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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

शुक्रवार, 10 जनवरी 2025

स्वभाव

 स्वभाव अपना इतना कोमल था 

कि सब अपने - अपने से लगे 

मन में चीनी सी मिठास थी 

तो स्वभाव में गुड़ सी कोमलता 

पर इस रुखरे संसार ने सब बेकार कर दिया 

हर पग पर नई चोट खाई 

हर ठोकर पर अरमान टूटे 

हर रिश्ते ने तोहफ़े में कटुता दी 

हर रिश्ता चोट दे कर इतराया 

किसी ने बदकिस्मत तो किसी ने निकम्मा बताया 

किसी ने भिखमंगा तो किसी ने चोर तक ठहराया 

हद तो तब हो गयी जब 

जिस घर को अरमान से सजाया 

उसी घर ने घर तोड़ने का इलज़ाम हम पे लगाया 

उस दिन वाकई अपने अंदर कुछ टूट सा गया 

कुछ बिखर सा गया 

बार - बार अपने आप से सवाल करते रहे 

क्या रिश्ता इसी का नाम है 

पर इस कोमल मन को फिर भी समझ न आया 

कोई तो अपना होगा 

कोई विश्वास करेगा 

जब वक्त हमारा होगा 

सब कोई अपना होगा 

सबको सच्चाई दिखेगा 

पर ऐसा क्या कभी होगा 

जब सब कुछ अच्छा होगा?

बुधवार, 8 जनवरी 2025

अभाव

अभाव, जिसका कोई भाव नहीं 

ऐसा ही है अपना जीवन 

पिता से प्यार तो 

दादी का अभाव मिला 

घर सुन्दर 

उसमे प्यार का अभाव मिला 

रिश्ते खूब मिले 

पर प्रशंसा का अभाव मिला 

नाम तो खूब मिला 

पर अर्थ का अभाव मिला 

चलते रहे निरंतर 

पर मुकाम का अभाव मिला 

काम अच्छे - अच्छे करे 

पर कामयाबी का अभाव मिला 

मिला सबकुछ 

पर सुकून का अभाव मिला । 

सोमवार, 6 जनवरी 2025

बदलाव

जीवन के हर मोड़ पे देखो बदलाव है आता 

कभी ख़ुशी तो कभी गमो का दे उपहार वो जाता 

कभी धुप तो कभी छाँव है 

कभी बसंत का साया 

राहों में कंकड़ बिखरे है 

सरपट दौड़ रही है गाड़ी 

ठोकर खाने का खतरा है 

गिरकर उठना उठकर गिरना 

है जीवन की माया 

दुःख - सुख की यादे ही तो है 

जीवन की एक माला 

वक्त बदलता है हम सबको 

कभी वक्त को बदलो 

फिर देखो जीवन में कितना 

सुखद - सुकून है आता। 

शनिवार, 4 जनवरी 2025

आओ चले

आओ चले 

मिलकर हम सब 

चलो हँसने की 

हम वजह ढूंढते है 

अपनी - अपनी सी लगे 

वो जगह ढूंढते है 

जहाँ सबकुछ हो हमारा 

वो सतह ढूंढते है 

जो खुल जाये हमसे 

वो गिरह ढूंढते है 

ज़िन्दगी में नई 

एक सुबह ढूंढते है 

प्यार से हो बनी 

गर्मजोशी हो जिसमे 

अपनों का ऐसा 

शहर ढूंढते हो 

जहाँ न हो कोई भेदभाव 

छल - कपट से दूर चलो 

हम मिलकर अमन ढूंढते है। 

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2024

शिक्षा

शिक्षा,  शिक्षित,  और शैक्षणिक संस्थान 

ये सब आपस में ऐसे जुड़े है 

जैसे एक माँ से बच्चे के हृदय के तार 

जो दिखाई कभी नहीं देता 

पर बच्चों के चारो ओर कवच बनकर रहता है 

उसकी सुरक्षा कवच बनकर रहता है 

शिक्षा हमें बेहतर इंसान बनाता है 

जीवन को जीने का एक अलग अंदाज़ सिखाता है 

शिक्षित व्यक्ति ही समाज को राह दिखाता है 

शैक्षिक संस्थान शिक्षा का वो मंदिर है 

जहां बच्चों को सरस्वती माँ का 

प्यार और शक्ति दोनों मिलती है। 

शनिवार, 14 सितंबर 2024

मेरे ख्वाब

रात कली कोई ख्वाब में आई 

और गले का हार हुई 

हँसता हुआ था उसका चेहरा 

आँखों में कोई रंग था गहरा 

होठ गुलाबी, आँख शराबी 

चाल में मादकता झलकी थी 

जब मैं सुबह को नींद से जागा 

खोया - खोया खुद को पाया 

थका - थका सा मन बोझिल था 

कहाँ गई वो हुस्न की मालिका 

जिससे आँखें चार हुई थी 

काश वो मेरे सामने होती 

कुछ अपने जज़्बात सुनाता 

नए - नए मैं गीत बनाता 

शायर बन उसको बहलाता। 

शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

शिक्षक दिवस

आओ मेरे प्यारे बच्चों 

सब मिलकर कुछ गाते हैं 

हंसी-ख़ुशी से गाते-गाते 

नया आज भी कुछ करते है


शिक्षक दिवस के इस पावन दिन 

ज्ञान की ज्योति जलाते है 

गुरु शिष्य के पावन रिश्ते 

नए-नए आयाम गढ़ेंगे 


आओ मेरे प्यारे बच्चों 

सब मिलकर कुछ गाते है 

यह पावन दिन है हम सबका 

मिलकर हम सब गाते है।