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कठिन वक्त है  कठिन घड़ी है  कठिन राह पर चलकर हमको  मंज़िल अपनी पानी है  अपनी अदा जो उत्तम हो  वह करके दिखलाना है कुछ लोगो से सिख सके तो  कुछ उ...

सोमवार, 22 जून 2020

गिरना - संभलना

गिरना भी अच्छा 
गिरकर सम्भलना भी अच्छा 
संभलकर चलना है सीखा 
मुसीबतों के दौर में ही 
अपनों की पहचान होती है 
जब वक़्त आता है बुड़ा 
तभी अपनों और परायों में 
फर्क समझ आता है 
गिरकर ही सीखते है हम 
सम्भलकर -सम्भलकर चलना 
जिंदगी हर कदम 
एक नया सबक दे जाती है
 कब कौन कहाँ किसको 
मंजिल मिल जाती है 
थककर न कभी रूकना 
चलना है निरंतर चलना 
गम और ख़ुशी की 
हर दौर से है गुजरना 
जिंदगी की जंग को 
हर हाल में है जीतना। 

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