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प्यारे बच्चो

यूँ ही प्यार जताना बच्चो  मेरे संग आ जाना बच्चो  हँस - हँस कर दिखलाना बच्चों  घूम फिरकर हंसी - ठिठोली  मुझसे तुम कर जाना बच्चो  नन्हे-नन्हे ...

रविवार, 18 फ़रवरी 2024

बसंत

देखो बसंत आया है 

सबके मन को भाया है 

चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले है 

मौसम भी सुहाना है 

मन मुस्कुरा रहा है 

तन झूमने को करता 

रंग-बिरंगे गुलाल लेकर 

बच्चे इधर-उधर है डोले 

कभी किसी के सर पर डाले 

तो कभी किसी को बाँहों में भर ले

आया बसंत आया 

सबके मन को भाया। 

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

आज

आज मुझे किसी ख़ास का इंतज़ार है 

जो वर्षों पहले छूट गया था कही 

उसका इंतज़ार मुझे आज है 

वो है अपना-अपना सा 

जब भी उसे देखती हूँ 

आँखों में आंसू और दिल में दर्द सा उठता है 

ज़िन्दगी कितनी विरान हो गयी थी 

आज मेरे मन में सैकड़ों दीप जगमगाये है 

दिवाली बेमौसम आज मेरे घर आयी है। 

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

आदमी

आदमी है आदमी से आज परेशान 

हर आदमी अंदर से है डरा-डरा 

कब कौन ऐसा मिल जाये 

जो ठग के ले जाये सब कुछ 

हर बात पर है धरना का ख़ौफ़ 

राह रोककर खड़े हो गए 

सबकुछ अस्त-व्यस्त कर डाला

ज़िन्दगी को संवार सकते नहीं 

बिगाड़ने पर आतुर हर दम रहते है। 

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2024

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस है आया 

हम सबकी खुशियां लाया 

वीरों पे फक्र हो आया 

वीरों ने देश बचाया 

अपनी क़ुरबानी देकर 

और हर ओर विजय लहराया 

संविधान हमारा बनकर के 

इस दिन को हमें मिला था 

इस पावन दिन को तब से 

हर वर्ष मनाते है हम 

इस पावन पर्व पर खुशियाँ।

बुधवार, 31 जनवरी 2024

स्वप्न

रोज़ सपने में आओ 

शगुन दे के जाओ 

साथ खुशियाँ मनाओ 

हर्ष में गीत गाओ 

लहरों पे झूम जाओ 

कभी रूठ जाओ कभी फिर मनाओ 

मेरे स्वप्न में रोज़ ऐसे ही आओ 

शनिवार, 20 जनवरी 2024

माँ

माँ तुम्हारी याद मेरे दिल में बसती है 

तू नज़र के सामने मुझे रोज़ दिखती है 

ख्वाब में भी माँ मुझे दिल से लगाती है 

प्रेम का अपना शगुन मुझे दे के जाती है 

माँ मेरी मुझको तेरी बड़ी याद आती है 

हर कठिन रस्ते में माँ की याद आती है 

क्या करू कैसे तुम्हे दिल से लगाऊं माँ 

माँ तुम क्यों दूर हो, मेरे पास आओ माँ। 

शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

मकान

आज के इस ज़माने में 

हर आदमी का 

अपना एक मकान होना चाहिए 

मुक़ाम मिले ना मिले 

मकान मिलना चाहिए 

ज़िन्दगी दर बदर की ठोकरों से 

गुलज़ार है 

दिन में ख़ामोशी तो 

रात में आँसुओ की दूकान है 

हर इंसान के दिल में 

चल रहा आज तूफ़ान है 

अकेली ज़िन्दगी कटती नहीं 

दिल के कोने में बस्ता एक शमशान है 

मकान से ही इंसान की पहचान है

वर्ना तो हर आदमी यहाँ 

एक किरायदार है।