यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

समय

समय की कीमत को
जिसने पहचान लिया
ज़िन्दगी के मर्म को उसने बस जान लिया
हर सुबह एक नया सवेरा लेकर आता है
हर चांदनी रात हमारे लिए कुछ सवाल छोड़ जाती है
जीवन पथ पर सिर्फ चलना ही काफी नहीं
समय के मर्म को गहराई से समझना होगा
समय हँसाता भी है
समय रुलाता भी है
हर किसी की ज़िन्दगी
समय के रथ पर ही सवार है
किसी की नैया बेड़ा पार है तो
किसी की मझदार में ही फंसी है
हर किसी को समय की मार खानी ही पड़ती हैं
कोई उस चक्र को मौन में गुजार देता है
तो किसी की चीख़ पूरी दुनिया सुनती है
फर्क है तो सिर्फ हमारी सोच का
समय का काम है चलना
ये हम पर निर्भर करता है कि
हम उसके साथ चले या
फिर वापस लौट चले.

रविवार, 14 जनवरी 2018

वो

वो न जाने कब बन गई थी
मेरी ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा
साँसों में फूलों की महक बनकर बस गई थी
रातों को सपनो में
दिल को सूरज की गर्मी में
उसका हर रूप अपने आप में अनोखा है
अपने सपने को चंद लम्हों में हमने समेटा है

फूलों सी कोमलता, शहद सी मिठास
भौड़ों सी व्याकुलता
मिट्टी सी खुसबू
हवा जैसी चंचलता
इत्र के जैसी सुगंध
हौसला पहाड़ों सा लेकर
रात्रि की तरह गहन अंधकार में भी
जीवन की राह ढूंढने ने की हिम्मत
चेहरे पे पूर्णमासी के चाँद सी फैली मुस्कुराहट

उसके एहसास ने मुझमें
हर पल असीमित उर्जा का संचार कर दिया है
मुझ जैसे साधारण प्राणी को
एक मुकम्मल इंसान बना दिया.

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

जीवन साथी

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
हर जीत तुम्हारे हाथों में
हर हार तुम्हारे हाथों में

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
तुम ही अब मेरी किस्मत हो
तुमसे जीवन की रौनक है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
परिवार तुम्हारा या मेरा
अब सब कुछ तेरा है अपना
इन अनजानों की बस्ती को
अपनत्व का पाठ पढ़ा देना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
रिश्तों की लाज सदा रखना
हर रिश्ता जीवन ज्योति है
जीवन सुख-दुःख का मोती है

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन के मुश्किल से डरना
या उससे लड़कर
जीवन के पथ पर आगे बढ़ना
है दायित्व तुम्हारा सब अपना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
करबद्ध निवेदन करता हूँ
कितनी भी मुश्किल आ जाए
सब लोग विरोधी हो जाए
पर अपना कर्तव्य निभाना
भूल न तुम साथी जाना

अब सौप दिया हैं जीवन का
हर भार तुम्हारे हाथों में
जीवन तो दर्पण है मेरा
उस दर्पण को पढना सीखो
मुश्किल तो आता-जाता है
पर रिश्ता सदा निभाना है.

सोमवार, 8 जनवरी 2018

नन्ही परी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मन द्वंद्व में फंसता गया
उलझन बड़ी मुश्किल हुई
मैं सोचती जितना रही
उतना उलझता मन गया

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मैं भूलकर उस दृश्य को
हंसने की कोशिश खूब की
पर मन में उलझन अब भी थी
वो दृश्य जैसे मन के दर्पण में
हमें झकझोरती सी कह रही

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मेरी कथा, मेरी व्यथा
तुम सुन सको तो
सुन ज़रा
शुरुआत मेरी भव्यता से पूर्ण है
पर दिल में मेरे दर्द की चुभन है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
डोली मेरी फूलों से सज के आई थी
पर ज़िन्दगी काटों का फैला रण हैं
सबका अपना-अपना आकलन है
पर मेरी चाहत का किसको गम है

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
बराबरी का हक़ मुझ भी चाहिए
मैं ममता की मूरत हूँ
पर पत्थर कब तक खाऊँगी
इन पत्थर के चोटों को मैं
लौटाकर ही जाउंगी

मन की व्यथा
मन की दशा
सब हो गई विपरीत जब
मानवता के रखवालों से
अर्ज हमारी इतनी है
ममता के इस मूरत से
ममता का अधिकार न छीने
जीवन की अनमोल क्षणों को
कीमत से छोटा मत करना

रिश्ते जुड़कर बने अनोखे
तोल-मोल से दूर रहे वो
दो परिवारों को जोरुंगी
हर रिश्ता अपना कर के मैं
एक नया आयाम लिखूंगी.

