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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

मंगलवार, 18 सितंबर 2018

दुनियावालों

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
हाइफा के समुद्र तट पर
दो वीर सपूत के
पानी के साथ करते अठखेलियों को
देख रहा है विश्व ध्यान से
क्या यह है संकेत मिलन का
या फिर आने वाली कोई क़यामत है

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
यूँ नहीं दौड़ लगा रहे दुनिया के
वह तो भीष्मपितामह है
दाढ़ी पक गयी बाल पक गए
फिर भी जोश जवानों सा

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
यह देश चल पड़ा प्रगति की राह पर
अब यह नहीं रुकने वाला है

सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों
इतिहास करवट लेने वाला है
तुम जोर लगा लो लाख मगर
अब हमें नहीं पीछे मुड़ना है
हैं साथ हमारे भीष्मपितामह
हैं नहीं किसी का डर हमको.

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

अवलोकन

जीवन पथ है, ढुलमुल रथ है
पथ पर कंकड़ ढेर मिलेंगे
जीवन पर्याप्त वहन करना
बस मंद गति चलते रहना
खाना-पीना-सोना-जगना
जल-सा चंचल बहते रहना

जीवन पथ है, ढुलमुल रथ है
कांच-सा कोमल तन-मन मेरा 
ठोकर की भरमार यहाँ है 
प्रेम-द्वेष और विरह मिलन का 
संगम हैं संसार ये मेरा 

जीवन पथ है, ढुलमुल रथ है 
धुप-छांव से आते जाते 
सुख-दुःख का संगम जीवन है 
आपा-धापी होड़ लगी है 
सबको पीछे छोड़ चले हम 
नियति की गति तोड़ चले हम
खुद से खुद को भूल चले हम.

सोमवार, 3 सितंबर 2018

तुम बिन जीना सिख रही हूँ

तुम बिन जीना सिख रही हूँ
गम को पीना सिख रही हूँ
जब मैं निकलू घर से बाहर
नभ में तुमको ढूंढ रही हूँ
अब तो तुम को पाना मुश्किल
पाकर खोना सिख रही हूँ

तुम बिन जीना सिख रही हूँ 
गम को पीना सिख रही हूँ
तन्हाई के बादल भी अब
मुझसे बाते करते है
मेरी पलके ढूंढे तुमको
भीड़ भरे चौराहों पर

चिड़ियों के कलरव के संग-संग
मैं तो गाना सिख गयी हूँ
दिन चढ़ते ही दुनिया के संग
मैं अब लड़ना सिख गयी हूँ
तुम बिन जीना सिख रही हूँ 
गम को पीना सिख रही हूँ

भूल परायो-अपनों का गम
जीवन जीना सिख गयी हूँ
मौसम आये जाए कोई
आंसू पीना सिख गयी हूँ
तुम बिन जीना सिख गयी हूँ
गम को पीना सिख गयी हूँ.

रविवार, 2 सितंबर 2018

विस्मय

मन विचलित था
राह भ्रमित थी
खोज रहा मेरा मन कुछ था
सोच की उलझन समझ पे भारी
दूरगामी परिणाम का डर था
सत्य कौन है, कौन अधर्मी
इस नाटक के पात्र सभी है
कौन बनेगा हीरो
किसको पात्र मिलेगा विलेन का
हर चरित्र की अपनी लै है
फिर मन में डर क्यों बैठा है
भला-बुरा हम सोच-सोच के
उलझन बड़ी बनाते है
जो भी पात्र हमें मिलता है
क्यों नहीं दिल से निभाते है
ऊपर बैठे निर्देशक ने
हम को जो निर्देश दिए 
हम ने दिल से उसे निभाया 
खुशियों को हमने अपनाया.

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

लम्हा

यूँ सबके सामने आसूओं को छलकाया न करो
दिल के दर्द यूँ सरेआम दिखाया मत करो
गम हज़ार है अपनी ज़िन्दगी में
पर लोगों को अपने पर
तरस खाना का मौका मत दीजिये
ज़िन्दगी का हर लम्हा कीमती है
इसकी कीमत सिर्फ गम से न आंकिए
खुशियाँ हज़ार आकर चली जाती है
हम कुछ नही सीखते
पर गम का एक लम्हा ही
कई सबक दे जाता है
जहाँ दिल से दिल न मिले
वह शब्दों को जाया न कीजिये
शब्द प्रेम में खुशबु, दर्द में मरहम तो
लड़ाई में वाण से भी तीक्ष्ण है
शब्दों के मायाजाल में
खुद को न धकेलिए
आज इस लम्हे में सब तन्हा हैं
शब्द की तन्हाई को कुछ कम न आकिये.

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

सरल सुगम मेरी रचना है

सरल सुगम मेरी रचना है
जीवन तल पर यह सपना है
मन मंदिर सुन्दर सपना है
जीवन ज्योति जलाये रखना

सरल सुगम मेरी रचना है
दीपक-सा जीवन जलता है 
फिर कुछ सुन्दरतम लिखता  है 
कलियों-सी कोमलता मन में 
पुष्प की भाँति खिला है चेहरा 

सरल सुगम मेरी रचना है 
हर उलझन का ओढ़ के चादर 
निर्मल मन फिर कुछ लिखता है 
जीवन क्रम की डोर है उलझी 
लेखनी अपनी सरल सुगम है 

सरल सुगम मेरी रचना है 
हर पल उलझन आती है 
लेखनी बरबस मुस्काती है 
अब क्या कलम टिका पाओगे 
मन की दुविधा रच पाओगे 

सरल सुगम मेरी रचना है 
है क्या कलम में इतनी ताकत 
हर सच्चाई लिख पाओगे 
कठिन डगर है मुश्किल पल है 
वक्त पर इसका ज़ोर नहीं है 
है स्वक्छंद कलम अब अपनी 
हर पल को अब लिख डालेंगे।

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

साईं माता

मुक्ति के प्रदाता
बुद्धि वर दाता
जग में उजियारा कर दो
मेरे साईं माता
हे प्रभु हे, साईं मेरे
जीवन ज्योति दाता
मुक्ति के प्रदाता
बुद्धि वर दाता
मेरे साईं माता

जीवन ज्योति दाता
मेरे साईं माता
प्रेम के प्रदाता
दीन दुखी के तारण हार
हर ख़ुशी के तुम आधार

हे प्रभु मेरे प्राणाधार
कर दे मेरा बेर पार