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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

सोमवार, 16 सितंबर 2019

हिंदी

मैं हिंदी हूँ
भारत माँ के माथे की बिंदी हूँ
हर्ष और उल्लास की अभिव्यक्ति हूँ
मैं सरल सुन्दर और प्रेम की भाषा हूँ
मैं विश्व में दुसरे नंबर की भाषा हूँ
मेरे छने वाले की लम्बी कतार है
मैं अपनी बात आसानी से दुसरो तक पहुँचाहती हूँ
सबके दिलों में बड़ी जल्दी मैं बस जाती हूँ
पर अपने ही देश में
सब मेरे पर टंटा करते है
कहते हैं हिंदी ही क्यूँ
तमिल को राष्ट्र भाषा बनाओ
बच्चों माँ की जगह माथे पे होती है
उसे पैरों में न गिराओ
मैं हिंदी हूँ तेरे दिल में बस्ती हूँ
हमें अपना कर तो देखो
सारी दूरियाँ मिट जाएंगी
अखंड भारत हैं हमारा
इसे अखंड ही रहने दो.

शनिवार, 14 सितंबर 2019

कुछ सीखो हमसे

उस आज़ादी का क्या करना
जिससे नित दिन खून खराबा हो
हर ओर उदासी छाई हो
हर घर में रोना-धोना हो
हर सड़क पे खून के धब्बे हो
हर गलियाँ सुनी-सुनी हो
माता-बहनों की चीखों से
चित्कार रही हर दिशा जहां
हर सुबह अँधेरी काली हो
फिर रात का आलम क्या कहना
हर हाथ जहां बारूदो से
मुट्ठी भर कर है सोता
सोती भूखी आधी जनता
खाना-पानी सब है टंटा
हर ओर बिखरती लाशों में
हैं अपना कौन पराया कौन
जीवन है जंग जहाँ
सपना बन्दुक की गोली है
एटम बम पर बैठे रहते
उस देश के नेता हर दम है
कुछ सिख सको तो सिख लो तुम
मेरे बलिदानी नेता से
तुम जपते हो दिन-रात जिसे
सीखो कुछ उसके जीवन से
वह जीता है बस जीता है
हर पल बस देश को जीता है
खुशियाँ इस देश में कैसे हो
हर पल वह कोशिश करता हैं.

बुधवार, 11 सितंबर 2019

कश्मीर

आज 370 से कश्मीर की बेड़ी खुल गई
आज आज़ादी का हमने भी स्वाद चख लिया
कहते है स्वर्ग की धरती हूँ मैं
पर खून की होली ही खेली है हमने
ज़िन्दगी जीने की तो कोई तमन्ना ही नहीं
मौतों का सिलसिला ही देखा है हमने
फूलों के बागों से झांकती है बंदूके
पत्थर मार-मार कर के हम
अपने प्रहरी को है भगाते
आतंकवादियों के मौत पर हम जश्न हैं मनाते
कैसा ये स्वर्ग है हमारा
कितनी छोटी सोच है हमारी
जिस देश ने लाखों सैनिक
हमारे खातिर बलिदान कर दिया
उसको ही अपना दुश्मन है बताते
मैं उम्मीद करती हूँ
सोच बदलेगी हमारी
हम कोहरे से बाहर निकल कर
सच को देख पाएंगे
ज़िन्दगी को खुशियुओं से भर पाएंगे
और इस सच्चाई को
सच बनायेंगे
कि धरती पर स्वर्ग है कही तो
वह कश्मीर की धरती हैं
जो भारत माता का आँचल है
उसे फूल और चाँद सितारों से सजायेंगे
सत्तर वर्षों के बाद ही सही
आज़ादी के मायने हम समझ पाएंगे.

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

जीवन पथ पर

जीवन पथ पर हैं काटें हज़ार
अजीब सी उलझन है
सुलझी हुई ज़िन्दगी
बिखर कर रह जाती है
सब उसे नासमझ और बुद्धू कहते है

हर उलझा हुआ आदमी
कामयाबी की मुकाम पाता है
चोर और बदमाश समाज में सम्मान पाते है
हर ओर उनकी वाह-वाह होती है
आओ-भगत भी लोग खूब उनकी करते है
माँ लक्ष्मी की कृपा भी उन्ही पर बरसती है

देवताओं के आँगन में भोग उनका ही बड़ा होता है
चढ़ावा जितना बड़ा होता है
सम्मान भी उतना ही मिलता है
खुशियों की दस्तक भी 
उनके दरवाज़े ही होती होती है
क्योंकि आज कल हर चीज़
पैसे के बल पर मिलती है

माँ भी उसी पुत्र को आँचल की छावं देती है
जिसके पॉकेट में पैसे की गद्दी होती है
वह पुत्र किस काम का जो खाली हाथ आता है
माँ भी कहती है
समाज में मेरी क़द्र कम हो जाती है
तू तो कभी-कभार ही आया कर

तू पैसा तो कमा पाया नहीं और क्या कर पायेगा
तेरी ईमानदारी भी किस काम की
न तो हमें खुशियाँ दे सकती है
और न ही सम्मान
तेरा होना भी न होने के बराबर है

जब माँ ही बेगानों-सा व्यवहार करती  है
तो गैरों से क्या उम्मीद करूँ
गैरों के ठोकर से तो अब दर्द भी नहीं होता
अपनों ने ही ज़ख्म इतने दिए है
अब तो ज़ख्म से भी प्यार होने लगा है

अब तो हर वक्त ये डर लगता है
की अगला नंबर किस रिश्ते का है
कौन-सा रिश्ता अपना फरमान सुनाएगा
तू है बेगाना अब मेरे लिए
मत आना मेरे द्वार
अब तेरा मेरा रिश्ता ही क्या है.....?

