यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

नारी

नारी सृजन, नारी अमन
नारी ही लिखती है सदा
हर विनाश की पटकथा
नारी वो गूढ़ तत्त्व है
नारी वो उलझा सत्य है
जिसको समझना व्यर्थ है
जितना समझना चाहते
उतना उलझते जा रहे

नारी सृजन, नारी अमन
नारी है उपवन की महक
आती पवन की झोकों सी
खुशियों का दामन थाम कर
खुद दुखी रह कर भी
खुशियां बिखेरती है सदा

नारी सृजन, नारी अमन
नारी है रिश्तों का चमन
चाहे हो नन्ही बेटियां
या हो दादी अम्मा घर की
हर रूप में अपनी जगह
है प्रेम सागर सा भरा

नारी सृजन, नारी अमन
नारी सुनहरी धुप है
नारी वो चंचल छाँव है
जिसके तले जो बैठता
दामन हो खुशियों से भरा

नारी सृजन, नारी अमन
नारी अमर वो प्रेम है
जिसकी कथाएँ हर सदी में
लिखती इबारत है नयी

नारी सृजन, नारी अमन
नारी मिलन में मीत है
नारी विरह का गीत है
नारी नयन में नीर है
नारी हृदय में धड़कनो में

नारी सृजन, नारी अमन
जीवन के हर कण में नारी
जीवन के धड़कन में नारी
जीवन के हर छण में नारी
नारी की सीमा अन्नत है
नारी की महिमा अन्नत है। 

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

जीवन की डोर

सदा निरंतन हरि गुण गाओ
साईं के चरणों में शीष नवाओ
प्रेम भक्ति की ज्योत जलाओ
मानव सेवा धर्म बनाओ

सदा निरंतन हरि गुण गाओ
साईं के चरणों में शीष नवाओ
अधिकारों और कर्तव्यों में
ताल-मेल तुम सदा बिठाओं
धैर्य साथ लो, कर्म हाथ लो
खुद का जीवन पुण्य बना लो

सदा निरंतन हरि गुण गाओ
साईं के चरणों में शीष नवाओ
सदाचार सदभाव बनाओ 
सत्य अहिंसा धर्म बनाओ
मार्ग सत्य का सदा अपनाओ

सदा निरंतन हरि गुण गाओ
साईं के चरणों में शीष नवाओ।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

पति-पत्नी संवाद

प्रियतम मेरा जीवन क्या है 
एक कोरा सा पन्ना 
इतने वर्षों में  तुमने क्या 
मुझे कभी जाना है 
मेरे मन को क्या भाता है 
मेरा दिल क्या चाहे 

प्रियतम मेरा जीवन क्या है 
एक कोरा सा पन्ना 
छोड़ मैं अपने घर को आयी 
भाई-बहन माँ-बाप सभी को 
घर का कोना-कोना मुझसे 
कितना प्यार किया करता था 
गली-मोहल्ले वाले भी सब 
मुझको याद किया करते है 

प्रियतम मेरा जीवन क्या है 
एक कोरा सा पन्ना 
जीवन के कितने वसंत तो 
हम-तुम साथ रहे है 
फिर भी यादों में वो गलियां 
आज भी घुमा करती हूँ 
वो बचपन की यादें मेरी 
संग-संग मेरे चलती है 

प्रियतम मेरा-तेरा जीवन  
जैसे दीप और बाती 
प्रियतम तुमने सही कहा है 
जब तुमने अपना घर छोड़ा 
एक नया संसार बसाया 
नए-नए रिश्तों के संग 
ताल-मेल तुमने बैठाया 

प्रियतम मेरा-तेरा जीवन  
जैसे दीप और बाती  
अनजाने लोगों के बीच 
तुमने अपना संसार बसाया 
बिटियाँ से बहुरानी बन कर 
मेरे घर का मान बढ़ाया 

प्रियतम मेरा-तेरा जीवन  
जैसे दीप और बाती 
मेरे घर नन्ही गुड़िया ला 
सौगात मुझे अनमोल दिया 
अब हम मम्मी-पापा बनकर 
नए-नए करतब करते है 
गुड़ियाँ के आँखों की खुशियां 
अपनी आँखों में भरते है 
गुड़ियाँ की किलकारी सुन कर 
जब पूरा घर खिल उठता है
हम भी खुशियों से भर कर 
अपनी खुशियों को जी लेते है। 

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

प्रकृति की गोद में

कही धूंध थी, कही ठिठुरन थी
कही बर्फ था, कही ओस की कुछ बूंदे थी
हर तरफ मौसम में
एक अजीब सी उलझन थी
कुछ पौधे सीना तान कर
मौसम से लड़ रहे थे
कुछ ने तो जैसे
अपनी साँसे ही थाम ली थी

कही धूंध थी, कही ठिठुरन थी
हर तरफ धरती
सफ़ेद चादर में लिपटी थी
प्रकृति का अद्भुत दृश्य
मन को प्रफुल्लित कर रहा था
मन खिडकियां और दरवाजें खोल कर
उड़ने को कर रहा था

