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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

रविवार, 2 सितंबर 2018

विस्मय

मन विचलित था
राह भ्रमित थी
खोज रहा मेरा मन कुछ था
सोच की उलझन समझ पे भारी
दूरगामी परिणाम का डर था
सत्य कौन है, कौन अधर्मी
इस नाटक के पात्र सभी है
कौन बनेगा हीरो
किसको पात्र मिलेगा विलेन का
हर चरित्र की अपनी लै है
फिर मन में डर क्यों बैठा है
भला-बुरा हम सोच-सोच के
उलझन बड़ी बनाते है
जो भी पात्र हमें मिलता है
क्यों नहीं दिल से निभाते है
ऊपर बैठे निर्देशक ने
हम को जो निर्देश दिए 
हम ने दिल से उसे निभाया 
खुशियों को हमने अपनाया.

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

लम्हा

यूँ सबके सामने आसूओं को छलकाया न करो
दिल के दर्द यूँ सरेआम दिखाया मत करो
गम हज़ार है अपनी ज़िन्दगी में
पर लोगों को अपने पर
तरस खाना का मौका मत दीजिये
ज़िन्दगी का हर लम्हा कीमती है
इसकी कीमत सिर्फ गम से न आंकिए
खुशियाँ हज़ार आकर चली जाती है
हम कुछ नही सीखते
पर गम का एक लम्हा ही
कई सबक दे जाता है
जहाँ दिल से दिल न मिले
वह शब्दों को जाया न कीजिये
शब्द प्रेम में खुशबु, दर्द में मरहम तो
लड़ाई में वाण से भी तीक्ष्ण है
शब्दों के मायाजाल में
खुद को न धकेलिए
आज इस लम्हे में सब तन्हा हैं
शब्द की तन्हाई को कुछ कम न आकिये.

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

सरल सुगम मेरी रचना है

सरल सुगम मेरी रचना है
जीवन तल पर यह सपना है
मन मंदिर सुन्दर सपना है
जीवन ज्योति जलाये रखना

सरल सुगम मेरी रचना है
दीपक-सा जीवन जलता है 
फिर कुछ सुन्दरतम लिखता  है 
कलियों-सी कोमलता मन में 
पुष्प की भाँति खिला है चेहरा 

सरल सुगम मेरी रचना है 
हर उलझन का ओढ़ के चादर 
निर्मल मन फिर कुछ लिखता है 
जीवन क्रम की डोर है उलझी 
लेखनी अपनी सरल सुगम है 

सरल सुगम मेरी रचना है 
हर पल उलझन आती है 
लेखनी बरबस मुस्काती है 
अब क्या कलम टिका पाओगे 
मन की दुविधा रच पाओगे 

सरल सुगम मेरी रचना है 
है क्या कलम में इतनी ताकत 
हर सच्चाई लिख पाओगे 
कठिन डगर है मुश्किल पल है 
वक्त पर इसका ज़ोर नहीं है 
है स्वक्छंद कलम अब अपनी 
हर पल को अब लिख डालेंगे।

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

साईं माता

मुक्ति के प्रदाता
बुद्धि वर दाता
जग में उजियारा कर दो
मेरे साईं माता
हे प्रभु हे, साईं मेरे
जीवन ज्योति दाता
मुक्ति के प्रदाता
बुद्धि वर दाता
मेरे साईं माता

जीवन ज्योति दाता
मेरे साईं माता
प्रेम के प्रदाता
दीन दुखी के तारण हार
हर ख़ुशी के तुम आधार

हे प्रभु मेरे प्राणाधार
कर दे मेरा बेर पार 

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

अन्धविश्वास

दाता के नाम पर
प्रेम के काम पर 
ख़ुशी के इज़हार पर 
सब कुछ लुटा दे 
ऐसे हम भारतवासी हैं 

जीवन तन्हाई में 
अपनों की जुदाई में 
पडोसी से लड़ाई में 
अपना सब कुछ लुटा दे 
ऐसे हम भारतवासी है

एक पत्थर को भी
गलती से भगवान बता दिया
बस क्या है
उसकी पूजा में
लम्बी-लम्बी लाइन लग जाती है

हर कोई नया किस्सा गढ़ लेता है
ज़िन्दगी तन्हा है यहाँ
पर भगवान् के नाम पर
भीड़ का आलम है
हम बार-बार लुटते है
पर संभलते क्यों नहीं.

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

जन-जन तक पहुचाएंगे

जन-जन तक पहुचाएंगे
प्रगति की बयार बहाएंगे
हर घर में उजाला होगा
रोज़गार हर हाथ में होगा

कदम-कदम पे रौनक होगी
हर चेहरे पर खुशियाँ होंगी
जीवन सरल-सुनहरा होगा
खुशियों के बरसात से जैसे
घर-आँगन मुस्कुराएगा

फिर से अपना वही पुराना
भारत वर्ष ले आएँगे
राम-राज्य सा वैभव फिर से
हम लौटा ले आएँगे

गौरवमयी इतिहास हमारा
आज को भी सुन्दरतम सदी का
ताज दिला कर जाएंगे

था भारत महान हमारा
सदा महान कहलाएंगे
इस धरती का पूत्र हमेशा
विश्व गुरु कह लाएगा.

गुरुवार, 7 जून 2018

श्रृंगार प्रकृति का

जतन जतन से
रमन चमन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

नयन नयन से
नयन सपन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

फूल पवन से
वर्षा के जल से
बादल के गर्जन-तर्जन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का

सूरज चंदा के आना से
दिन और रात के विरह मिलन से
करते हम श्रृंगार प्रकृति का.