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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

अम्बे माँ

 हे माँ मैं हूँ भक्त तुम्हारी 

मुझ पर तुम ये दया दिखा दो 

रोज़ नए उलझन में पड़कर 

मन उलझा रहता है

द्वार तुम्हारे आने को माँ 

व्याकुल मन रहता है। 


कृपा तुम्हारी कब होगी माँ 

हंसी-ख़ुशी दर्शन पाने को 

माँ मैं दौड़ी आऊंगी 

मुझे प्यार से गले लगाकर 

माँ तुम प्यार लुटाओगी 


हे माँ मेरी अम्बे माता 

जग का दुःख हरने वाली 

अपने दर पर इस बेटी की 

झोली कब भर पाओगी 

बाट जोहती माँ मैं तेरी 

वर्षो से बैठी हूँ माँ 


हे माँ मैं हूँ भक्त तुम्हारी 

मुझ पर प्यार लुटाओ माँ 

हमको जग ने ठुकराया पर 

तुम भी ना ठुकराओ माँ। 

शुक्रवार, 17 नवंबर 2023

सुनहरे पल

 तुम प्रेम हो तुम गीत हो 

चाहत के तुम तो मीत हो 

तुम नित नए संगीत हो 

तुम फूल हो तुम हो कली

तुम ही तो खुशबू रंग हो 

हर ओर फैली वादियों में 

जल की कल-कल धार हो 

तुम मेरी शीतल छाँव हो 

तुम हो ख़ुशी तुम गीत हो 

तुम ही तो मेरे मीत हो।  

सोमवार, 13 नवंबर 2023

सफ़रनामा

सब झूठे रिश्ते नाते हैं  

सब दिल रखने की बाते हैं 

कब कौन किसी का होता है  

सब असली रूप छिपाते हैं 

एहसास से खाली लोग यहाँ 

शब्दों के तीर चलाते हैं  

अपनों का विश्वास तोड़  

गैरो पर प्यार लुटाते हैं  

दिल में भरकर तूफ़ान यहाँ 

चेहरे पर हँसी दिखलाते हैं  

सब रहते है अब मौन साध 

अपनों से दुरी बनाते हैं  

थे खुशियों के रंग जहाँ

ग़म आज वहाँ इतराती हैं 

सब झूठे रिश्ते नाते हैं  

सब दिल रखने की बाते हैं। 

बुधवार, 9 मार्च 2022

पंख लगा दो

मुझको कोई पंख लगा दो
मैं उड़  जाऊ दूर गगन में 
घूम फिर खुशियों की झोली 
मैं भरकर सब साथ ले आऊ 

देखो चंचल हवा सलोना 
चिड़िया कलरव करती प्यारी 
दूर गगन में सूरज दादा 
मंद-मंद मुस्काते रहते 

देखो पार्क में झूलते बच्चे 
दादा-दादी घूम रहे हैं 
माताएं बैठी मुस्काती 
सपनों को  है पंख लगाती 

अलग अलग टोली में देखो 
अलग अलग चेहरों के रंग 
कोई झूम रहा खुशियों में 
कोई बैठा मौन साध कर 


 

सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

साँझ ढले

जब साँझ के प्रहार में कुछ याद आ रहा था
वो याद धुंधला सा मुझको बता रहा था
था घर कोई हमारा मुझको दिखा रहा था 
अपनों कि याद जिसमे धुंधली सी हो गई थी 
तन्हा खड़ी अकेली मैं मौन हो चली थी 
किससे लडूं मैं किसको अनदेखा कर चलूँ 
कहने को सब है अपने  बेगानों की झलक में 
उलझन के बीच मेरी ख़ामोशी कह रही है 
थे तब भी तुम अकेले हो आज भी अकेले 
है फर्क सिर्फ इतना तब भीड़ में खड़े थे 
अब तन्हा हो चले हो . 

शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2021

वतन

 है तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

कर गया कोई हमें नामजद साथियों 

सांस् अटकी यहां प्रेम से साथियों 

कर हवाले तुम्हारे  वतन साथियों 

वक़्त मुश्किल कटा हाथ सबका छुटा 

हो गए अजनबी हम तो अब साथियों 

कर चले हम फिदा जानतन साथियों 

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

वतन की शान बनाए रखना 

मिटना पड़े तो मिटों साथियों 

देश झुकने न देना कभी साथियों 

देश मिटने न देना कभी साथियों 

खून से सींच कर जो आजादी मिली 

मान  उसका हमेशा करों साथियों 

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

कर चले हम फिदा जानतन साथियों.


गुरुवार, 26 अगस्त 2021

राखी

आया राखी का त्योहार
गली-गली में खुली दुकाने
सज गई सब पर रेशमी राखी 
रन-बिरंगी प्यारी-प्यारी 
मन को मोह रही है राखी

आया राखी का त्योहार
बहना बोली भैया आओ 
राखी का त्योहार मनाये
मिल-जुल कर हम ख़ुशी-ख़ुशी 
सबका मुहं मिठा करवाए 

आया राखी का त्योहार
बहने सजी-धजी बैठी हैं 
राह देखती भाई का 
थाल सजा कर रखा है
रंग-बिरंगी राखी से.