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पहेली

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सोमवार, 28 सितंबर 2020

मेरी सपनो की मूरत

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत
कैसी सजी है मेरे सपनो की मूरत
कभी झांकती , तो कभी होती ओझल

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत
बिरह में सताती, मिलान में सताती
बचूं कैसे उसकी शैतानियों से

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत
फूलों की पंखुडिओं से भी है कोमल 
कैसे छुऊँ टूट के न बिखड़ जाये 

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत 
डरता हूँ उसको नजर लग न जाए 
मेरे कैदखाने से वो डर न जाए 

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत 
पलक  जो झपक दे , तो अँधेरी राते 
नयन खोल दे चाँदनी फिर न जाये 

बड़ी बाबली है , बड़ी खूबसूरत
कैसी सजी है मेरे सपनो की मूरत। 

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