यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

सफर

हो के मायूस ना यूँ शाम ढलते रहिये
ज़िन्दगी एक भोर है 
सूरज की तरह निकलते रहिये 
ठहरेंगे एक पाँव पर तो थक जाओगे 
धीरे-धीरे ही सही 
मगर राह पर चलते रहिये 
ये सफर खट्टे-मीठे अनुभवों का सफर है 
बस इस राह पर 
मुस्कुरा कर आगे बढ़ते रहिये 
ज़िन्दगी भोर का उगता हुआ सूरज है 
बचपन सुखद आश्चर्य का संगम है 
जवानी दोपहरी की तपती हुई रेत तो 
बुढ़ापा शाम की वो छॉव है 
जो दुखता भी है और 
ज़िन्दगी की खट्टी-मीठी यादो में 
रमता भी है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें