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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

चांदनी रात

चांदनी रात में
तारों की बारात में
ख्वाबों के रथ पर सवार
मेरा मन कही खोया हुआ
कल्पना की उड़ान भरता हुआ
ज़िन्दगी के उन पलो को याद करके
मुस्कराया ऐसे जैसे वर्षो की
धुंध आँखों के सामने से छट गई हो!

चांदनी रात में
तारों की बारात में
विचारों के झंझावात ने
मुझे झकझोर कर रख दिया
मेरी सोई हुई कल्पना को
चंद पल में ऐसे जगा गई
जो वर्षो पहले गुजारा था
वो पल में सामने आ गया!

चांदनी रात में
तारों की बारात में
कल्पना के सफ़ेद घोड़े पर
सवार मेरा मन
यादों के बाग़ में विचरण कर रहा था
ऐसा लग रहा था मानो
सारी यादें मेरे सामने ही खड़ी हो
वर्षो की याद
पल भर में ताजा हो गई
इस चांदनी रात का शुक्रिया
किन शब्दों में करू
आज शब्द भी कम पड़ गए
इस चांदनी रात में
यादों की बारात में!

चांदनी रात में
तारों की बारात में
हम तो कही खो गए
हर रात चांदनी रात हो
यूँ ही कल्पना की उड़ान हो
बरसो की ज़िन्दगी पल भर में जी लें
बस हर रात ऐसी ही सुहावनी रात हो!!

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

साई प्रभु!

अल्लाह हो तुम इश्वर हो तुम
महावीर नानक राम
परतिश साई शंकरा तुम ही हो मेरे प्राण
हर प्राणी के प्राण तुम हो
दिनों के तुम साई राम!

तुम करुना के सागर प्रभु हो
प्रभु सुन लो मेरी पुकार
दया सागरा राम तुम हो
कृष्ण कनैहया श्याम!

दिन-रात भजु हर शाम भजु
प्रभु दर्शन दे दो साई
हमे भक्ति की राह दिखा दो
ज्ञान की ज्योति जलाओ प्रभु!

प्रभु सुन लो मेरी पुकार
हमे राह दिखाओं प्रभु
हर मन में प्रेम की ज्योति जला दो
हर दिल में भक्ति भाव!

एक बार बस एक बार
प्रभु दर्शन दे दो साईं
अल्लाह हो तुम इश्वर हो तुम
महावीर नानक राम
तुम करुना के सागर प्रभु हो
प्रभु सुनलो मेरी पुकार!

रविवार, 12 फ़रवरी 2017

सैनिक

हे देश के वीर सपूतो
करते हैं नमन तुम्हे हम
देख के तेरे मातृभाव को
अडिग अटल और सत्य काम को
शौर्य पराक्रम शूरवीर को
करते हैं सदा प्रणाम!

हे देश के वीर सपूतो
सीमा की रक्षा करना
पहला कर्तव्य तुम्हारा
मातृभूमि को माँ से पहले
रखकर तुम चलते हो
सर्दी-गर्मी, दिन और रात
कभी नहीं थकते हो!

हे देश के वीर सपूतो
करते हैं नमन तुम्हे हम
सियाचीन की चोटी पर भी
तुम यु ही अटल रहते हो
तूफानों से लड़कर भी
रत्ती भर जोश ना कम होता!
हे देश के वीर सपूतो
करते हैं नमन तुम्हे हम!

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

बचपन

उन बचपन की गलियों में
सखी-सहेली सब मिल बैठे
गुड्डे-गुड़ियों की शादी में
हम बाराती बनकर आते
कोई दुल्हन का पक्ष निभाता
कोई दुल्हे का पक्ष
सब कुछ होता इतना सुन्दर
जिसे याद कर अब भी हम
खुद में हैं हंस लेते!

उन बचपन की गलियों में
सखी-सहेली सब मिल बैठे
रोज़ लड़ाई करते हम सब
फिर भी साथ ना छुटा
ये तेरा हैं, ये मेरा हैं
दिन में करते कई-कई बार!

उन बचपन की गलियों में
सखी-सहेली सब मिल बैठे
लेकिन अगले दिन ही फिर
कसम सभी हम खाते
अब नहीं लड़ना, मिलकर रहना
हम बच्चे हैं साथ-साथ!

उन बचपन की गलियों में
सखी-सहेली सब मिल बैठे
काश अभी हम जा पाते
अपना बचपन, अपनी बैठक
फिर से वही लगा पाते
वही सहेली, गुड्डे-गुड़िया
फिर से रंग जमा पाते!