रविवार, 31 दिसंबर 2017

प्रीत

प्रीत में सब कुछ भुला कर
आप को दिल में बसा लूँ
स्वप्न के मंदिर में अपने 
देवता उनको बना लूँ 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
गीत गा कर के सुना दूँ 
धुन नए अपने बना लूँ 
ज़िन्दगी के फूल को 
राह में उनके सजा दूँ 
प्रीत में उनको समर्पित 
हर ख़ुशी हर गम समर्पित 
हर घड़ी हर क्षण समर्पित 
स्नेह के कण-कण समर्पित 

प्रीत है एक शब्द छोटा 
पर हैं इसका अर्थ विशाल 
न ही इसकी कोई सीमा 
बन्धनों से मुक्त हैं ये 

प्रीत में सब कुछ भुला कर 
नीत नए रिश्ते बना कर 
ज़िन्दगी के राह में
नीत नया सन्देश लेकर
सब को हम बताएँगे.

बुधवार, 27 दिसंबर 2017

ठिठुरता हुआ आम आदमी

दिसंबर की सर्द  रात ऐसी
कि इंसान बर्फ का सीला बन जाए
पर पेट की भूख ऐसी
कि घर से निकलना ही पड़ेगा

ज़िन्दगी में कुछ बेहतर करना हैं
इस ललक ने इतना मजबूर कर दिया
चाँद दूर हैं बहुत फिर भी
इसे अपनी मुट्ठी में भरना है मुझे

ठोकर खाकर भी दौड़ना हैं हमें
गिर कर भी
मंज़िल की ओर कदम बढ़ाना  है हमें
मुमकिन है
कुछ आगे निकल ही जाएंगे

ये सर्द रात इतनी गहरी हैं
कि अपनी पदचाप भी
दिल को डरा रही है
पर हौसला हममें भी कम नहीं

ज़िन्दगी बार-बार हमको रुला रही
हर रिश्ता अग्नि परीक्षा
हमसे ही मांगता है
पर हम हैं कि
इस रात की भाँती
दिल थाम कर बैठे हैं
कुछ ठान कर बैठे हैं
जीवन के दर्द को पहचान कर बैठे हैं!!

रविवार, 26 नवंबर 2017

जीवन एक रंगमंच

होके मायूस ज़िन्दगी से 
यूँ न निराश होइये 
ज़िन्दगी के चिराग का 
आँधियों से सामना 
तो ज़िन्दगी का अटूट हिस्सा है 
अगर मुसीबत में भी 
हौसला बरक़रार रखा तो 
मुसीबतों के आग में तपकर 
कुंदन बनकर निखरोगे 
हम सीखते हैं उलझनों से 
हर ठोकर हमें और मजबूत बनाती हैं 
ज़िन्दगी को जीने का  
एक नया सबक दे जाती हैं 
गैर और अपनों का 
फर्क समझाती हैं 
रिश्तों के डोर को 
और मजबूत बनाती हैं 
जीवन के उतार-चढ़ाव का 
नाम ही ज़िन्दगी हैं 
जब गैरों के दुःख से भी 
आँख में आँसू छलक आए 
जब खुद पर मुसीबत आए तो 
दिल को चट्टान की तरह 
मजबूत बनाकर रखना 
हम सब ज़िन्दगी के रंगमंच पर 
अपना-अपना किरदार निभाने आए हैं 
फिर क्यों न अपने किरदार को 
पुरे मन से निभाए 
ज़िन्दगी के खूसूरत रंगों को 
खूबसूरती से सजाए 
अपने पीछे कुछ यादगार लम्हे
अपनों को दे के जाए।