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जीना सीखा

तील-तील जलकर जीना सीखा  अपनों से कुछ कहना सीखा  हँसना सीखा, रोना सीखा  हर गम को अब पीना सीखा  धूप - छाँव को सहना सीखा  नरम - गरम और ऊंच - नी...

शनिवार, 11 मई 2019

कल आज और कल

इन्ही रातों के दामन से सुनहरा
कल भी निकलेगा
ज़िन्दगी जीने के लिए मिली है
रोने  के लिए नहीं
उसे समझने में वक्त ज़ाया मत करो
सुन्दर सपनो का वक्त गुज़र जायेगा
अब तो बचपन से छूटे है
जवानी का दौर हैं 
आँखों में उमंग है
सपनो का तरंग हैं
अपने पास कुछ हो न हो
तुम मेरे साथ हो और मैं तुम्हारे
साथ हूँ
और हमें क्या चाहिए
आज हर तरफ महंगाई और मुफलिसी का
आलम है
खनखनाती सिक्को के इस दौर में
हाथ खाली हैं हमारे
हम अपने जज़्बातों को जोड़कर
पन्नों पर उतार तो दे
पर इन्हे लोगों तक पहुंचाएं कैसे
हर काम के लिए पैसो की ज़रुरत होती है
बगैर पैसे उन ज़रूरतों को निभाऊं कैसे
जज़्बात दिल में भरे पड़े हैं
पर खाली पेट उनको जुबां तक लाऊँ कैसे
वक्त बीतता गया उम्र ढलती गयी
अब तो चांदनी रात भी हमको
डराती है
अपने सुनहरे सपनो को जगाऊँ कैसे 
वक्त के ज़ुल्म-सितम को पल भर
में भुलाऊं कैसे?
मुकद्दर में क्या हैं ये हम नहीं जानते
पर जज़बात कुछ कर गुजरने की
आज भी काम नहीं है हम में
सोचती हूँ वक्त कितना रुलाएगा
कभी तो वो सूरज आएगा
जिस दिन अपने हिम्मत की जीत होगी.....

शुक्रवार, 10 मई 2019

मेरी अम्मा

जब अपनी गुड़िया को मैंने 
लिया गोद में पहली बार 
मुझको घूर रही थी तेरी
गोल-मटोल सी आँखे 
पूछ रही थी मानो मुझसे 
क्या तुम ही मेरी अम्मा हो 

मेरे अरमानो और सपनो की 
तुम ही भूल भुलैया हो 
शुरू तुम्ही से हूँ मैं मैया 
जीवन तुम पर अर्पित है 
तुम ही बिस्तर, तुम ही पालना 
तुम ही स्वर्ग की परियां हो 

तुम पर अपना 
खूब प्यार बरसाऊँगी 
मैं तेरा हर सपना अम्मा 
पूरा कर के दिखलाऊँगी

मेरी अम्मा तुझसे मेरा 
आज-अभी ये वादा हैं 
जब तेरी आँखें भीगेगी 
खुशियों की ही खातिर।

शनिवार, 29 दिसंबर 2018

मेरे प्यारे बच्चों

तुम तारों से दीपक बनकर
एक दिन नम पर छा जाना
करो न तुम विश्राम कभी
ये जीवन पूर्ण विराम नहीं
हर कदम लक्ष्य की ओर बढ़ो
धीमे-धीमे चलकर ही सही
इस कठिन डगर को पार करो
निर्भय निर्लोभ सदा रहना
पग-पग पर तुम डटकर चलना
बस हार-जीत की उलझन में
खुद को उलझाकर मत रखना
हर रोज़ परीक्षा देनी है
हर कदम हमें सिखलाता है
तुम नित्य नए बधाओं से
लड़कर खुद को मजबूत करो
तुम हृदय प्रेम की झरना से
सीचों मुरझाये कलियों को
यह वक्त तुम्हे मुश्किल से मिला
इसे व्यर्थ न यूँ ही जाने दो
हर कठिन डगर पर हिम्मत और कोशिश
ही जीत दिलाती है.

