिश खूब की
पर मन में उलझन अब भी थी
वो दृश्य जैसे मन के दर्पण में
हमें झकझोरती सी कह रही

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मेरी कथा, मेरी व्यथा
तुम सुन सको तो
सुन ज़रा
शुरुआत मेरी भव्यता से पूर्ण है
पर दिल में मेरे दर्द की चुभन है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
डोली मेरी फूलों से सज के आई थी
पर ज़िन्दगी काटों का फैला रण हैं
सबका अपना-अपना आकलन है
पर मेरी चाहत का किसको गम है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
बराबरी का हक़ मुझ भी चाहिए
मैं ममता की मूरत हूँ
पर पत्थर कब तक खाऊँगी
इन पत्थर के चोटों को मैं
लौटाकर ही जाउंगी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मानवता के रखवालों से
अर्ज हमारी इतनी है
ममता के इस मूरत से
ममता का अधिकार न छीने
जीवन की अनमोल क्षणों को
कीमत से छोटा मत करना

रिश्ते जुड़कर बने अनोखे
तोल-मोल से दूर रहे वो
दो परिवारों को जोरुंगी
हर रिश्ता अपना कर के मैं
एक नया आयाम लिखूंगी.

रविवार, 31 दिसंबर 2017

प्रीत

प्रीत में सब कुछ भुला कर
आप को दिल में बसा लूँ
स्वप्न के मंदिर में अपने 
देवता उनको बना लूँ 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
गीत गा कर के सुना दूँ 
धुन नए अपने बना लूँ 
ज़िन्दगी के फूल को 
राह में उनके सजा दूँ 
प्रीत में उनको समर्पित 
हर ख़ुशी हर गम समर्पित 
हर घड़ी हर क्षण समर्पित 
स्नेह के कण-कण समर्पित 

प्रीत है एक शब्द छोटा 
पर हैं इसका अर्थ विशाल 
न ही इसकी कोई सीमा 
बन्धनों से मुक्त हैं ये 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
नीत नए रिश्ते बना कर 
ज़िन्दगी के राह में
नीत नया सन्देश लेकर
सब को हम बताएँगे.

बुधवार, 27 दिसंबर 2017

ठिठुरता हुआ आम आदमी

दिसंबर की सर्द  रात ऐसी
कि इंसान बर्फ का सीला बन जाए
पर पेट की भूख ऐसी
कि घर से निकलना ही पड़ेगा

ज़िन्दगी में कुछ बेहतर करना हैं
इस ललक ने इतना मजबूर कर दिया
चाँद दूर हैं बहुत फिर भी
इसे अपनी मुट्ठी में भरना है मुझे

ठोकर खाकर भी दौड़ना हैं हमें
गिर कर भी
मंज़िल की ओर कदम बढ़ाना  है हमें
मुमकिन है
कुछ आगे निकल ही जाएंगे

ये सर्द रात इतनी गहरी हैं
कि अपनी पदचाप भी
दिल को डरा रही है
पर हौसला हममें भी कम नहीं

ज़िन्दगी बार-बार हमको रुला रही
हर रिश्ता अग्नि परीक्षा
हमसे ही मांगता है
पर हम हैं कि
इस रात की भाँती
दिल थाम कर बैठे हैं
कुछ ठान कर बैठे हैं
जीवन के दर्द को पहचान कर बैठे हैं!!

रविवार, 26 नवंबर 2017

जीवन एक रंगमंच

होके मायूस ज़िन्दगी से 
यूँ न निराश होइये 
ज़िन्दगी के चिराग का 
आँधियों से सामना 
तो ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा है 
अगर मुसीबत में भी 
हौसला बरक़रार रखा तो 
मुसीबतों के आग में तपकर 
कुंदन बनकर निखरोगे 
हम सीखते हैं उलझनों से 
हर ठोकर हमें और मजबूत बनाती हैं 
ज़िन्दगी को जीने का  
एक नया सबक दे जाती हैं 
गैर और अपनों का 
फर्क समझाती हैं 
रिश्तों के डोर को 
और मजबूत बनाती हैं 
जीवन के उतार-चढ़ाव का 
नाम ही ज़िन्दगी हैं 
जब गैरों के दुःख से भी 
आँख में आँसू छलक आए 
जब खुद पर मुसीबत आए तो 
दिल को चट्टान की तरह 
मजबूत बनाकर रखना 
हम सब ज़िन्दगी के रंगमंच पर 
अपना-अपना किरदार निभाने आए हैं 
फिर क्यों न अपने किरदार को 
पुरे मन से निभाए 
ज़िन्दगी के खूसूरत रंगों को 
खूबसूरती से सजाए 
अपने पीछे कुछ यादगार लम्हे
अपनों को दे के जाए। 

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

दीपोत्सव

एक प्यार के दीपक से 
सारे जग को रौशन कर दे 
इस बार दिवाली पर 
हर घर में रौनक आ जाए 
हर घर में खुशियाँ छा जाए 
हर चेहरे पे रौशन हो 
दीपोत्सव की खुशियाँ 

एक प्यार के दीपक से 
इस बार दिवाली में 
कर दूर अँधेरा मन की 
संकल्प ये लेना हैं 
सौगात ख़ुशी की सबको 
देना और लेना हैं 

एक प्यार के दीपक से 
इस बार दिवाली में 
तोड़ स्वार्थ के बंधन सारे 
आओ ख़ुशी मनाए 
जिस घर में अँधियारा हैं 
उस घर में दीप जलाए 
दीपक के इस पर्व में हम सब 
मिलकर ख़ुशी मनाए 

एक प्यार के दीपक से 
इस बार दिवाली में 
भेद-भाव को भूल परस पर 
यह दीपक पर्व मनाए!

बुधवार, 22 नवंबर 2017

किसान

बहे पावन पुर्वाही
मौसम में खुशियाँ आई
खुशनुमा दिन-रात शीतल
मंद-मंद मुस्काए मेरा दिल
रिमझिम-रिमझिम पड़ी फुवारे
तन-बदन भीगा मेरा
ये बारिश की चंद फुहारे
दिल की खुशियाँ लौटाए
दिल झूम-झूम के गाए
धरती की रौनक लौटने
अब इंद्रदेव हैं आये
नें हमारे तरप रहे थे
दर्शन तेरे पाने को
फसल हमारे बाट जो होते
हरदम तेरा रहते
पर तुम तो हो
अकड़ में अपने
जब भी आते जोर-शोर से
हमें बहा ले जाते
फिर भी मेरे-तेरे बीच
एक अटूट रिश्ता हैं
एक दूजे के बिन हमें दोनों
रह नहीं पाएंगे
कभी रूठना, कभी मनाना
हम दोनों का ताना-बाना
जीवन का हैं चक्र सुहाना!