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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

शेरावाली माँ

ओ माँ शेरावाली
ओ माँ शेरावाली
तुम सारे जग से निराली
तुम सारे जग से निराली
तू है जोतावाली
तेरी अपनी शान निराली
ओ माँ शेरावाली
तू बिगरी बनाने वाली
खुशियों की ज्योत जगा दे
मन का अँधियारा दूर करा दे
माँ हमको अपने दिल में
अपनत्व का बोध करा दे
ओ माँ शेरावाली
मेरी ममता आज जगा दे
मेरा जीवन खास बना दे
मुझे अपने द्वार बुला ले
अपनी आँचल की छाँव में
मुझे अब तो दर्शन दे दे
ओ माँ शेरावाली
ओ माँ जोतावाली.

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

स्त्री

जन्म से संसार में 
सृजन करने को है आई 
अर्पण ही स्वभाव उसका 
दर्पण में है ढालना 
कोई कमी रह जाए ना 
ढालना सांचे में खुदको 
हर नयन से सिख लेती 
हर नयन में ढूंढती 
तस्वीर मेरी कौन-सी है 
जो कभी दर्पण में देखा 
या कभी जग ने दिखाया 
माँ ने हमको क्या सिखाया 
और दुनिया ने बताया 

तू नहीं है बिटिया रानी 
बोझ है तू इस धरा पर 
है नहीं चाहत तेरी कोई 
हो नहीं आहट तेरी कोई 
मेरी ही परछाई बनकर 
तू सदा रह जाएगी 

हमने चाहा तो दिखाया 
हमने चाहा तो छिपाया 
हमने चाहा तो सताया 
तुम को आगे रखना भी 
हिस्सा मेरी नीतियों का 

कब तक छदम का जंग लड़ोगे 
हम पर कुठारा घात करोगे 
हम बने है ऐसी मिट्टी के 
लाख़ जतन कर लोगे फिर भी 
हमें न तुम तोड़ पाओगे 

स्त्री अमरत्व का नाम है 
स्त्री प्रेम का प्रतीक है  
स्त्री दया का सागर है 
स्त्री जीवन में खुशियाँ है  
स्त्री चेहरे की मुस्कान है 
स्त्री निर्मल और पवित्र है 

इसे दिल से महसूस तो करो 
जीवन परिपूर्ण हो जाएगा 
स्त्री माँ,बहन,बेटी ही नहीं 
हर घर में पूजी जाने वाली लक्ष्मी भी है 
इसकी क़द्र करके तो देखो 
ज़िन्दगी जन्नत बन जाएगी.

रविवार, 30 सितंबर 2018

आपबीती

अंतर्मन में होड़ लगी है
जीवन पल-पल बीत रहा है
हर पल, हर क्षण जीत रहा है
पर पल-पल में टूट रहा है
जीवन क्रम से छुट रहा है
बोतल में शाम डुबोता हूँ
कुछ खोता हूँ कुछ पता हूँ
हैं कामयाब लहरे संग-संग 
फिर मैं क्यों गोते खाता हूँ
है चहल-पहल चहुँ ओर मेरे
फिर मैं क्यों नैन भिगोता हूँ
जीवन का है वरदान मिला
फिर मैं इस पर क्यों रोता हूँ
सब कुछ मुट्ठी में भरने की
चाहत ने भूख को मारा है
इस रंग-बिरंगी दुनिया में
काटों का पौध लगाया है
जो भी हमने दुनिया को दी
वापस हमने सब पाया है
फिर रोना क्या फिर गाना क्या
हैं संग-संग मौज मनाना क्या
कुछ सिख मिली
कुछ मीत मिले
जिसने जीवन को जित लिया
अब हम को भी अपनाना है
अब राह अलग बनाना है.

शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

बेरंग ज़िन्दगी

दुनिया में बिखरे हज़ारों रंग
पर क्यों है हम सब की
बेरंग ज़िन्दगी
रिश्तों के नाम में
कितनी मधुरता है
पर वक्त ने उसकी
मिठास भी लेली
हम सब जानते हैं
कि रिश्ते अनमोल होते हैं
पर क़द्र उसकी कौन करता है
जिसने भी रिश्तों की क़द्र की
लोग उसे जाहिल समझते हैं
आज अपने सपनों में हम सब
ऐसे खो गए है कि
हकीकत सामने है
पर दिखाई कुछ नहीं देता
जब टुटता  है घर हमारा
ज़माने को कोस  लेते हैं
पर कभी सोचा है हमने
कि जो हम रोज बोते है
वही तो काटना होगा
हम भी उसी के दायरे में आज आते हैं
क्या वाकई में वक्त इतना बदल गया है
दिल माँ की मूरत से
पत्थर में ढल गया है
सांस चल रही है
पर वक्त थम गया है !!

शनिवार, 22 सितंबर 2018

साईं कन्हैया

ओ मेरे जीवन के खेवैया
तुम हो मेरे साईं कन्हैया
तुम ही मेरे माँ-बाप भैया
नेह नाते दार तुम हो
सब के पालन हार तुम हो

ओ मेरे जीवन के खेवैया
तुम हो मेरे साईं कन्हैया
तुम से है जीवन की ये खुशियाँ
तुम ही मेरे माँ-बाप भैया

ओ मेरे जीवन के खेवैया
सब के पालन हार तुम हो
दीन-दुखी के द्वार तुम हो
हर घडी हर सांस तुम हो
मेरा तो विश्वास तुम हो

ओ मेरे जीवन के खेवैया
तुम हो मेरे साईं कन्हैया
तुम ही मेरे माँ-बाप भैया.

बुधवार, 19 सितंबर 2018

कदम-कदम बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा
सफल कदम बढ़ाये जा
वो गीत गुनगुनाए जा
हैं मज़िले आसान ही
कदम-कदम बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा
जीवन के उलझनों को
तुम खुद से ही सुलझाए जा
भय ठोकरों का कर नहीं
यह आज है कल फिर नहीं
कदम-कदम बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा
वो गीत गुनगुनाए जा
सब हौसला बढ़े तेरा
तू बस सीढ़ियाँ बनाए जा
ज़मीन, गगन, नदी, पहाड़,
सभी को पार कर
कदम-कदम बढ़ाये जा

कदम-कदम बढ़ाये जा
ख़ुशी के गीत गाये जा
हर लक्ष्य हो तुम्हारा
तुम हो विजय सदा
कदम-कदम बढ़ाये जा.

मंगलवार, 18 सितंबर 2018

दुनियावालों

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
हाइफा के समुद्र तट पर
दो वीर सपूत के
पानी के साथ करते अठखेलियों को
देख रहा है विश्व ध्यान से
क्या यह है संकेत मिलन का
या फिर आने वाली कोई क़यामत है

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
यूँ नहीं दौड़ लगा रहे दुनिया के
वह तो भीष्मपितामह है
दाढ़ी पक गयी बाल पक गए
फिर भी जोश जवानों सा

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
यह देश चल पड़ा प्रगति की राह पर
अब यह नहीं रुकने वाला है

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
तुम जोर लगा लो लाख मगर
अब हमें नहीं पीछे मुड़ना है
हैं साथ हमारे भीष्मपितामह
हैं नहीं किसी का डर हमको.