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

रिश्ते की डोर

रिश्ते की डोर विश्वास से थमती है 
प्रेम से महकती है
खुशियों से चमकती है 
रिश्तों से चलती है 
जीवन की बगीया 

रिश्ते की डोर विश्वास से थमती है 
खुशियाँ हो घर आँगन में 
उसके खातिर घर की लक्ष्मी 
दीपक सी जलती है 
पवन की सुखद एहसास 
हर साँसों में भारती है 
घर का हर कोना खुशियों से 
महकाने के खातिर हर बला से 
पहाड़ की तरह लडती है 

रिश्ते की डोर विश्वास से थमती है 
शक और विश्वासघात ये दोनों ऐसे कीड़े है 
जो रिश्तो की डोर को कमज़ोर ही नही 
तोड़ भी देते है 
उसके अंदर की खुशबु सोख लेते है 
बड़ी- बड़ी खुशियों को पल में निगल जाते है 

जीवन की डोर थाम तो ली है 
पर भरोसा रखने और निभाने 
का सच्चा प्रयत्न तो करो 
रिश्ता बाज़ार में बिकता नही 
इसकी तोल-मोल न करो 
टूट कर रह जाओगे 
एक दिन ऐसा आएगा 
जब रिश्तो के लिए 
तरस जाओगे.

शनिवार, 29 जून 2019

पंखुरियाँ

गुलाब की पंखुरियों पर 
फैली ओस की कुछ बुँदे थी 
उनको वहम था 
हमसे कोमल कोई नहीं 
हम तो सुन्दर है 
खुशबूदार है 
प्रकृति का श्रृंगार है 
कोई छुए तो 
मैं चुभ भी जाती हूँ 
फिर भी लोग हम पे मरते है 
हमारे संग ही 
अपने प्रेम का इज़हार करते है 
हमारा रंग जब लाल हो तो 
प्यार बन जाता है 
वही जब पीला हो तो 
दोस्ती का शिखर बन जाता है 
काला हो तो 
उदासी का कारण बन जाता है 
और जब सफ़ेद हो तो 
हम शान्ति दूत बन जाते है 
हमसे सुन्दर कौन है 
हमसे कोमल कौन है 
पर गुलाब की पंखुरियाँ 
तुझे कहाँ पता है 
ये बेरहम दुनिया 
और इसके लोग 
तेरा क्या हश्र करेंगे 
जीने भी नहीं देंगे 
तुम्हे मरने भी नहीं देंगे 
अपने हाथो में ले कर 
तुम्हे पूरी तरह खिलने भी नहीं देंगे 
इनके कारनामों से 
मौसम इतना बदला है कि 
ये तुम्हे जीने भी नहीं देंगे 
और मरने भी नहीं देंगे 
अपने आप पर इतना इतराओ मत 
ये बेरहम दुनिया है 
ये किसी का भला नहीं चाहते 
ये तो बस स्वार्थ में दुबे है 
अपने लिए जीते है। 

सोमवार, 10 जून 2019

आसमां

मैं पंछी हूँ, आकाश नहीं 
जीवन रण में अनजान नहीं 
मेरी सोच नयी, ये बात अलग 
हैं अपनों की पहचान मुझे 
मैं बोलती कम हूँ पर नादान नहीं 
मैं जानती हूँ, सब जानते है मुझे 
दूर रहकर भी पहचानते है मुझे 
पर गिला सबको है मुझसे 
हरा पाएंगे कब इसको 
मेरी हार से क्यों खुश होते हो तुम लोग 
अपनी जीत का जश्न मानाना सीखो 
हमने तो जंग में भी जश्न मनाये हैं 
बार-बार गिरकर भी संभल जाते है 
राह रोककर खड़े है अपने ही 
कोई बात नहीं अर्जुन बनकर ही निकल जाएंगे 
हम नहीं जानना चाहते उनको 
जो मेरे राह में खड़े है 
वो अपने हो या अनजाने 
किसी की परवाह नहीं करते हम 
खतरा सामने है, डटकर लड़ेंगे 
हक़ अपना हम लेकर रहेंगे 
आसमान में उन मुक्त उड़कर रहेंगे 
जीवन जीने के लिए मिली हैं 
अभावो में ही सही 
इसे जी भर कर जीएंगे 
गम को मुस्करा कर पिलेते है हम 
खुशियों के स्वागत में दामन 
फैला देते है हम 
अपनों से ना सही गैरो से ही 
प्रेम पा लेते हैं हम 
ज़िन्दगी तन्हाइयों में क्यों गुज़ारे 
गैरों के बीच ही अपना घर 
बना लेते है हम।