उन बचपन की गलियों में
सखी-सहेली सब मिल बैठे
कितना सुन्दर बचपन था
और कितनी प्यारी सखियाँ
जिसे याद कर अब भी हम
खुद में हैं खो जाते!!

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

भारत वासी

जी भर कर जी लेने दो
थोड़ा तो जी लेने दो
जीवन तो पूरी बाकी हैं
थोड़ी मस्ती कर लेने दो
सुख-दुःख के जो साथी मेरे
उनको तो गले लगाने दो!

अपने अनमोल पलो को हमने
मस्ती की भेंट चढ़ा डाली
कुछ पल जीने के चाहत में
पुरे जीवन को धो डाला!

वक्त की क़द्र न की हमने
खुद में उलझे रह गए सदा
हम ऊब चुके हैं इस जीवन में
अब तो तूफ़ान मचा देंगे!

अब तक धू-धू कर जलते थे
किन्तु अब इस अंगारे से
अपने राह में आने वाली
हर पत्थर को पिघला देंगे!

हम धू-धू जलते अंगारे हैं
अब तूफानों को संग लिए
कुछ भी करके दिखला देंगे
रोना, भूखो मरना, रो कर खाना
यह नहीं हमारा जीवन हैं!

अंतहीन अन्धकार ज्योति की
कब तक और तलाश करू
अब तो जीवन को उच्च शिखर पर
पहुंचा कर ही दम लेंगे!

सुख-दुःख की हमे परवाह नहीं
अब शिखर से हैं नाता मेरा
टक-टकी लगी उस क्षण पे हैं
जब काम हमारा बोलेगा
जब नाम हमारा बोलेगा!

हम विश्व गुरु कहलायेंगे
हम सब को राह दिखाएँगे
हम शान्ति दूत बनकर के ही
एक नयी राह दिखलायेंगे!

हम धू-धू जलते अंगारे
अब तो तूफ़ान मचा देंगे
हम आन-बाण पर मरने वाले
कुछ भी कर के दिखलायेंगे!!

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

भारत

विशाल भारत देश हमारा
नए-नए हैं रंग यहाँ पर
नयी-नयी भाषाएँ
हर प्रांत की अपनी भाषा
अपना पहनावा है
सबके इश्वर अपने-अपने
फिर भी दिल हैं एक
खान-पान और रहन-सहन में
हर ओर निरालापन हैं
नर से लेकर नारायण तक
इस धरती के वासी
काशी हो या विश्वनाथ हो
या कृष्णा का वृन्दावन
इस पावन धरती पर आए
नर के रूप में नारायण
राजा राम अयोध्यावासी
परती-पुरिश्वर साईं राम
मथुरावासी कृष्ण की लीला
जाने तीनो लोक
संतो की इस धरती को
गौतम बुध की वाणी ने
जोड़ दिया पूरी दुनिया से
बन गया बोध गया पावन धाम
ऐसा हैं इतिहास हमारा
विशाल भारत देश हमारा!

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

हमसफ़र

मेरी कल्पना हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की खूबसूरत अल्पना हो तुम
मेरे मन में छिपे तस्वीर की परिकल्पना हो तुम
ज़िन्दगी के सफ़र में हमसफ़र हो तुम
मुश्किलों के डगर में हिम्मत हो तुम
चाहे जहां भी देखूँ हर जगह हो तुम!

मेरी कल्पना हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की खूबसूरत अल्पना हो तुम
हर कदम मेरे साथ, मेरा विश्वास हो तुम
ख़ुशियों के बयार का एहसास हो तुम
हर गम को भूल जाऊँ जब साथ हो तुम
मेरी हिम्मत हो तुम मेरी साहस हो तुम!

मेरी कल्पना हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की खूबसूरत अल्पना हो तुम
मैंने तुम संग शुरू की थी अपने सपनों का सफ़र
हर कदम तुम हमारे और मैं तुम्हारी ताकत हैं
मुश्किलों को हटना होगा, हमारी जीत की ख़ातिर
हमारे सफ़र को मंज़िल तक पहुँचना होगा!

मेरी कल्पना हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की खूबसूरत अल्पना हो तुम
हमारे सपनों को हकीक़त में बदलना होगा
चाहे कितनी भी मुश्किल हो सब्र रखना ही होगा
मंज़िल अब दूर नहीं पर दौर कठिन है
इस कठिनाई को सूझ-बुझ से निपटना ही होगा!

मेरी कल्पना हो तुम
मेरी ज़िन्दगी की खूबसूरत अल्पना हो तुम!!