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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

गुरुवार, 29 अप्रैल 2021

जीवन की डूबती सांसे

जीवन कितनी ठोकर मारे
फिर भी हमको चलना होगा
चाहे बाधाएं कितनी आये 

छाये प्रलय की घोर  घटा पर 
सांस थामकर चलना होगा 

जीवन के हर कड़वे घूंट को 
हृदय थामकर पीना होगा 

घोर प्रलय की इस बेला को 
ह्रदय थामकर सहना होगा 

हर ओर मची इस क्रंदन को 
भर नयन नीर में बहना होगा 

माँ के ममता के आँचल को भी 
इस करुण पलों को सहना होगा 

घर टूटे कितने बिखर गए 
कितने अपनों से बिछड़ गए 

है आस अभी बांकी अब तो 
हे दयानिधि कुछ कृपा करो 

हम सांस थामकर बैठे हैं 
इसमें अब बाधा और न दो 

है बहुत हुआ अब और नहीं 
जीवन धारा निर्बाध करो 

हे प्रभु आप हो देख रहे 
तो जीवन नैया पार करो

सब ताक रहे हैं आस प्रभु 
अब और नहीं तुम मौन धरो।   

बुधवार, 28 अप्रैल 2021

अपशब्द

शब्द गढ़कर तो देखो
मुश्किल आएगी जरूर

अपशब्द बड़ा सरल होता है 
अपनेआप मुँह से निकल जाता है 

शब्द चंचल शब्द निर्मल होता है 
शब्द कोमल होता है 

शब्द की सीमा होती है 
शब्द की मर्यादा होती है 

पर अपशब्द तो हमेशा से सीमाहीन
 दिशाहीन और मर्यादाहीन रहा है 

अपशब्द की खातिर रिश्ते 
हरदम टूटा करते हैं 

शब्दों के कुछ मधुर तर्क से 
टूटे रिश्ते जुड़ जाते हैं 

अपशब्दों को छोड़ हे मानुष 
शब्दों की मर्यादा जानों 

शब्द ख़ुशी है शब्द प्रेम है 
शब्द हमारी अभिब्यक्ति।




गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

अपयश

यश की आशा करते - करते
कब अपयश मिल जाता है

खुशियाँ सबको बाँट-बाँट कर 
खुद का नयन भिगोता है 

मीठी बोली बोल-बोल कर 
सबके ताने पाता है 

सबको अपना कहते-कहते 
बैर सभी का पाता है 

कलयुग की यह दशा देखकर 
हमको रोना आता है 

ठगने का जो काम है करता 
सबका प्यारा होता है 

पर सच्ची बातों से परिचय 
सबका जो करवाता है 

दूर अकेले कालखंड में 
खड़ा सदा रह जाता है. 

शनिवार, 27 मार्च 2021

मानव जीवन

मानव का जीवन है रहस्य
मानवता उसका जटिल प्रेम
खुशियाँ फूलों का उपवन है
जिसमे चुभते काटें हजार

बचपन अनमोल खजाना है 
खुशियों का ताना-बाना है 
है रोज उम्र बढ़ती जाती 
खुशियाँ पीछे छूटती जाती 

मानव का जीवन है रहस्य
मानवता उसका जटिल प्रेम
जीवन में रोज नई उलझन 
कल होगा क्या यह ज्ञात नहीं 

उलझन कोई उलझाएगा 
या देकर कोई नया लक्ष्य 
रुके हुए इस जीवन को 
कोई गति नई मिल जायेगी 

हर रोज परीक्षा देनी है 
हर रोज प्रश्न सुलझाना है 
गम के और ख़ुशी के आँसू 
दोनों का आनंद उठाना 

बढ़ते उम्र की बढ़ती उलझन 
बढ़ा दायरा काम का 
जीवन के हर मोड़ से परिचय 
वक़्त हमें करवाता है 

जीवन की हर गुत्थी  को
 वक़्त ही सुलझाता है.   

मंगलवार, 16 मार्च 2021

अब्यक्त

बनना नहीं भीड़ का हिस्सा
मैं तो पथिक अकेला हूँ

राग-द्धेष  से दूर कहिं 
मैं चंचल हवा सलोना हूँ 

रूक-रूक कर जीवन जीना 
है आता नहीं मुझे 

गिर-गिर कर ठोकर खाकर 
जख्मों को दोस्त बनाकरके 

गिरना भी है उठना भी है 
पर करना सदा नया कुछ है 

जीवन को मोड़ नया देकर 
गढ़ना संकल्प नया मुझको 

कुछ अलग करें कुछ खास करें 
है वक़्त हमें अनमोल मिला 

है धूप-छाँव गर्मी-सर्दी 
जैसे मौसम के साइन में 

रोना-गाना  खोना-पाना 
सब है जीवन के हिस्से में 

है आज वक़्त मुश्किल फिर भी 
जीवन को रोक नहीं सकते 

बुधवार, 10 मार्च 2021

अधूरा सपना

कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं
दूर क्षितिज में बस जाते हैं
जब हम जाते पार चाँद के 
तभी हमें फिर याद आते हैं

कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं
जीवन से कुछ कह जाते हैं 
सोते-सोते तड़पाते हैं 
जगने पर फिर याद आते हैं 

कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं
बरबस नयन भिगो जाते हैं 
चाँद पलों में सफ़र मील का 
यादों में हम तय कर जाते 

कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं
कुछ  बिछड़े कुछ मिल जाते हैं 
नए- नये सपने गढ़ते हैं 
कुछ पाते कुछ खो जाते हैं 

चलों आज यह भेद मिटा दें 
कोई है अपना कोई पराया 
मन से ऐसा वहम  हटा दें 

जो सपने हमने पाले थे 
क्यों नहीं उनको आज मिटा दें 
जो मिला हमें वह अपना था 
जो टूट गया वह सपना था।  



 


गुरुवार, 4 मार्च 2021

अपना घर

दरवाजे पर बैठा पप्पू
अपने धुन में रमा हुआ

कभी घूरता अपने घर को 
कभी सामने सड़कों को 

आते जाते लोग मगन थे 
अपने घर की यादों में 

पप्पू बैठा सोंच रहा था 
अपना भी एक घर होगा 

जहाँ न कोई खिट -खिट  पिट-पिट
ना कोई अनबन होगी 

अपनी मर्जी अपने नियम 
सब अपना-अपना सा होगा 

पता बदलने की उलझन से 
हमें निजात फिर मिल जायेगा 

तुम हो बाहर वाले ऐसा 
कोई नहीं फिर कह पायेगा

अपना घर अपनी पहचान 
पप्पू को भी मिल जायेगा