यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

गुरुवार, 20 जुलाई 2017

मैं नीर भरी दूख की बदली

मैं नीर भरी दूख की बदली
मैं स्वप्न सुंदरी सी पगली
इस लोक धरा पर आ पहुची
इसके कण-कण में रचती-बसती
इसके आपात सदा सहती
मैं नयनो में नीर गढ़ा करती
धरती पत्थर पिघली न कभी
पत्थर पर फूल खिले न कभी
मैं सदा इसे घीसती रहती
वो दिन शायद आ जाए कभी
मैं किस्मत अपनी लिखूंगी
ले कलम सुनहरी हाथों में
जीवन परिवर्तन शील बने
गमगीन नहीं रंगीन बने
हर कदम प्रयास परिवर्तन का
मैं मायूस नहीं उल्लाशीत हू
मैं नीर भरी दूख की बदली
कुछ हर्षित हू कुछ चर्चित हू
हर दम परिवर्तन शील बनू
जीवन में कुछ जीवन्त बनू
कुछ अच्छे-अच्छे शब्द गढ़ु 
कोई छंद ख़ुशी का लिख पाती  
मैं नीर भरी दुःख की बदली 
कुछ नीर ख़ुशी का दे जाती

जीवन जीवंत बना जाती!!

रविवार, 16 जुलाई 2017

ख्वाहिश

गुल- गुले से बन गए है
बुल- बुले से बन रहे है
पानी साफ दिख रहा है
पर ख्वाब गम से हो गए है
मॉनसून के आहाट से
खुशियाँ चेहरे पर बनी है
पर गर्मी के कारण
वो मुरझा से गए है
पारा आसमां पे चढ़ा है
जिन्दगी मुश्किल सी हुई है
चंद लोगो में सिमट सी
आज सुविधा यूँ गई है
काश ऐसे दिन जो आते
हर तरफ खुशियाँ छा जाती
प्यार मोहब्बत से सब मिलते
बैर भाव का नाम न होता
हंसी-ख़ुशी सब ओर गूंजती
बच्चे बूढ़े मिलकर गाते
गीत ख़ुशी का आते जाते!!

शनिवार, 15 जुलाई 2017

चाहत

वह कहता रहा 
मै सुनती रही 
ख्वाब मैं अक्सर 
उसी की बुनती रही
हर रोज उसे देखने को 
दिल भोड़ से ही तड़प  उठता 
जब उससे नजरे मिलती 
मन शांत होता और 
दिल की प्यास बुझती 
मैं कितनी नासमझ थी 
ख्वाब बुनती रही 
वक्त बीतता गया 
एक दिन अपने ही हाथो 
उसे अपने आप से जुदा  किया
खुद से ही उसे गैर बता डाला 
उसके दिल को 
झकझोड़ कर तोड़डाला 
क्यूंकि मेरी मुस्किल 
कुछ अलग थी 
मै अपने फर्ज से बंधी थी 
और क्या करती 
अपना प्यार 
दिल में ही छुपा लिया
बड़ी मुस्किल से उसको 
मैंने गैर तो बता दिया 
अपने एहसास को
 दिल में ही सूला  दिया
रंग जो प्यार का चढ़ा था 
उसको फर्ज से नहला दिया 
साबुन से साफ करके 
सब कुछ मिटा दिया 
पर दिल के  एहसास को
 मै मिटा न पाई 
आज भी उस दिन को याद  कर 
मन उदास होता है
कास तुम मेरे संग होते 
अपना भी प्यार संग-संग होता 
जीवन में कुछ उमंग होता
 कुछतो  तरंग होता      

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

मोहब्बत

जबसे तुमको देखा
नयन चार होने लगे
हम तो अकेले थे
अब तो अकेलेपन से भी प्यार होने लगा
रात भाती नहीं थी मुझको
अब तो उनसे भी प्यार होने लगा
दिन कटे नहीं कटता था
अब तो पलकों में गुजरने लगा
छावं की चाहत होती थी हमेशा
अब तो धुप भी अच्छी लगने लगी
मौसम दिल का क्या बदला
हवा का रुख भी बदलने लगा
चाँद आसमा पर ही अच्छी लगती थी
अब तो जमी पर भी उतारने लगा
रात के सपने डराते थे मुझे
अब तो सपने में भी मजा आने लगा
छुपा लो दिल के किसी कोने में ऐसे
सीप में मोती रम जाती हो जैसे
मेरी चाहत है तेरे दिल की धड़कन बन जाऊं
मैं रहूँ या न रहूँ
पर तेरे दिल की धड़कन में
जिंदा हमेशा रहूँ.

बुधवार, 12 जुलाई 2017

सपनो की मूरत

सपनो में सोया सपनो में खोया
मूरत कब साकार हुई
सूबहो को जब मैं नींद से जागा
आँख उन्ही से चार हुई
परी हो या हो तुम एक मूरत
चाँद सी कोमल
कजरारे है नयन तुम्हारे
मेरा हाल बेहाल हुआ
सपना अब साकार हुआ
छू करके मन शांत हुआ है
जीवन अब आनंद हुआ है
स्वर्ग से उतरी कोई पारी हो
या मेरी आँखों का ब्रम है.
सपनो से इस रंगमहल की
तुम रानी में राजा हू
ख्वाब से तुम साकार हुई
अब सपना फिर मत बन जाना
सूबहो को जब मैं नींद से जागा
धन्य-धन्य मेरे भाग्य हुए
तेरी सूरमयी अंखियो का

जादू अब छाया है मुझपर!

मंगलवार, 11 जुलाई 2017

समर्पण

आपको अर्पण समर्पण
प्रेममय जीवन समर्पण 
लय समर्पण जय समर्पण
हर ख़ुशी हर सांस अर्पण
चाहतो की प्यास अर्पण
जग ही या जीवन समर्पण
आपकी खातिर है अर्पण
हर सूबह हर शाम अर्पण
ख्वाब के दर्पण समर्पण
चाहतों में आपके मैं
कर दू सारा जग समर्पण
गीत का हर लय समर्पण
मीत तुझको ही है अर्पण
प्यारे में सांसे  समर्पण

आपकी की मुस्कान पर तो
चाँद और सूरज समर्पण
जिन्दगी की हर ख़ुशी 
कर दूँ तुझको ही समर्पण 
हर तरफ तेरी ही सांसें 
कर रही अस्पर्स मुझको 
जिंदगी कुछ वक्त दे तो 
वो भी तुमको कर दूँ अर्पण 

सोमवार, 10 जुलाई 2017

पावन धरती

भारत देश हमारा
हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई
सब मिल बैठे एक संग
हिंदुस्तान की धरती ऐसी
पावन पुण्य कर्म हो जैसे
प्रभू अवतार यहाँ लेते है
देव भूमि के नाम से इसकी
चर्चा होती आम
गंगा मैया स्वयं विराजे
नदियों के संगम पर मनता
तीर्थ यह पावन धाम
स्वर्ण आभूषण भरे पड़े है
मंदिर के भी पास
प्यार कि वर्षा धर्म कि चर्चा
गूंजे दशों दिशाओ में
तीर्थों की भरमार यहाँ
हर तीर्थ की छटा निराली
सबकी है फिर कथा निराली
कश्मीर हो या कन्याकुमारी
प्रभू की झलक हर ओर निराली
गोकूल की सडको पर छाए
कृष्णा कृष्णा कृष्णा
बैधनाथ धाम की नगरी में
गूंजे भोले की जयकार
राम की नगरी
अयोध्या नगरी
हिन्दुओ का है पावन धाम