यह ब्लॉग खोजें

Translate

विशिष्ट पोस्ट

प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

कुछ देर

 यादो को सुलाने में कुछ देर तो लगती है 

ख्वाबो को भुलाने में कुछ देर तो लगती है 

दिल को समझाने में कुछ देर तो लगती है 

आपकी यादों से दूर जाने में कुछ देर तो लगती है 

अपनी मासूमियत को छुपाने में कुछ देर तो लगती है 

दिल में जलते थे प्रेम के दीये उसे बुझाने में कुछ देर तो लगती है 

हम हैं अभी अधूरे-अधूरे से 

अपने आप को मुक़म्मल करने में कुछ देर तो लगती है। 

मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

चाहत

 मैंने चाहतों की साड़ी उम्मीदे छोड़ दी 

खुश रहने लगा हूँ जबसे उम्मीदे छोड़ दी 

यूँ ज़िन्दगी को अक्सर जिया हूँ मैं 

गरजती बारिशों में भी सूखा रहा हूँ मैं 

काली घटाओ में भी रौशनी की चाह रखता था 

ज़िन्दगी चाहतों से लवरेज़ थी मेरी 

पर तन्हाइयों ने कुछ इस कदर तोड़ दिया 

आज खुशियाँ भी काटने को दौड़ती है 

रंग बिरंगी खुशियों के बीच 

हम कब अकेले हो गए पता ही नहीं चला। 

रविवार, 3 दिसंबर 2023

जीवन यात्रा

कैसे-कैसे मै खुद को बदल रही हूँ 

थाम कर हाथ मेरा साथ चल लो मेरे 

आज हर कदम पर फिसल रही हूँ मै

कैसे कैसे मै खुद को बदल रही हूँ

तुम पर भरोसा था साथ देने का 

राह में अपने कैसे-कैसे भटक रही हु मैं। 


कैसे-कैसे मैं खुद को बदल रही हूँ 

कहाँ पता था तुम ऐसे बदल जाओगे 

थी बेफ़िक्र तुम्हारे साथ रहने से 

अब ख़ौफ़ज़दा हूँ माहौल बदल जाने से। 


कैसे-कैसे मैं खुद को बदल रही हूँ 

ज़िन्दगी खिलती हुई धुप थी 

अब मैं कबसे ढलती सांझ को निहार रही हूँ 

सुबह और शाम में कम हो रहा है फासला। 


कैसे-कैसे मैं खुद को बदल रही हूँ 

पहले तो हवा की सरसराहट में भी संगीत था 

अब तो संगीत भी मुँह चिढ़ाने लगा है 

ढोलक की थाप से भी दम घुंटने लगा है 

ज़िन्दगी हर दिन अपना रंग बदल रही है। 

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

अम्बे माँ

 हे माँ मैं हूँ भक्त तुम्हारी 

मुझ पर तुम ये दया दिखा दो 

रोज़ नए उलझन में पड़कर 

मन उलझा रहता है

द्वार तुम्हारे आने को माँ 

व्याकुल मन रहता है। 


कृपा तुम्हारी कब होगी माँ 

हंसी-ख़ुशी दर्शन पाने को 

माँ मैं दौड़ी आऊंगी 

मुझे प्यार से गले लगाकर 

माँ तुम प्यार लुटाओगी 


हे माँ मेरी अम्बे माता 

जग का दुःख हरने वाली 

अपने दर पर इस बेटी की 

झोली कब भर पाओगी 

बाट जोहती माँ मैं तेरी 

वर्षो से बैठी हूँ माँ 


हे माँ मैं हूँ भक्त तुम्हारी 

मुझ पर प्यार लुटाओ माँ 

हमको जग ने ठुकराया पर 

तुम भी ना ठुकराओ माँ। 

शुक्रवार, 17 नवंबर 2023

सुनहरे पल

 तुम प्रेम हो तुम गीत हो 

चाहत के तुम तो मीत हो 

तुम नित नए संगीत हो 

तुम फूल हो तुम हो कली

तुम ही तो खुशबू रंग हो 

हर ओर फैली वादियों में 

जल की कल-कल धार हो 

तुम मेरी शीतल छाँव हो 

तुम हो ख़ुशी तुम गीत हो 

तुम ही तो मेरे मीत हो।  

सोमवार, 13 नवंबर 2023

सफ़रनामा

सब झूठे रिश्ते नाते हैं  

सब दिल रखने की बाते हैं 

कब कौन किसी का होता है  

सब असली रूप छिपाते हैं 

एहसास से खाली लोग यहाँ 

शब्दों के तीर चलाते हैं  

अपनों का विश्वास तोड़  

गैरो पर प्यार लुटाते हैं  

दिल में भरकर तूफ़ान यहाँ 

चेहरे पर हँसी दिखलाते हैं  

सब रहते है अब मौन साध 

अपनों से दुरी बनाते हैं  

थे खुशियों के रंग जहाँ

ग़म आज वहाँ इतराती हैं 

सब झूठे रिश्ते नाते हैं  

सब दिल रखने की बाते हैं। 

बुधवार, 9 मार्च 2022

पंख लगा दो

मुझको कोई पंख लगा दो
मैं उड़  जाऊ दूर गगन में 
घूम फिर खुशियों की झोली 
मैं भरकर सब साथ ले आऊ 

देखो चंचल हवा सलोना 
चिड़िया कलरव करती प्यारी 
दूर गगन में सूरज दादा 
मंद-मंद मुस्काते रहते 

देखो पार्क में झूलते बच्चे 
दादा-दादी घूम रहे हैं 
माताएं बैठी मुस्काती 
सपनों को  है पंख लगाती 

अलग अलग टोली में देखो 
अलग अलग चेहरों के रंग 
कोई झूम रहा खुशियों में 
कोई बैठा मौन साध कर