कही धूंध थी, कही ठिठुरन थी
मन मचल रहा था
जैसे कह रहा हो
देर क्यों करते हो
बढ़ चलो शामिल हो जाओ
उन खूबसूरत चिड़ियों के झूंड में
जिन्हें डर नहीं होता किसी अनहोनी का
जिन्हें भय नहीं होता जीने और मरने का

कही धूंध थी, कही ठिठुरन थी
तुम भी जी लो जीवन के कुछ क्षण
उलझन से दूर प्रकृति की गोद में
कही धूंध थी, कही ठिठुरन थी
जहां तक नज़रे जाती
हर्फ़ तरफ बर्फ ही बर्फ था। 

शनिवार, 11 जनवरी 2020

गीले शिकवे

देश अपना है लोग अपने है
फिर क्यों गिला है आपको
देश तरक्की कर रहा है
विकास के नीत नयी
सीढ़ियां चढ़ रहा है
आज तक हम कागज़ों में उलझे थे
आम आदमी को हर जगह
कागज़ों की ही उलझन होती है
आम आदमी हर समय
कागज़ों के नाम पर ही लुटता हैं

देश अपना है लोग अपने है
फिर क्यों गिला है आपको
हम डिजिटल युग में कदम बढ़ा रहे है
हमें भी अपनी अलग पहचान बनानी है
नीत नए मिलने वाले ठेकेदारों को
अपनी पहचान बनानी है

देश अपना है लोग अपने है
फिर क्यों गिला है आपको
देश की खुशियों से क्या बैर है आपको
अमन और चैन को यू ना जलाइए
किसी मासूम को इतना मत तड़पाइए
देश आगे बढ़ रहा है
आप भी खुशियां मनाइये।

बुधवार, 8 जनवरी 2020

सियासी खेल

सी.ए.ए. के नाम पर
सेक रहे सब रोटियां
आमजन को डरा-डरा कर
मतलब अपना साधना
सदियों से इस देश में
खेल है सब चल रहा

कभी किसानो को डरा कर
दंगल करवाते है उनसे
तोह कभी मासूम बच्चों को
अपना हतियार बनाते है

इनको नहीं परवाह मेरी
ये सियासतदान है बस
इनकी सियासी रोटियां
रंगी हमारे खून से 
देश की स्थिरता से
इनका नहीं कोई वास्ता

जिन गरीबों की वकालत
करते नहीं ये थक रहे है
उनको गरीबी का सितम
उपहार में इनसे मिला है

आजादी के 70 साल
काट लिए हम बेगानो से
हम भारत के वासी है
ये तय करना अभी भी बाकी है

हमने जब झकझोर के इनको
सत्ता से बाहर पहुंचाया
एक-एक कर इनकी गलती
बरबस इनको याद दिलाया
फिर भी  इनकी हिम्मत देखो
रोज़ नए पैतरों के संग
आ जाते हम सब के बीच

अफवाहों की चिंगारी से
देश जलाना चाह रहे है
देश गरीबों का हैं भारत
ये बतलाना चाह रहे हैं
वो भूल गए है यह धरती
देवों की धरती कहलाती है
इसका अस्तित्व मिटाने वालों का
वो हश्र देखना भूल गए है
मुट्ठी भर लोगों को भटकाकर
वो देश चलाना चाह रहे है

ये देश निरंतर बदलावों को
झेल-झेल कर
कितने फिरंगियों के खूनो से
खेल-खेल कर
अपनी तक़दीर बनता आया है
अपनी तहजीब बचाता आया है। 

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

चाँद के तले

शाम जब ढले, चाँद के तले
एक जहां बसाएंगे
मिलके हम और तुम
शीतलता चाँद सी
हो हमारे बीच
सुंदरता चाँद सा
तुमको हैं मिला
तुमसे मिलके चेहरे मेरे
खुशियों से खिले।

शाम जब ढले, चाँद के तले
एक जहां बसाएंगे
मिलके हम और तुम
खो गयी ख़ुशी जहां से
खो गया चैनो अमन
हर तरफ हैं भागम-भाग
छा गयी माहौल में
बेचैनियाँ है हर तरफ
फिर भी मेरा वादा तुमसे
लाएंगे हम ढूंढ कर
खुशियों के पल चून कर।

शाम जब ढले, चाँद के तले
एक जहां बसाएंगे
मिलके हम और तुम
चाहें कितनी ज़िन्दगी में
हो अंबार मुश्किलों का
मुश्किलों के बीच भी
खुशियां तलाश लेंगे हम
धुंध चाहे कितनी हो
राहे तलाश लेंगे हम
मिलकर फतह
हर मुश्किलों पर
दर्ज हम कराएंगे
प्रेम और खुशियों का मंदिर
घर को हम बनाएंगे।

शाम जब ढले, चाँद के तले
एक जहां बसाएंगे
मिलके हम और तुम।