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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

अँधेरी रात

अँधेरी रात की सुबह कब आएगी
दर्द के बाद ख़ुशी का सूरज कब दिखलाएगी
अँधेरी रात ने जब चारों ओर से घेरा हमें
हमने रौशनी से अंधेरे को
हराने की कसम खायी तब
इस हौसले को तब-तक बनाए रखना है
जब तक अँधेरी रात हार न जाए
हमारे हौसले के हाथों
दोस्तों अँधेरी रात को दीवाली
के दिए से जगमगा दो
अपने हौसले को इतना बुलंद रखो

कि अपनी जिंदगी से हर अँधेरे को भगा दो!

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

माँ सरस्वती

हे माँ वर दे वीणावादिनी!
कर में कलम, वाणी में मिठास
कल्पना में पूरा संसार
मन में परिवर्तन का एहसास
दिल में हो सुकून और शान्ति
लिख दूँ मैं सारा संसार
मेरे हाथों में इतनी शक्ति दे दो
जला दूँ हर दिल में प्रेम की ज्योति
मेरी लेखनी में इतनी ताकत भर दो
इस वर्ष कलम को इतनी ताकत दे दो
कि तलवार की हर चाल विफल हो जाए
इस देश की आवो हवा को
ख़ुशियों से भर दो
हर बच्चा कलम की ताकत जान ले
उसमे इतना जान भर दो

बस इतना वर दो हे माँ वीणावादिनी!

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

सुबह

सुबह सवेरे जब उठ बैठे
पूरे दिन का दर्पण बनकर
सूर्य देवता दर्शन देते
हंसी ख़ुशी दिन कि शुरुआत
करने का पैगाम हैं देते
मधुर-मधुर मुस्कान से उनके
रोम-रोम पुलकित हो उठता
पर हर दिन कि दिनचर्या में
माँ की डांट ज़रूरी
कितनी जल्दी उठ जाओ पर
फिर भी माँ हैं कहती
रोज़ लेट तुम उठते हो
मेरी कभी न सुनते हो
सूर्य देवता तुम आने में
थोड़ी देर तो कर दो
माँ कि विनती तुम सुनते हो
मेरी भी तो सुन लो
हम बच्चे हैं भोले-भाले
सीधे सच्चे मन के अच्छे
पर हम तो बस आपकी ख़ातिर
रोज़ डांट है खाते
हर दिन तो तुम वक्त पे आना
पर सन्डे को लेट हो जाना
हम इतना बस चाहे
पर माँ के डर से हम बच्चे

कभी बोल न पाते!

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

अबतक...

सुख-दुःख के मधुर मिलन में
हम भूल गए जीवन में
जीवन ग़म और ख़ुशी में
गैरों-अपनों के भ्रम में
कभी चाहत में अन-बन में!

सुख-दुःख के मधुर मिलन में
जीवन भर के इस रण में
कभी हार तो कभी विजय के क्षण में
अपनों के विरह मिलन में
हर पल पाने खोने के डर में!
 
सुख-दुःख के मधुर मिलन में
चलने-रुकने के क्रम में
आगे बढ़ने के क्रम में
बस होड़ लगी है रण में
सब छोड़-छाड़ के क्षण में!

सुख-दुःख के मधुर मिलन में
पहुंचे जब प्रभु शरण में
भर आँख मेरी तब आई
क्यों भागम-भाग के क्रम में
सब कुछ पाने के क्रम में!

सुख-दुःख के मधुर मिलन में
रह गए अधूरे जीवन में
मानव सेवा के प्रण में
सुख-दुःख के मधुर मिलन में

रह गए अकेले रण में!

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

सत्य

सत्य क्या है?
कोई सपना, कोई कहानी
या पिता से पुत्र को मिली हुई धरोहर
या अपने अंतर्मन की आवाज़
सत्य सागर है, हमारे अंतर्मन
का वो सागर है
जिसे जितना भर दो,
फिर भी जगह खाली है!

सत्य हमारे समाज की नींव हैं
जिसे जितना सींचो
समाज का विकास उतना ही अधिक होगा
सत्य डर का नहीं, साहस का नाम है
सत्य हार का नही, जीत का नाम है
सत्य गैरों के लिए नहीं,
अपनों का पैगाम है
जिसने इसे पढ़ लिया

जीवन सचमुच उसका धन्य हैं!

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

जीवन

जीवन एक सागर है
जिसकी गहराई की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती हैं
नापने का कोई पैमाना नहीं
जानने का कोई मंत्र नहीं
हर कोई सिर्फ कोड़ी कल्पना ही कर सकता है
जीवन का पूरा सच क्या हैं?
यह कोई नहीं बता सकता
हम सब उस नाटक के पात्र हैं
जिसकी डोर सिर्फ और सिर्फ
उस प्रभु के हाथों में है
जिन्हें हम सब बस कल्पना में ही महसूस कर सकते हैं
जीवन हर पल को जी भर कर जी लेने का नाम है
जीवन चलना और सिर्फ चलते रहने का नाम है
जीवन सबको ख़ुशियाँ बाँटने का नाम है
जीवन सुख और दुःख का एक ऐसा दरिया हैं
जिसे हँस के गुजारों तो आसान 
नहीं तो पहाड़ 
लेकिन गुजारना तो है और 
यही जीवन का सत्य है!

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

एक लड़की

एक लड़की छोटी नन्ही-सी
वो थोड़ी भोली-भाली सी!

आँखों में सपने उसके
हैं चाँद और तारे जैसे
हैं चाहत उसकी हर पल
ढेरों सारी ख़ुशियों की


रहती है मस्त मगन में
कुछ सोच में या उलझन में
करना है कुछ भी अच्छा
पर करना क्या हैं उसको
है करना जो भी उसको
पर करना है बस अच्छा

मंज़िल मुट्ठी में होगी
हैं साहस उसमें उतनी
सपनों में रंग है इतने
कि इन्द्रधनुष बन जाए

चाहत है उसकी इतनी
कि जब मंज़िल पे पहुँचे
तो एक मकाम बन जाए
जिस मकाम को पाने कि
हर लड़की सपना पाले

एक लड़की छोटी नन्ही-सी
वो थोड़ी भोली-भाली सी!!