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

विचार

कुछ कदम हमें आगे बढाने ही होंगे
वर्षों से पड़ी धुल
रिश्तों से हटाने ही होंगे
ख़ामोशी की बढती हुई ऊँची दीवार
को खुद से गिराना ही होगा
काश हमारी धरती
फिर से जन्नत बन जाए
रिश्तों में वही मिठास
फिर से लौट आये
हर घर में खुशियाँ हो
सबको अपनों का साथ मिले
सच्चाई और सादगी हर चेहरे से झलके
हमारे प्यार और खुशियों से
रौशन पूरा संसार हो
जीत हो मेरी और सबकी हार हो
ऐसे विचारों का हम में कभी न संचार हो
हम तभी खुश रह पायेंगे
जब खुशियाँ चारों ओर हो
किसी से कोई गिला-शिकवा न हो
हर ओर अपनत्व का संचार हो
कोशिश अगर हम कुछ करे
तो सामने से हाथ खुद-ब-खुद बढ़ जायेंगे.

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

शेरावाली माँ

ओ माँ शेरावाली
ओ माँ शेरावाली
तुम सारे जग से निराली
तुम सारे जग से निराली
तू है जोतावाली
तेरी अपनी शान निराली
ओ माँ शेरावाली
तू बिगरी बनाने वाली
खुशियों की ज्योत जगा दे
मन का अँधियारा दूर करा दे
माँ हमको अपने दिल में
अपनत्व का बोध करा दे
ओ माँ शेरावाली
मेरी ममता आज जगा दे
मेरा जीवन खास बना दे
मुझे अपने द्वार बुला ले
अपनी आँचल की छाँव में
मुझे अब तो दर्शन दे दे
ओ माँ शेरावाली
ओ माँ जोतावाली.

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

स्त्री

जन्म से संसार में 
सृजन करने को है आई 
अर्पण ही स्वभाव उसका 
दर्पण में है ढालना 
कोई कमी रह जाए ना 
ढालना सांचे में खुदको 
हर नयन से सिख लेती 
हर नयन में ढूंढती 
तस्वीर मेरी कौन-सी है 
जो कभी दर्पण में देखा 
या कभी जग ने दिखाया 
माँ ने हमको क्या सिखाया 
और दुनिया ने बताया 

तू नहीं है बिटिया रानी 
बोझ है तू इस धरा पर 
है नहीं चाहत तेरी कोई 
हो नहीं आहट तेरी कोई 
मेरी ही परछाई बनकर 
तू सदा रह जाएगी 

हमने चाहा तो दिखाया 
हमने चाहा तो छिपाया 
हमने चाहा तो सताया 
तुम को आगे रखना भी 
हिस्सा मेरी नीतियों का 

कब तक छदम का जंग लड़ोगे 
हम पर कुठारा घात करोगे 
हम बने है ऐसी मिट्टी के 
लाख़ जतन कर लोगे फिर भी 
हमें न तुम तोड़ पाओगे 

स्त्री अमरत्व का नाम है 
स्त्री प्रेम का प्रतीक है  
स्त्री दया का सागर है 
स्त्री जीवन में खुशियाँ है  
स्त्री चेहरे की मुस्कान है 
स्त्री निर्मल और पवित्र है 

इसे दिल से महसूस तो करो 
जीवन परिपूर्ण हो जाएगा 
स्त्री माँ,बहन,बेटी ही नहीं 
हर घर में पूजी जाने वाली लक्ष्मी भी है 
इसकी क़द्र करके तो देखो 
ज़िन्दगी जन्नत बन जाएगी.

रविवार, 30 सितंबर 2018

आपबीती

अंतर्मन में होड़ लगी है
जीवन पल-पल बीत रहा है
हर पल, हर क्षण जीत रहा है
पर पल-पल में टूट रहा है
जीवन क्रम से छुट रहा है
बोतल में शाम डुबोता हूँ
कुछ खोता हूँ कुछ पता हूँ
हैं कामयाब लहरे संग-संग 
फिर मैं क्यों गोते खाता हूँ
है चहल-पहल चहुँ ओर मेरे
फिर मैं क्यों नैन भिगोता हूँ
जीवन का है वरदान मिला
फिर मैं इस पर क्यों रोता हूँ
सब कुछ मुट्ठी में भरने की
चाहत ने भूख को मारा है
इस रंग-बिरंगी दुनिया में
काटों का पौध लगाया है
जो भी हमने दुनिया को दी
वापस हमने सब पाया है
फिर रोना क्या फिर गाना क्या
हैं संग-संग मौज मनाना क्या
कुछ सिख मिली
कुछ मीत मिले
जिसने जीवन को जित लिया
अब हम को भी अपनाना है
अब राह अलग बनाना है.