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हे प्रियतम तुम रूठी क्यों  है कठिन बहुत पीड़ा सहना  इस कठिन घड़ी से जो गुज़रा  निःशब्द अश्रु धारा बनकर  मन की पीड़ा बह निकली तब  है शब्द कहाँ कु...

मंगलवार, 30 जून 2020

बेटियाँ

 
 
उजड़े हुए चमन बसाती है बेटियाँ 
जीवन का हर सार सिखाती है बेटियाँ 
मुरझाये चेहरों पर मुस्कान ले आती है बेटियाँ 
माँ -बाप  के दिलों में बस जाती है बेटियाँ
हर सुने आँखों में ख्वाब दे जाती है बेटियाँ 
बेटियाँ सृजन है श्रृंगार है प्रकृति की 
सरस्वती के बीणा की तार है बेटियाँ 
हर घर में गूंजती हुई संगीत है बेटियाँ 
हर घर में प्रेम की बरसात है बेटियाँ 
माँ - बाप के अरमानों की ताज है बेटियाँ 






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